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एमपी में भावांतर योजना में उड़द की तुलाई पूरी, यहां अभी तक जारी

सरकारी समर्थन मूल्य पर बिना तुलाई और भंडारण के किसानों को फायदा पहुंचाने वाली मध्यप्रदेश की भावांतर योजना वहां...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 24, 2018, 06:55 PM IST

सरकारी समर्थन मूल्य पर बिना तुलाई और भंडारण के किसानों को फायदा पहुंचाने वाली मध्यप्रदेश की भावांतर योजना वहां के किसानों को काफी पसंद आई है। वहां पर उड़द, सोयाबीन की तुलाई दिसंबर में ही पूरी हो गई, लेकिन भवानीमंडी समेत अन्य तौल कांटों पर मंगलवार तक भी उड़द की तुलाई जारी है।

एमपी मेें भावांतर योजना में उड़द व सोयाबीन तुलाई के लिए किसानों का सहकारी समितियों में पंजीयन किया गया था। इसके बाद उन्हें उनके उड़द आदि को खुली नीलामी बोली में बेचने की कह उसका बिल लेकर समिति में जमा करा लिया गया था। इस दिन के तीन राज्यों के उड़द, सोयाबीन के अधिकतम भाव को उस दिन का माॅडल भाव मानते हुए इसके और सरकारी समर्थन मूल्य की बीच की राशि किसानों के बैंक खाते में पहुंचाई गई थी। इससे एक ओर किसानों को उसकी जिंस खुले में बिकने से जरूरत की बहुत बड़ी राशि तुरंत मिल गई। दूसरी ओर सरकार को किसी भी प्रकार की तुलवाई और भंडारण भी नहीं करना पड़ा।

भवानीमंडी में अभी तक हो रही उड़द की खरीद, एमपी में किसानों के खाते में पहुंच रहे सरकारी समर्थन मूल्य के पैसे

भवानीमंडी. सरकारी तौल कांटे पर उड़द तुलाई के लिए आए किसान।

भास्कर न्यूज | भवानीमंडी

सरकारी समर्थन मूल्य पर बिना तुलाई और भंडारण के किसानों को फायदा पहुंचाने वाली मध्यप्रदेश की भावांतर योजना वहां के किसानों को काफी पसंद आई है। वहां पर उड़द, सोयाबीन की तुलाई दिसंबर में ही पूरी हो गई, लेकिन भवानीमंडी समेत अन्य तौल कांटों पर मंगलवार तक भी उड़द की तुलाई जारी है।

एमपी मेें भावांतर योजना में उड़द व सोयाबीन तुलाई के लिए किसानों का सहकारी समितियों में पंजीयन किया गया था। इसके बाद उन्हें उनके उड़द आदि को खुली नीलामी बोली में बेचने की कह उसका बिल लेकर समिति में जमा करा लिया गया था। इस दिन के तीन राज्यों के उड़द, सोयाबीन के अधिकतम भाव को उस दिन का माॅडल भाव मानते हुए इसके और सरकारी समर्थन मूल्य की बीच की राशि किसानों के बैंक खाते में पहुंचाई गई थी। इससे एक ओर किसानों को उसकी जिंस खुले में बिकने से जरूरत की बहुत बड़ी राशि तुरंत मिल गई। दूसरी ओर सरकार को किसी भी प्रकार की तुलवाई और भंडारण भी नहीं करना पड़ा।

18 क्विंटल उड़द की 38 हजार भावांतर राशि मिली

कैसोदा के रामप्रताप गुर्जर ने बताया कि उसने अपने 18 क्विंटल उड़द खुले में 3300 रुपए प्रति क्विंटल में बेचे थे। उस दिन माॅडल भाव भी करीब इतना ही रहा था। इससे इसके और सरकारी समर्थन मूल्य 5400 रुपए प्रति क्विंटल की बीच की बनी 38,700 रुपए की राशि उसके खाते में आ गई। इसी तरह चार बार में कुल 26 क्विंटल उड़द की करीब 54 हजार 880 रुपए और सोयाबीन की 20 हजार 700 रुपए की अंतर राशि उसके खाते में आ चुकी है।

यहां के किसानों को अब तक भुगतान नहीं

एमपी में उड़द-सोयाबीन की तुलाई दिसंबर में ही पूरी हो गई है। सरकार को इसमें जरा भी भंडारण की जहमत नहीं उठानी पड़ी है, जबकि भवानीमंडी में सरकारी समर्थन मूल्य में मंगलवार तक भी तुलाई जारी है। भवानीमंडी के वेयर हाउस गोदाम फुल होने के बाद नए गोदामों में जिंस जमा करवानी पड़ रही है। तौल कांटे पर 4 अक्टूबर से अभी तक 43 हजार 823 क्विंटल उड़द और 9 हजार 820 क्विंटल सोयाबीन तोली जा चुकी है। इसके बाद भी आवक जारी है। इसका एक कारण जिन किसानों ने पहले खुली नीलामी बोली में उड़द तुलवा दिए। उनके नाम से बाद में सरकारी समर्थन मूल्य पर फिर से तुलाई की गुंजाइश बनी हुई है।

भानपुरा (मप्र) की कैसोदा सहकारी समिति के किसानों के 22 दिसंबर तक उड़द तोले गए थे। 30 दिसंबर तक सोयाबीन तोली गई थी। अब तुलाई बंद हो गई है। रामप्रताप गुर्जर, उपाध्यक्ष, कृषिमंडी, भानपुरा (मप्र)

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