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दवा इंडस्ट्री पर सरकार की 2 हजार करोड़ रु. खर्च की योजना
चीन से कच्चे माल का आयात प्रभावित होने से स्थाई समाधान की पहल
पिछले हफ्ते शेयर बाजार में जमकर उतार चढ़ाव देखने को मिला
भारत में कोरोनावायरस के बढ़ते मामले और यस बैंक में संकट के चलते पिछले हफ्ते शेयर बाजार में जमकर उतार चढ़ाव देखने को मिला है। बीएसई की टॉप-10 कंपनियों में से 6 कंपनियों का मार्केट कैप पिछले हफ्ते 95,432.26 करोड़ रु घट गया। जिसमें रिलायंस को सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। इस दौरान बीएसई का सेंसेक्स 720.67 अंक यानी 1.88 फीसदी गिर गया। शुक्रवार को यस बैंक संकट और कोरोना वायरस के चलते सेंसेक्स 894 अंक गिरा। इस एक सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 30 की 19 कंपनियों में कमजोरी देखी गई। एचडीएफसी बैंक के एमकैप में इस दौरान 23,435 करोड़ रु. की कमी आई और यह 6,22,109.94 करोड़ रु. रहा। इसके अलावा बजाज फाइनेंस का मार्केट कैप 14,299.1 करोड़ रु. घटकर 2,54,309.90 करोड़ रु., एचडीएफसी का एमकैप 11,625.3 करोड़ रु. घटकर 3,65,214.59 करोड़ रु., आईसीआईसीआई बैंक का 6,325.67 करोड़ रु. घटकर 3,14,705.23 करोड़ रु. और भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 2,673.22 करोड़ रु. घटकर 2,88,225.26 करोड़ रु. रह गया।
सबसे ज्यादा फायदा टीसीएस को: सबसे ज्यादा लाभ में इस दौरान टीसीएस रही। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 43,884.14 करोड़ रु. बढ़कर 7,94,717.56 करोड़ रु. पर हो गया। इंफोसिस का मार्केट कैप 3,364.34 करोड़ र. बढ़कर 3,14,821.60 करोड़ हो गया है।
राणा की बेटियाें पर डीएचएफएल से 600 करोड़ रु. लेने का आरोप
इसके अलावा 5,000 करोड़ रुपए के लेनदेन की भी हो रही पड़ताल
एजेंसी | मुंबई/नई दिल्ली
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डीएचएफएल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रविवार सुबह यस बैंक के फाउंडर राणा कपूर को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले ईडी अधिकारियों ने राणा कपूर से 20 घंटे से ज्यादा पूछताछ की। यस बैंक मामले में कपूर की गिरफ्तारी के बाद उनकी बेटियां राखी कपूर टंडन, रोशनी कपूर और राधा कपूर भी फंसती नजर आ रही हैं। ईडी अधिकारियों ने इन तीनों के घर छापेमारी कर उनसे भी पूछताछ की है।
ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि राणा और उनकी दो बेटियों की डमी कंपनी ‘अर्बन वेंचर्स’ को घोटालेबाजों से 600 करोड़ मिले थे या नहीं। सूत्रों के मुताबिक यस बैंक ने डीएचएफएल को 3,700 करोड़ का लोन दिया था। जब डीएचएफएल के कर्ज की राशि लौटाने में विफल रही, तब कंपनी की ओर से ड्यूट अर्बन वेंचर्स प्रा.लि. को 600 करोड़ रुपए दिए गए। बैंक ने इस कर्ज को एनपीए में डाल दिया। अर्बन वेंचर्स में राणा कपूर की बेटियां राधा और रोशनी डायरेक्टर हैं।
विदेशी निवेशकों ने 5 दिनों में बाजार से 13,157 करोड़ रुपए निकाले
एजेंसी | नई दिल्ली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च के शुरुआती पांच कारोबारी दिनों में भारतीय बाजार से 13,157.12 करोड़ रुपए निकाल लिए। छह माह से जारी लिवाली के रुख से अलग इस दौरान एफपीआई ने शुद्ध बिकवाली की है।
