Hindi News »Rajasthan »Bhilwara» स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प

स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प

द्वारिकाधीश नगरी किशन करेरी गांव में आयोजित स्वर्ण कलश महोत्सव का समापन बेटी बचाने के संकल्प के साथ हुआ। 7 मई से चल...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:05 AM IST

  • स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प
    +3और स्लाइड देखें
    द्वारिकाधीश नगरी किशन करेरी गांव में आयोजित स्वर्ण कलश महोत्सव का समापन बेटी बचाने के संकल्प के साथ हुआ। 7 मई से चल रहे स्वर्ण कलश महोत्सव की पूर्णाहुति हुई। बावड़ी वाले शिव व हनुमान मंदिर पर कलश आरोहण के साथ शुरू हुई भागवत कथा का भी समापन हुआ।

    कथा के दौरान संत घीसालाल महाराज ने कहा कि इस संसार रुपी भवसागर से पार पाना है तो हमें सत्संग करना होगा। हमारे गुरु व गोविंद को हमेशा याद रखना होगा। कथा में भगवान के विवाह का चित्रण करते हुए भारतीय संस्कृति को बचाने का संदेश दिया। संत ने बेटी बचाने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि आपके घर में यदि बेटी का जन्म हो तो ढोल नगाड़े बजाकर खुशियां मनाओ। क्यों की एक बेटी ही है जो जिस कुल में प्रवेश करती है उस कुल की लाज बचाती है। जितना त्याग बेटी अपने मां बाप के लिए करती है उतना बेटा कभी नहीं कर सकता। कथा के दौरान संत ने कई भजन व गीतों के माध्यम से बेटी बचाने का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की सुंदर झांकी सजाई गई।



    गोशाला निर्माण के लिए 3.5 लाख एकत्रित ...शिवमंदिर पर कलश आरोहण करने वाले छगनलाल पुरोहित ने बताया कि किशन करेरी गांव में गोशाला निर्माण के लिए गो भक्तों ने खुलकर दान दिया। गांव में गोशाला निर्माण व संचालन के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपए की दान राशि मौके पर ही एकत्रित हो गई। कथा समापन पर एक भक्त ने 56 हजार रुपए का गुप्त दान किया।

    भास्कर संवाददाता| डूंगला

    द्वारिकाधीश नगरी किशन करेरी गांव में आयोजित स्वर्ण कलश महोत्सव का समापन बेटी बचाने के संकल्प के साथ हुआ। 7 मई से चल रहे स्वर्ण कलश महोत्सव की पूर्णाहुति हुई। बावड़ी वाले शिव व हनुमान मंदिर पर कलश आरोहण के साथ शुरू हुई भागवत कथा का भी समापन हुआ।

    कथा के दौरान संत घीसालाल महाराज ने कहा कि इस संसार रुपी भवसागर से पार पाना है तो हमें सत्संग करना होगा। हमारे गुरु व गोविंद को हमेशा याद रखना होगा। कथा में भगवान के विवाह का चित्रण करते हुए भारतीय संस्कृति को बचाने का संदेश दिया। संत ने बेटी बचाने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि आपके घर में यदि बेटी का जन्म हो तो ढोल नगाड़े बजाकर खुशियां मनाओ। क्यों की एक बेटी ही है जो जिस कुल में प्रवेश करती है उस कुल की लाज बचाती है। जितना त्याग बेटी अपने मां बाप के लिए करती है उतना बेटा कभी नहीं कर सकता। कथा के दौरान संत ने कई भजन व गीतों के माध्यम से बेटी बचाने का संदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की सुंदर झांकी सजाई गई।

  • स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प
    +3और स्लाइड देखें
  • स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प
    +3और स्लाइड देखें
  • स्वर्ण कलश स्थापना महोत्सव की पूर्णाहुति पर भक्तों ने लिया बेटी बचाने का संकल्प
    +3और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Bhilwara

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×