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दो दिन बाद सावित्री के देवर की शादी

कुएं में गिरी 3 साल की बेटी, बचाने कूदी मां 2 घंटे पाइप पकड़े रही खेत पर आए युवक की सजगता से महिला बची, बच्ची की हुई मौत...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 05:55 AM IST
दो दिन बाद सावित्री के देवर की शादी
कुएं में गिरी 3 साल की बेटी, बचाने कूदी मां 2 घंटे पाइप पकड़े रही खेत पर आए युवक की सजगता से महिला बची, बच्ची की हुई मौत


दो दिन बाद सावित्री के देवर की शादी

सावित्री के घर में दो दिन बाद शादी है। उसके देवर पारसमल की शादी आखातीज पर 18 अप्रैल को तय है। लेकिन इस घटना ने शादी के माहौल को गमगीन बना दिया। ये भी बताया जा रहा है कि सावित्री मानसिक तौर पर बीमार है। उसका उपचार भी चल रहा है। परिजनों का कहना है कि सावित्री की तबीयत ठीक नहीं होने से गत दिनों उसे अस्पताल में दिखाया गया था।

भास्कर संवाददाता | रायला

क्षेत्र में सोमवार को दर्दनाक घटना हुई। एक मां तीन साल की मासूम बेटी को लेकर खेत पर शौच के लिए गई। पास में बिना मुंडेर के कुएं में मासूम बेटी गिर गई। ये देखकर मां ने बेटी को बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी। डूबती बच्ची व खुद को बचाने के लिए महिला चिल्लाई। वहां से निकल रहे एक युवक ने आवाज सुनकर कुएं में देखा और बचाने का जतन किया, लेकिन नाकाम रहा। इस पर वह गांव की तरफ दौड़ा। लोगों को बुलाकर महिला को निकाला, लेकिन बच्ची को नहीं बचाया जा सका।

घटना रायला के खारदा गांव की है। सोमवार सुबह करीब सवा 8 बजे सावित्री लौहार (30) प|ी कैलाश बेटी कृष्णा (3 साल) के साथ शौच के लिए गई थी। गांव में बिना मुंडेर के कुएं के पास खेलते समय मासूम कृष्णा गिर गई। सावित्री ने यह देखा तो वह बेटी को बचाने के लिए कुएं में कूद गई, लेकिन वह तैरना नहीं जानती थी। कुएं में उसने बच्ची को बचाने की कोशिश की और बाद में खुद को बचाने के लिए कुएं में पाइप की रस्सी पकड़ ली और चिल्लाने लगी। खेत पर आए गजराज सिंह ने उसकी आवाज सुनी। वह दौड़कर गांव गया और लोगाें को बुलाकर लाया। ग्रामीणों ने सावित्री को जिंदा निकाल लिया लेकिन कृष्णा की मौत हो चुकी थी।

कृष्णा


सावित्री

मैं सुबह 10-10:30 बजे खेत की तरफ जा रहा था। अचानक मुझे एक महिला की आवाज सुनाई दी। मैंने देखा कि पास के कुएं से आवाज आ रही थी। अंदर देखा तो चौंक गया। कुएं मे पाइप की रस्सी पकड़े एक महिला बचाने की गुहार लगा रही है। मैंने पहले उसे निकालने की सोची, लेकिन जब लगा कि अकेला नहीं कर पाऊंगा तो एक पल गंवाए बिना गांव की तरफ दौड़ा। मंदिर में लोग मिल गए। वहां सबको यह बात बताई। यह सुनकर ग्रामीण मदद के लिए खेत पर पहुंचे। क्षेत्र के ही शंभूलाल शर्मा, नारायणलाल प्रजापत, हीरेंद्र सिंह, नंदलाल गुर्जर, समुंदर सिंह, सत्यनारायण शर्मा ने सावित्री व उसकी बेटी को कुएं से बाहर निकाला। कुछ युवक मोटर व पाइप के सहारे कुएं में उतरे। सावित्री को बाहर निकाल लाए। बेटी को नहीं बचाया जा सका। जैसा सावित्री की आवाज सुनकर लाेगों को बुलाने वाले गजराजसिंह ने भास्कर को बताया

बिना मुंडेर का कुआं


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