कोरोना वायरस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार दो से छह मार्च के बीच एफपीआई ने शेयर बाजारों से 8,997.46 करोड़ और बांड बाजार से 4,159.66 करोड़ रुपए की निकासी की है। इस तरह उन्होंने पूंजी बाजार से 13,157.12 करोड़ रुपए निकाले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना वायरस के फैलने को लेकर बढ़ती चिंता और इस वजह से वैश्विक बाजारों में हो रही उठापटक भारतीय बाजारों को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। बाजार में नरमी बढ़ने के डर से एफपीआई ने घरेलू शेयर और बांड दोनों बाजार से लगातार निकासी की है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने नीतिगत दरों में 0.5 प्रतिशत की आकस्मिक कटौती की है। यह अमेरिकी सरकार की नरमी की आशंका को दिखाता है। मौजूदा समय में इस स्थिति को यस बैंक के संकट से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए।
न्यूनतम दर की शर्त 15% से ज्यादा हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए हो
सरकारी टेलीकॉम कंपनियों ने डेटा रेट और कॉल रेट से मांगी छूट
एजेंसी | नई दिल्ली
रिलायंस जियो व वोडाफाेन-आइडिया के उलट सरकारी टेलीकॉम कंपनियों ने कॉल रेट और डेटा की न्यूनतम दर तय करने का विरोध किया है। बीएसएनएल और एमटीएनएल ने ट्राई से मांग की है न्यूनतम दर का प्रावधान 15% से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी वाली कंपनियों पर ही लागू होना चाहिए।
दोनों कंपनियां का मानना है कि जिन कंपनियों का ग्राहकों का आधार न के बराबर है या बहुत कम है, उन्हें न्यूनतम दरों से छूट दी जानी चाहिए। इससे बाजार में कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में मदद मिलेगी। वोडाफोन-आइडिया डेटा की न्यूनतम कीमत प्रति जीबी 35 रुपए और आउटगोइंग काल पर 6 पैसे प्रति मिनट चाहती है। जबकि रिलायंस जियो ट्राई से प्रति जीबी डेटा के न्यूनतम कीमत को 15 रुपए तय करने की अपील की है। साथ ही 6 से 9 महीनों में इस न्यूनतम कीमत को बढ़ाकर 20 रुपए प्रति जीबी करने का भी सुझाव दिया है। ट्राई को दिए अपने सुझाव में सरकारी कंपनियों ने कहा कि दूरसंचार उद्योग को क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसका कारण पूंजी से भरपूर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं का अप्रत्याशित रूप से बाजार में आना है। ये कंपनियां मुक्त और काफी कम दर पर सेवाओं की पेशकश कर रही हैं। इसके कारण कई कंपनियों को अपना कारोबार समेटना पड़ा है।
68 फीसदी महिलाओं की वित्तीय निर्णय में भागीदारी
भारतीय महिलाओं की वित्तीय निर्णय लेने में हिस्सेदारी बढ़ रही है। एक सर्वे के अनुसार 68 प्रतिशत महिलाएं या तो अपने पैसे का प्रबंधन खुद कर रही हैं या अपने परिवारों के वित्तीय निर्णय में बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। ऑनलाइन वित्त सेवाएं उपलब्ध कराने वाली स्क्रिपबॉक्स के सर्वे के अनुसार केवल दस प्रतिशत महिलाएं ही वित्तीय निर्णय लेने की जिम्मेदारी अपने परिवार के किसी पुरुष सदस्य को सौंप देती हैं। सर्वे में शामिल अधिकतर महिलाएं मासिक बचत के नियम को मानती हैं।
बोर्ड में महिला भागीदारी में भारत का 12 वां स्थान
एजेंसी | नई दिल्ली
