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पोषाहार के बचे खाने से छात्र बना रहे केंचुआ खाद, स्कूल में बढ़ी हरियाली

Bhilwara News - करेड़ा | उपखंड क्षेत्र के बेमाली के सीनियर सैकंडरी स्कूल की 12वीं विज्ञान के छात्र नीरज वैष्णव तथा 10वीं के छात्र...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:47 AM IST
Kareda News - effluent from the nutritional food
करेड़ा | उपखंड क्षेत्र के बेमाली के सीनियर सैकंडरी स्कूल की 12वीं विज्ञान के छात्र नीरज वैष्णव तथा 10वीं के छात्र कैलाश कुमावत ने मिड डे मील की बची जूठन, सब्जी व फलों के कचरे का बेहतर उपयोग शुरू किया। इससे केंचुआ खाद तैयार होने लगी। इसका दोहरा फायदा हुआ। परिसर में सफाई रहने लगी साथ ही खाद का उपयोग पेड़-पौधों में होने लगा।

दोनों छात्रों ने कुछ दिन पहले दोपहर में पोषाहार के बाद बचे खाने, सब्जियों व फलों के कचरे से जैविक खाद बनाने के बारे में सोचा। स्कूल में छोटे बच्चे काफी जूठन छोड़ देते हैं। यह कचरा ऐसे ही फेंक दिया जाता था जो बदबू व गंदगी का कारण बन रहा था। छात्रों ने इस बारे में शिक्षक घनश्याम टेलर से बात की। फिर उनके नेतृत्व में इस कचरे को गढ्डा बनाकर उसमें डालना शुरू किया। इसमें कुछ केंचुए डाल दिए। इस पहल के अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।

दो हफ्तों में ही केंचुआ खाद तैयार हो गई। तब कुछ और गड्ढे तैयार किए गए। अब स्कूल के अन्य छात्र भी जागरुक हो गए। वे भी कचरा इन गढ्डों में डालने लगे। बच्चों ने कक्षाओं में खराब होने वाले कागज भी पुन: चक्रित कर उनसे कचरा पात्र तैयार किए। इनका उपयोग कचरा संग्रहण के रूप में किया जाने लगा है। योजना है कि विद्यालय में होने वाले सारे जैविक कचरे से सालभर केंचुआ खाद तैयारकर इसका विक्रय करें ताकि प्राप्त आय से स्कूल में भौतिक संसाधन भी जुटाए जा सकें।

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