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वाहन में ही प्रसव, वार्ड में एक घंटे नहीं किया भर्ती

भीलवाड़ा | गांव से गर्भवती को अस्पताल लाते समय निजी वाहन में ही प्रसव हो गया। उसे एमजीएच अस्पताल के ट्रोमा वार्ड...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:30 AM IST
वाहन में ही प्रसव, वार्ड में एक घंटे नहीं किया भर्ती
भीलवाड़ा | गांव से गर्भवती को अस्पताल लाते समय निजी वाहन में ही प्रसव हो गया। उसे एमजीएच अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में लाए। यहां परिजन भर्ती करने के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन एक घंटे तक स्टाफ ने उसे नहीं संभाला। इस दौरान स्ट्रेचर पर ही प्रसूता के रक्तस्त्राव होता रहा और वह दर्द से तड़पती रही।

मूलत: उत्तर प्रदेश के मसीपा का अजयपाल वर्मा मालीखेड़ा में ईंट भट्टे पर मजदूरी करता है। उसकी प|ी केसर कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर भट्टा मालिक श्यामकुमार अपने वाहन से लेकर एमजीएच ला रहा था। रास्ते में ही उसे प्रसव हो गया। अजयपाल ने कहा कि एंबुलेंस के लिए फोन लगाने का प्रयास किया। फोन नहीं लगने पर भट्टा मालिक श्यामकुमार स्वयं अपनी गाड़ी से केसर व हमें अस्पताल ला रहे थे। रास्ते में प्रसव हो चुका था। हम एमजीएच अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में पहुंचे तो डॉक्टर नहीं थे। स्टाफ हमारी बात तक नहीं सुन रहा था। भट्टा मालिक श्यामकुमार ने स्टाफ को बताया तो कहा गया डॉक्टर नहीं देख लेते तब तक हम कुछ नहीं कर पाएंगे। इस दौरान काफी लोग इकट्ठे हो गए। प्रसूता के रक्तस्त्राव होता रहा और मासूम की बेटी की नाल भी किसी ने नहीं काटी।

ट्रोमा वार्ड के बाहर दर्द से तड़पती रही प्रसूता, परिजन लगाते रहे गुहार

भीलवाड़ा | गांव से गर्भवती को अस्पताल लाते समय निजी वाहन में ही प्रसव हो गया। उसे एमजीएच अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में लाए। यहां परिजन भर्ती करने के लिए गुहार लगाते रहे लेकिन एक घंटे तक स्टाफ ने उसे नहीं संभाला। इस दौरान स्ट्रेचर पर ही प्रसूता के रक्तस्त्राव होता रहा और वह दर्द से तड़पती रही।

मूलत: उत्तर प्रदेश के मसीपा का अजयपाल वर्मा मालीखेड़ा में ईंट भट्टे पर मजदूरी करता है। उसकी प|ी केसर कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर भट्टा मालिक श्यामकुमार अपने वाहन से लेकर एमजीएच ला रहा था। रास्ते में ही उसे प्रसव हो गया। अजयपाल ने कहा कि एंबुलेंस के लिए फोन लगाने का प्रयास किया। फोन नहीं लगने पर भट्टा मालिक श्यामकुमार स्वयं अपनी गाड़ी से केसर व हमें अस्पताल ला रहे थे। रास्ते में प्रसव हो चुका था। हम एमजीएच अस्पताल के ट्रोमा वार्ड में पहुंचे तो डॉक्टर नहीं थे। स्टाफ हमारी बात तक नहीं सुन रहा था। भट्टा मालिक श्यामकुमार ने स्टाफ को बताया तो कहा गया डॉक्टर नहीं देख लेते तब तक हम कुछ नहीं कर पाएंगे। इस दौरान काफी लोग इकट्ठे हो गए। प्रसूता के रक्तस्त्राव होता रहा और मासूम की बेटी की नाल भी किसी ने नहीं काटी।



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