कंपनियों के बोर्ड में महिला सदस्यों की उपस्थिति में भारत का 12वां स्थान है। वैश्विक भर्ती प्लेटफार्म मायहायरिंग क्लब डॉट कॉम और सरकारी नौकरी डॉट इंफो द्वारा ‘बोर्ड में महिलाएं 2020’ शीर्षक से किए गए एक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है।
सर्वे भारत सहित 36 देशों की 7,824 सूचीबद्ध कंपनियों के बीच ऑनलाइन किया गया। भारत में 628 सूचीबद्ध कंपनियों के नियोक्ताओं ने अध्ययन में भाग लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां अब अधिक संख्या में लैंगिक समानता के महत्व को समझ रही हैं।
नकली मोटर इंश्योरेंस लेने से बचें, भुगतान सुरक्षित माध्यम से करें
सड़क दुर्घटनाओं के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए सभी वाहनों के लिए कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का महत्व बढ़ा है। यह बात कॉमर्शियल वाहनों के लिए भी लागू होती है जहां वाहन मालिकों को गाड़ी के साथ-साथ उसके ड्राइवर और थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी कराना होता है। इसी आवश्यकता के चलते फर्जी इंश्योरेंस के मामले बढ़े हैं जो बीमा उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। बीमा लेनदेन की प्रक्रिया में थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर पर भरोसा भी शामिल होता है। इसके चलते बीमा कंपनियों के साथ-साथ उनकी वैल्यू चेन के लिए भी धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाती है। लोगों में बीमा को लेकर जागरूकता कम है। कई लोग इसे डेड इन्वेस्टमेंट मानकर चलते हैं। इन सब कारणों से भी वे आसानी से धोखाधड़ी करने वालों का निशाना बन जाते हैं।
हाल में अमल में आए नियमों के तहत दोपहिया वाहन मालिकों को ऑन डैमेज पॉलिसी के साथ-साथ पांच साल के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी खरीदना होता है। जबकि कार मालिकों को ऑन डैमेज पॉलिसी के साथ-साथ तीन साल के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी लेना होता है। इसकी वजह से वाहन की श्रेणी के हिसाब से बीमा प्रीमियम की स्लैब में भी इजाफा हुआ है। इससे उन लोगों के लिए धोखाधड़ी करने के मौके बढ़े हैं जो सीधे-सादे ग्राहकों को असली बीमा पॉलिसी खरीदने में होने वाले खर्च की तुलना में कम प्रीमियम पर फर्जी बीमा पॉलिसी बेच देते हैं।
छह तरीकों को अपनाकर फर्जी मोटर इंश्योरेंस खरीदने से खुद को बचा सकते हैं..
1) बीमा कंपनी से संपर्क करें: बीमा पॉलिसी असली है या नही, इसकी पुष्टि के लिए सीधे बीमा कंपनी से संपर्क करना चाहिए। ऐसा बीमा कंपनी को ईमेल भेजकर, कस्टमर केयर नंबर पर कॉल कर या बीमा कंपनी की वेबसाइट पर पॉलिसी वेरिफाई कर किया जा सकता है।
2) प्रीमियम भुगतान की रसीद मांगे: सभी चुकाए गए प्रीमियम की वैलिड रिसीट मांगें।
3) क्यूआर कोड : अब बीमा पॉलिसी क्यूआर कोड के साथ आने लगी हैं। इन क्यूआर कोड से बीमा पॉलिसी असली है या नहीं, इसकी पुष्टि की जा सकती है। यह काम क्यूआर कोड को मोबाइल फोन में क्यूआर रीडिंग एप के जरिए स्केन कर आसानी से किया जा सकता है।
4) बीमा पॉलिसी को पढ़ें : पॉलिसी लेने के बाद इसे पढ़ने के लिए समय निकालें और इसमें दिए गए नियम शर्तों को समझें। इसके बीमा कवर में क्या-क्या शामिल है यह भी जानना जरूरी है।
