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पहल: होली जलेगी, पेड़ बचेंगे, नहीं होगा प्रदूषण

अग्रवाल उत्सव भवन में तैयार कंडों की होली। होली के लिए एक लाख कंडे और बड़बूले बनाए, 20 समितियों ने करवाई बुकिंग 2...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:20 AM IST
अग्रवाल उत्सव भवन में तैयार कंडों की होली।

होली के लिए एक लाख कंडे और बड़बूले बनाए, 20 समितियों ने करवाई बुकिंग 2 लाख रुपए आय होगी गोशाला पर खर्च

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

शहर में इस बार होली का पूजन और दहन संस्कृति के अनुरूप होगा वहीं यह पेड़ बचाने और पर्यावरण संरक्षित रखने का संदेश भी देगी। लकड़ियां, टायर, पटाखे न जलाते हुए प्रदूषण मुक्त होलिका दहन को लेकर जागरुकता अभियान चलाया गया।

नौगावां की परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने यह पहल की। वहां एक महीने में एक लाख कंडे तैयार किए। लोकपरंपरा के अनुरूप गोबर के बड़बूलों की मालाएं भी बनाईं। आयोजन समितियों ने कंडे और बड़बूलों की मालाओं के लिए एडवांस बुकिंग करवाई है। आयोजनस्थलों पर गुरुवार सुबह इनकी ट्रक से सप्लाई पहुंचाई जाएगी। संस्था के गोविंदप्रसाद सोडाणी ने बताया कि दो रुपए प्रति कंडे के हिसाब से बुकिंग की है। 20 से ज्यादा आयोजन समितियों ने पूर्व बुकिंग करवाई है। करीब दो लाख रुपए आय का अनुमान है जो गोशाला में उपयोग होगी। होली में कपूर व छोटी इलायची की आहुतियां दी जाएंगी। इसका धुआं वातावरण को डेंगू व स्वाइन फ्लू के रोगाणुओं से मुक्त रखने में मददगार होगा। पेज 18 पर भी देखें

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

शहर में इस बार होली का पूजन और दहन संस्कृति के अनुरूप होगा वहीं यह पेड़ बचाने और पर्यावरण संरक्षित रखने का संदेश भी देगी। लकड़ियां, टायर, पटाखे न जलाते हुए प्रदूषण मुक्त होलिका दहन को लेकर जागरुकता अभियान चलाया गया।

नौगावां की परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने यह पहल की। वहां एक महीने में एक लाख कंडे तैयार किए। लोकपरंपरा के अनुरूप गोबर के बड़बूलों की मालाएं भी बनाईं। आयोजन समितियों ने कंडे और बड़बूलों की मालाओं के लिए एडवांस बुकिंग करवाई है। आयोजनस्थलों पर गुरुवार सुबह इनकी ट्रक से सप्लाई पहुंचाई जाएगी। संस्था के गोविंदप्रसाद सोडाणी ने बताया कि दो रुपए प्रति कंडे के हिसाब से बुकिंग की है। 20 से ज्यादा आयोजन समितियों ने पूर्व बुकिंग करवाई है। करीब दो लाख रुपए आय का अनुमान है जो गोशाला में उपयोग होगी। होली में कपूर व छोटी इलायची की आहुतियां दी जाएंगी। इसका धुआं वातावरण को डेंगू व स्वाइन फ्लू के रोगाणुओं से मुक्त रखने में मददगार होगा। पेज 18 पर भी देखें

गोशाला परिसर में कंडों की सप्लाई की तैयारी।