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चंबल से आ गया लेकिन घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी

चंबल परियोजना, मेजा बांध व ककरोलिया घाटी से रोज 470 लाख लीटर पानी मिलने के बावजूद गर्मी में शहर की कई बस्तियों के लोग...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:30 AM IST

चंबल परियोजना, मेजा बांध व ककरोलिया घाटी से रोज 470 लाख लीटर पानी मिलने के बावजूद गर्मी में शहर की कई बस्तियों के लोग प्यासे हैं। कारण, चंबल प्रोजेक्ट के तहत डाली गई लाइनों का मिलान नहीं हुआ है।

पिछले दिनों सुभाषनगर विस्तार में डाली पाइप लाइन से जलदाय विभाग ने किशन धाभाई को कनेक्शन दिया। उसके घर पानी नहीं पहुंचा तो अधिकारियों को शिकायत की। समाधान नहीं होने पर संपर्क पोर्टल फिर सीएमओ में भी शिकायत की लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। शहर में जलापूर्ति के लिए रोज 530 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इसके मुकाबले 470 लाख लीटर पानी हर दिन आता है। इसमें से 400 लाख लीटर पानी चंबल से, 50 लाख लीटर मेजा बांध व 20 लाख लीटर पानी ककरोलिया घाटी से लिया जा रहा है। पुराने शहर में प्रेशर से सप्लाई नहीं होती।

लोगों को कुंडियों से पानी भरना पड़ रहा है। जबकि चंबल प्रोजेक्ट से जलापूर्ति के बाद पानी प्रेशर से आने के दावे किए थे। वर्तमान में आधे शहर में रोज तथा आधे में एक दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है।

इन क्षेत्र में लाइनों का मिलान नहीं होने से परेशानी...कृष्णानगर, लवकुश व्यायामशाला के पास जवाहरनगर, बीलिया गैस गोदाम क्षेत्र, बख्तावर मार्ग बीलिया, मालोला रोड गायत्रीनगर, आजादनगर सी सेक्टर के साथ ही पुराने शहर के कुछ क्षेत्र में लाइनें नहीं जोड़ने से पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है।

भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

चंबल परियोजना, मेजा बांध व ककरोलिया घाटी से रोज 470 लाख लीटर पानी मिलने के बावजूद गर्मी में शहर की कई बस्तियों के लोग प्यासे हैं। कारण, चंबल प्रोजेक्ट के तहत डाली गई लाइनों का मिलान नहीं हुआ है।

पिछले दिनों सुभाषनगर विस्तार में डाली पाइप लाइन से जलदाय विभाग ने किशन धाभाई को कनेक्शन दिया। उसके घर पानी नहीं पहुंचा तो अधिकारियों को शिकायत की। समाधान नहीं होने पर संपर्क पोर्टल फिर सीएमओ में भी शिकायत की लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। शहर में जलापूर्ति के लिए रोज 530 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। इसके मुकाबले 470 लाख लीटर पानी हर दिन आता है। इसमें से 400 लाख लीटर पानी चंबल से, 50 लाख लीटर मेजा बांध व 20 लाख लीटर पानी ककरोलिया घाटी से लिया जा रहा है। पुराने शहर में प्रेशर से सप्लाई नहीं होती।

लोगों को कुंडियों से पानी भरना पड़ रहा है। जबकि चंबल प्रोजेक्ट से जलापूर्ति के बाद पानी प्रेशर से आने के दावे किए थे। वर्तमान में आधे शहर में रोज तथा आधे में एक दिन के अंतराल पर पानी दिया जा रहा है।

शीघ्र दिलाएंगे समस्या से छुटकारा ...5चंबल प्रोजेक्ट के एसई डीके मित्तल का कहना है कि पीएचईडी के अधिकारियों ने करीब 20 जगह पाइप लाइन मिलान के पॉइंट की लिस्ट दी है। पाइप नहीं होने से देर हो रही है। सुभाषनगर के किशन धाभाई के यहां लाइन को ट्रेस आउट करने के साथ ही आवश्यकता होगी तो और लाइन डालकर समस्या का समाधान करेंगे।

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