5) सीधे बीमा कंपनी पॉलिसी खरीदें : यदि आप सीधे बीमा कंपनी या उसके द्वारा अधिकृत इंटरमीडियरी से पॉलिसी खरीदते हैं तो जाली इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से बच सकते हैं।
6) सुरक्षित माध्यम से भुगतान करें : इंश्योरेंस खरीदने के लिए प्रीमियम का भुगतान ऑनलाइन या चेक से या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करें। इससे प्रीमियम इंश्योरेंस कंपनी के पास जमा होना सुनिश्चित कर सकते हैं।
कच्चे माल के लिए चीन पर 50 से 100% निर्भरता, सबसे ज्यादा करीब 378 तरह के मॉलिक्यूल्स का चीन से आयात
भारत में चीन सहित विश्व के अलग-अलग देशों से दवा बनाने के लिए करीब 700 तरह की मॉलिक्यूल्स आयात होते हैं। सबसे ज्यादा करीब 378 तरह के मॉलिक्यूल्स चीन से ही आयात होते हैं। 58 तरह के मॉलिक्यूल्स ऐसे हैं जिसके लिए 50 से 100 फीसदी चीन पर ही निर्भरता है। इसमें एंटीबॉयोटिक्स, एंटीडायबिटिक, विटामिन, एनालजेसिक, स्टेरॉयड, एंटी-टीबी, एंटी-मलेरिया, हृदय संबंधी बीमारी की दवा, एंटी-पार्किंसन, डायरिया प्रमुख है। पेनिसिलिन-जी का स्टॉक दो माह और पैरासिटामोल बनाने के लिए रॉ मेटेरियल का स्टॉक एक माह का है। हालांकि बनी हुई दवा का स्टॉक तीन से चार माह के लिए बचा है।
5 सड़क प्रोजेक्ट्स की बोली तारीख बढ़ाने की मांग
एजेंसी | नई दिल्ली
संकट में फंसी आईएलएंडएफएस ने पांच सड़क परियोजनाओं के लिए बोली की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की है। इन प्रोजेक्ट्स पर कुल 10,500 करोड़ से अधिक का कर्ज है। जबकि कंपनी को 7,498 करोड़ रुपए की बोलियां मिलीं है। हालांकि बोलियों की वैधता 29 फरवरी को समाप्त हो गई। पांच सड़क प्रोजेक्ट्स में चेन्नई-नासरी सुरंग परियोजना, पुणे शोलापुर सड़क विकास, जोराबाट-शिलांग एक्सप्रेसवे, हजारीबाग रांची एक्सप्रेसवे और झारखंड इंफ्रास्ट्रक्चर इम्प्लीमेंटेशन कंपनी शामिल हैं। प्रवक्ता ने कहा कि हम बोलियों की समय सीमा बढ़ाने को लेकर काम कर रहे हैं।
गारंटीशुदा कर्ज को वापस दिलाने पर फोकस
नए नियम से गारंटीशुदा कर्ज को वापस दिलाने में मदद मिल सकेगी। एक डिबेंचर ट्रस्टी के अधिकारी ने कहा कि सेबी के नए प्रस्ताव से भविष्य में रिलायंस कैपिटल जैसे हालात से बचने और चूक की स्थिति में पैसा वसूलने के लिए संपत्ति की पहचान करने में मदद मिलेगी।
रेंटल ऑफिस स्पेस में 14% तक गिरावट आने की संभावना: जेएलएल
एजेंसी | नई दिल्ली
देश के सात प्रमुख शहरों में 2020 के दौरान रेंटल ऑफिस स्पेस में 14 प्रतिशत तक गिरावट आने की संभावना है। वैश्विक संपत्ति सलाहकार कंपनी जेएलएल के अनुसार इस साल किराए वाला ऑफिस स्पेस 4 करोड़ वर्गफुट क्षेत्रफल रह सकता है। वर्ष 2019 में रेंटल ऑफिस स्पेस की वृद्धि दर 40 प्रतिशत रही। रेंटल ऑफिस स्पेस 4.65 करोड़ वर्गफुट था। वर्ष 2018 में यह मात्र 3.32 करोड़ वर्गफुट था। जेएलएल के मुताबिक नए कार्यालय स्थल की आपूर्ति 2019 में 45 प्रतिशत बढ़कर 5.16 करोड़ वर्गफुट रही जो 2018 में 3.57 करोड़ वर्गफुट थी।
जेएलएल इंडिया देश के सात बड़े संपत्ति बाजार दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता पर नजर रखती है। जेएलएल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कंट्री प्रमुख रमेश नायर ने कहा कि इस साल रेंटल ऑफिस स्पेस में नरमी कुछ ही समय के लिए रहेगी। इसके बाद अलगे साल से भारतीय कार्यालय बाजार में तेजी आने की पूरी संभावना है।
