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पढ़ाई में तंगी बाधा बनी न दिव्यांगता, किसी का मोहताज हुए बगैर कैलाश जुटे 12वीं की तैयारी में

वो पैरों से लाचार है पर मन से नहीं। 22 साल की उम्र में ही कई धक्के खाए पर स्वावलंबन से जीने की जिद कभी नहीं छोड़ी। चाय...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:00 AM IST

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    वो पैरों से लाचार है पर मन से नहीं। 22 साल की उम्र में ही कई धक्के खाए पर स्वावलंबन से जीने की जिद कभी नहीं छोड़ी। चाय की स्टॉल लगाई, काम अच्छा चले इसलिए मोबाइल टी सर्विस शुरू की। मोबाइल या वाट‌्सएप पर कॉल मिलते ही वो अपनी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल पर चाय लेकर एक किलोमीटर दूर तक भी पहुंच जाता है। चाय गर्म रहे इसके लिए भी विशेष प्रकार की केतली का इंतजाम किया है। नतीजा यह है कि आज क्षेत्र में यह मोबाइल टी मशहूर हो गई है।

    झुंपड़ियां गांव निवासी दिव्यांग कैलाश गुर्जर पुत्र भैरूलाल ने छह माह पूर्व अपने मित्र मनोज टेलर की सलाह पर सिंहपुर में टी स्टॉल खोली। बस स्टैंड पर दैनिक भास्कर के वितरक बाबूलाल मूंदड़ा की दुकान के बाहर छोटी टेबल पर गैस चूल्हा और अन्य जरूरी सामान रखकर चाय बनाने लगा। आस-पास चाय की कई होटलें होने से धंधा नहीं चला, लेकिन निराश नहीं हुआ और मोबाइल टी सर्विस शुरू की। खुद की बैट्री चलित ट्राइसाइकिल से दूर तक चाय सप्लाई करता है। इसके प्रचार के लिए क्षेत्र के लोगों के वाट‌्सएप ग्रुप से जुड़ा और अपने मोबाइल नंबर उनमें डाल दिए। कई दुकानों, सरकारी कार्यालयों, बैंक और हाईवे स्थित दुकानों पर संपर्क कर मोबाइल नंबर दिए। आइडिया चल निकला अब कैलाश एक किमी क्षेत्र में चाय सप्लाई कर रहा है।

    हालात के चलते पढ़ाई छूटी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी दूसरे प्रदेशों में जाकर मजदूरी भी की

    मात्र नौ माह की उम्र में कैलाश के दोनों पैर पोलियोग्रस्त हो गए थे। इस कारण स्कूल भी सात वर्ष की उम्र में गया। जैसे-तैसे आठवीं तक पढ़ाई की, लेकिन आगे शिक्षा के लिए तीन किमी दूर सिंहपुर तक आने-जाने में असमर्थ होने के चलते पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। पिता के साथ खेती बाड़ी में लग गया। घर की माली हालत ठीक न होने से किशोर अवस्था में ही मजदूरी करने महाराष्ट्र चला गया। वहां कुएं खोदने के ठेकेदार के यहां एक वर्ष तक काम किया। इसके बाद यूपी में आइसक्रीम की लॉरी पर काम किया।

    इसलिए टी स्टाल का नाम भी यह रखा... कैलाश ने बताया कि उसे डेढ़ वर्ष पूर्व सामाजिक न्याय विभाग से सांसद सीपी जोशी की अनुशंषा पर बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी थी। चूंकि अब यही मोटराइज्ड बाइक उसके लिए आजीविका बन गई। इसलिए उसने अपनी दुकान का नाम सीपी टी स्टाल रख दिया।

    ओपन बोर्ड से दसवीं की परीक्षा पास की...इसी बीच राजस्थान ओपन बोर्ड से दसवीं की परीक्षा भी पास कर ली। अपने गांव में टी स्टॉल लगाई पर उधारी अधिक होने से धंधा फेल हो गया। अब सिंहपुर में स्टॉल लगा दी। कैलाश ने हाल ही में स्किल राजस्थान योजना में एक माह का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। अब कैलाश 12वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं।

    मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल से सिंहपुर गांव में चाय सप्लाई करता दिव्यांग कैलाश।

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Web Title: पढ़ाई में तंगी बाधा बनी न दिव्यांगता, किसी का मोहताज हुए बगैर कैलाश जुटे 12वीं की तैयारी में
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