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निधन पर दान किए अंग 10 जनों को दे सकते हैं जीवन

भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ देश में प्रति 10 लाख में से महज आठ लोग ही अंगदान कर रहे हैं। अंगदान कम होने का बड़ा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:35 AM IST

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    भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

    देश में प्रति 10 लाख में से महज आठ लोग ही अंगदान कर रहे हैं। अंगदान कम होने का बड़ा कारण जागरूकता का अभाव और भ्रांतियां हैं। सच यह है कि जन्म के तुरंत बाद से लेकर किसी भी व्यक्ति के अंग दान किए जा सकते हैं। सिर्फ एक ब्रेनडेड के अंग 10 लोगों को जीवनदान दे सकते हैं।

    प्रजेेंटेशन देखकर व विशेषज्ञों से अंगदान को लेकर पहली बार ऐसी कई जानकारियां बुधवार को विद्यार्थियों, युवाओं, बुजुर्गों को पहली बार मिली। दैनिक भास्कर एवं हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की ओर से अंगदान-महादान सेमिनार सेंट्रल एकेडमी स्कूल व मेवाड़ गर्ल्स कॉलेज में हुई। मुख्य वक्ता मोहन फाउंडेशन के मोटिवेटर डॉ. पीसी जैन ने कहा कि ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति के 9 अंग दान किए जा सकते हैं। ये अंग हैं- 2 आंखें, 2 फेफड़े, 2 किडनियां, हृदय, लीवर व पेनक्रियाज। देश में ऐसे लाखों लोगों की सूची है जिन्हें विभिन्न अंगों की जरूरत है। मेवाड़ कॉलेज में मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के सहयोग से हुई सेमिनार में मुख्य अतिथि कलेक्टर इंद्रजीत सिंह व डीआईजी प्रसन्नकुमार खमेसरा थे। मुख्य वक्ता श्रीसांवलियाजी राजकीय सामान्य अस्पताल के पीएमओ डॉ. मधुप बक्षी, सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. दिनेश वैष्णव व विशिष्ट अतिथि हिंदुस्तान जिंक चंदेरिया के लोकेशन हैड विनोद वाघ, महाप्रबंधक कर्नल भगवान थे। अतिथियों का स्वागत मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष गोविंदलाल गदिया ने किया। चंदेरिया जिंक में चिकित्साधिकारी डॉ. सोनिया जैन, हैड सीएसआर डॉ. विशाल अग्रवाल, सीएसआर अधिकारी शिव भगवान, मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के निदेशक प्रो. श्रीपाल सुथार, समन्वयक रोमेंद्रपाल सिंह राठौड़, वरिष्ठ नागरिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आरएस मंत्री, विहिप के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. योगेशचंद्र व्यास, आचार्य तुलसी, पूर्व आरएएस देवीलाल आमेरिया, राधेश्याम आमेरिया, भारत विकास परिषद के सचिव दिनेश खत्री, नारायणसिंह राव, रमेश ओझा, शिक्षाविद लक्ष्मीनारायण भारद्वाज सहित वरिष्ठजन, विद्यार्थी मौजूद थे।

    प्रजेंटेशन व विशेषज्ञ वार्ताओं से युवाओं व बच्चों ने जाना अंगदान का महत्व, कानूनी प्रकिया भी समझी

    तथ्य... भारत में जागरुकता कम, वर्तमान में 10 लाख में से सिर्फ 8 लोग करते हैं अंगदान

    देहदान की घोषणा पर कालिया दंपती का सम्मान ...सेमिनार में विहिप के जिलाध्यक्ष संपत कालिया एवं श्रीमती कालिया का अभिनंदन किया गया। इन्होंने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया। कलेक्टर को इसका घोषणा पत्र सौंपा हुआ है।

    किडनी ट्रांसप्लांट से बढ़ सकती उम्र: डॉ. वैष्णव... सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. दिनेश वैष्णव ने कहा कि अंगदान को लेकर किसी प्रकार की भ्रांतियां नहीं रखनी चाहिए। भगवान गणेश के अंग ट्रांसप्लांट का सबसे बड़ा उदाहरण। संदेश भी है कि यह पुण्य कार्य है न कि धर्म की अवहेलना। किडनी फैल होने पर मरीज डाइलसिस लेते हुए तीन-चार साल ही जी पाता है। उसे किडनी ट्रांसप्लांट की जाए तो उम्र बढ़ सकती है।

    45 की उम्र में भी मेरी आंखें अच्छी, मैं नेत्रदान करूंगा: प्राचार्य दशोरा ... सुबह सेंट्रल अकेडमी में हुई सेमिनार में मुख्य वक्ता पीसी जैन से विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासा शांत की। प्राचार्य अश्लेष दशोरा ने नेत्रदान की घोषणा करते हुए शपथ पत्र भरा। उन्होंने कहा कि हाल में कराए नेत्र परीक्षण कराया था। डॉक्टर के मुताबिक 45 साल की उम्र में भी मेरी नेत्र ज्याेति अच्छी है।

    भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

    देश में प्रति 10 लाख में से महज आठ लोग ही अंगदान कर रहे हैं। अंगदान कम होने का बड़ा कारण जागरूकता का अभाव और भ्रांतियां हैं। सच यह है कि जन्म के तुरंत बाद से लेकर किसी भी व्यक्ति के अंग दान किए जा सकते हैं। सिर्फ एक ब्रेनडेड के अंग 10 लोगों को जीवनदान दे सकते हैं।

    प्रजेेंटेशन देखकर व विशेषज्ञों से अंगदान को लेकर पहली बार ऐसी कई जानकारियां बुधवार को विद्यार्थियों, युवाओं, बुजुर्गों को पहली बार मिली। दैनिक भास्कर एवं हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की ओर से अंगदान-महादान सेमिनार सेंट्रल एकेडमी स्कूल व मेवाड़ गर्ल्स कॉलेज में हुई। मुख्य वक्ता मोहन फाउंडेशन के मोटिवेटर डॉ. पीसी जैन ने कहा कि ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति के 9 अंग दान किए जा सकते हैं। ये अंग हैं- 2 आंखें, 2 फेफड़े, 2 किडनियां, हृदय, लीवर व पेनक्रियाज। देश में ऐसे लाखों लोगों की सूची है जिन्हें विभिन्न अंगों की जरूरत है। मेवाड़ कॉलेज में मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के सहयोग से हुई सेमिनार में मुख्य अतिथि कलेक्टर इंद्रजीत सिंह व डीआईजी प्रसन्नकुमार खमेसरा थे। मुख्य वक्ता श्रीसांवलियाजी राजकीय सामान्य अस्पताल के पीएमओ डॉ. मधुप बक्षी, सेवारत चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. दिनेश वैष्णव व विशिष्ट अतिथि हिंदुस्तान जिंक चंदेरिया के लोकेशन हैड विनोद वाघ, महाप्रबंधक कर्नल भगवान थे। अतिथियों का स्वागत मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष गोविंदलाल गदिया ने किया। चंदेरिया जिंक में चिकित्साधिकारी डॉ. सोनिया जैन, हैड सीएसआर डॉ. विशाल अग्रवाल, सीएसआर अधिकारी शिव भगवान, मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी के निदेशक प्रो. श्रीपाल सुथार, समन्वयक रोमेंद्रपाल सिंह राठौड़, वरिष्ठ नागरिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. आरएस मंत्री, विहिप के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. योगेशचंद्र व्यास, आचार्य तुलसी, पूर्व आरएएस देवीलाल आमेरिया, राधेश्याम आमेरिया, भारत विकास परिषद के सचिव दिनेश खत्री, नारायणसिंह राव, रमेश ओझा, शिक्षाविद लक्ष्मीनारायण भारद्वाज सहित वरिष्ठजन, विद्यार्थी मौजूद थे।

    दूर तक जाएगा अभियान का असर: कलेक्टर ...कलेक्टर इंद्रजीतसिंह ने अभियान की तुलना बटरफ्लाई (तितली) के उदाहरण से की। पर्यावरण में इसकी हलचल का असर बहुत दूर तक जाता है। उन्होंने कहा कि मुझ सहित कार्यक्रम में आया हर व्यक्ति कुछ नया सीख कर जा रहा है। यह अभियान एक दिन सोसायटी में बड़े परिवर्तन का वाहक बनेगा। खुशी की बात है कि चित्तौड़ जिले में हर दो महीने में एक देहदान का संकल्प आने लगा है।

    अंगदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं: डीआईजी ... डीआईजी प्रसन्न कुमार खमेसरा ने कहा कि अंगदान से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। जिनके अंगदान किए अंग लगते है उनके परिवारों में नई नई सुबह की शुरुआत होती है। आप अंगदान करके मरने के बाद भी कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में जीवित रहते हैं। दैनिक भास्कर व हिंदुस्तान जिंक का यह अभियान काबिल-ए-तारीफ है।

    इच्छा मृत्यु लेने वाले अंगदान का भी संकल्प लें: पीएमओ ... पीएमओ डॉ. मधुप बक्षी ने कहा कि हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु को लेकर अादेश दिया। मेरा सुझाव है कि इच्छामृत्यु लेने वालों से काउंसलिंग कर अंगदान के प्रति प्रेरित करना चाहिए। मेरे समधी को लीवर कैंसर था। लीवर ट्रांसप्लांट करना था। ऐसे में एक व्यक्ति ने लीवर दान किया और उन्हें नया जीवन मिला।

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