राणा कपूर ने तेजी से चढ़ी सफलता की सीढ़ी
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इंडियाबुल्स के बॉन्ड के 662 करोड़ बकाया
, भीलवाड़ा, सोमवार, 9 मार्च, 2020
डीएचएफएल द्वारा 79 डमी कंपनियां को दिए गए 4,450 करोड़ रु भी जांच के घेरे मेंईडी को इस बात का शक है कि डीएचएफएल से जुड़े 4,450 करोड़ रुपए के कर्ज की राशि उस 13,000 करोड़ रुपए का हिस्सा है जो डीएचएफएल की ओर से 79 डमी कंपनियों को कथित तौर पर दी गई। इन्हीं कंपनियों में अर्बन वेंचर्स भी शामिल है। सूत्रों का कहना है कि राणा कपूर की प|ी बिंदू कपूर और तीनों बेटियों- राखी, रोशनी और राधा के संबंध ऐसी कुछ कंपनियों से हैं, जिन्हें गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर किए गए। नवंबर 2019 में राणा कपूर ने यस बैंक में अपने पूरे शेयर बेच दिए, जबकि वे बार-बार इससे मना करते आ रहे थे।
संजीव द्विवेदी, हेड, इन्वेस्टिगेशन एंड लॉस मिटिगेशन टीम, बजाज आलियांज
सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रिलायंस जियो की, दूसरे नंबर पर भारती एयरटेल, तीसरे पर वोडो-आइडिया
ट्राई के ताजा आंकड़े के अनुसार बीएसएनएल की पूरे देश में मोबाइल ग्राहकों के आधार पर बाजार हिस्सेदारी करीब 10.3 प्रतिशत है। एमटीएनएल दिल्ली और मुंबई में काम करती है और उसकी बाजार हिस्सेदारी 0.29 प्रतिशत है। आंकड़े के अनुसार रिलायंस जियो 32.1 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की बाजार हिस्सेदारी क्रमश: 28.43 प्रतिशत और 28.89 प्रतिशत है।
नई दिल्ली | ब्रिटिश लग्जरी कार निर्माता बेंटले ने अपनी नई कार म्यूलिनर बाकलर ऑनलाइन लॉन्च किया है। कार के अंदर की डिजाइन को 5 हजार साल पहले गिरे पेड़ों की लकड़ियों से बनाया गया है। कंपनी ने इस रुफलेस कार की कीमत 14 करोड़ रुपए रखी है। फॉक्सबैगन की सहायक कंपनी बेंटले इस मॉडल की सिर्फ 12 कारें ही बनाएगी। कंपनी इस मॉडल को जेनेवा मोटर शो में लॉन्च करने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह ऑटो शो रद्द करना पड़ा। बेंटले ने फिर इसे ऑनलाइन प्रदर्शित किया।
दर्जनों मुखौटा कंपनियां जांच के घेरे में
रोबोटिक्स व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सर्विस देती है
पैसे नहीं थे तो पढ़ने के लिए रोज 4 किमी पैदल चलना पड़ा, अब रोबोटिक्स से लेकर ऑटोमेशन सिखा रहीं
बेंटले ने 5 हजार साल पहले गिरे पेड़ों की लकड़ी से बने इंटीरियर डिजाइन वाली कार उतारी, कीमत 14 करोड़
दवाओं का कच्चा माल देश में बनाने के लिए कंपनियों को प्रमोट किया जाएगा
दवा उद्योग में अगले पांच से सात वर्षों में चीन से निर्भरता खत्म करने पर भारत सरकार का जोर
एनबीएफसी के लिए सेबी लाएगा नया नियम
टॉप-10 में से 6 कंपनियों का एमकैप 95,432 करोड़ घटा
पवन कुमार | नई दिल्ली
कोरोनावायरस से भारतीय दवा उद्योग के सामने पैदा हुए संकट से स्थाई तौर पर निपटने के लिए भारत सरकार ने पहल शुरू कर दी है। कच्चे माल के लिए चीन पर से निर्भरता खत्म करने और देश में ड्रग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रु से ज्यादा का प्रावधान करने की योजना तैयार की है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मा विभाग की ओर से कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है,जो इसी माह कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
भारत में एपीआई तैयार करने पर चीन की तुलना में जो कीमतों में अंतर होगा उसे कुछ हद तक सरकार पूरा कर सकती है। संभव है कैबिनेट नोट में यह शर्त रखी जाए कि उन्हीं कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा जो अपनी एपीआई का इस्तेमाल भारत के मरीजों के लिए ही करंे। दवाओं के कच्चे माल को लेकर भारत अगले पांच से सात वर्षों में चीन से अपनी निर्भरता खत्म करना चाहता है।
राणा कपूर ने बैंकिंग की दुनिया में बहुत तेजी से तरक्की की। यस बैंक को टॉप-5 लेंडर्स की श्रेणी में ला खड़ा किया। अपनी कॉर्पोरेट ग्रोथ के लिए उन्होंने उन बिजनेसमैन को लोन बांटना शुरू किया, जिन्हें दूसरे बैंकों ने बुरे प्रदर्शन के कारण लोन देने से मना कर दिया था। इसी कड़ी में बैंक ने डीएचएफफल, अनिल अंबानी, वोडाफोन, कैफे कॉफी डे जैसी कंपनियों को लोन दिया। बाद में ज्यादातर लोन एनपीए हो गया। रिजर्व बैंक को जब शक हुआ तो 2015 में असेट क्वालिटी रिव्यू शुरू किया।
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के यस बैंक के पास बॉन्ड के रूप में 662 करोड़ रुपए बकाया हैं। कंपनी ने बैंक का कोई सावधि कर्ज नहीं ले रखा है। इंडियाबुल्स एक रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक यस बैंक पर एडिशनल टियर-1 बॉन्ड के रूप में 662 करोड़ रुपए बकाया हैं। इंडियाबुल्स ने बताया कि 20,000 करोड़ रुपए से अधिक के ट्रेजरी मैनेजमेंट के तहत उसने 2017 में यस बैंक के एटी-1 बांड में यह निवेश किया था। यस बैंक का कोई कर्ज बकाया नहीं है।
यस बैंक }डीएचएफएल का 3,700 करोड़ का लोन एनपीए
भास्कर ब्रेकिंग
काजल की कंपनी बच्चों को रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, बॉयोमेडिकल इंस्ट्रुमेंट समेत विभिन्न सॉफ्टवेयर आधारित सर्विसेज की ट्रेनिंग देती है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सर्विस भी मुहैया कराती है। इस समय यमन, सिंगापुर, अमेरिका तक कंपनी के क्लाइंट्स हैं। मुंबई में राष्ट्रीय रोबोटिक्स प्रतियोगिता में छात्रों को मात देकर संस्थान की छात्राएं जीत गईं। अब लड़कियां काजल के साथ, अमेरिका में भारत के प्रतिनिधित्व की तैयारी में जुटी हैं। काजल को बेस्ट आंत्रप्रेन्योर अवॉर्ड, यूएसए के टाइम्स रिसर्च अवार्ड और स्टार्टअप इंडिया के एग्रीकल्चर इनोवेशन अवार्ड मिल चुके हैं।
भास्कर न्यूज | नई दिल्ली
महाराष्ट्र का छोटा-सा शहर अकोला। इसी शहर में जन्मीं काजल प्रकाश राजवैद्य की कंपनी अब देश के नामी स्कूल-कॉलेजों व संस्थाओं को आधुनिक तकनीक में दक्ष कर रही हैं। छात्रों को खेल-खेल में रोबोटिक्स, ऑटोमेशन जैसी टेक्नोलॉजी सिखा रही है।
महज 21 साल की उम्र में यानी वर्ष 2015 में काजल ने ‘काजल इनोवेशन एंड टेक्निकल सॉल्यूशन किट्स’ कंपनी स्थापित कर दी। यह भी तब जबकि उनके पास बिजनेस का अनुभव नहीं था। पिता एक पान ठेला चलाते थे। आमदनी ज्यादा होती नहीं थी इसलिए उन्होंने एक निजी बैंक के रैकरिंग एजेंट की नौकरी कर ली। काजल को चौथी क्लास तक जिला परिषद के स्कूल में पढ़ाया मगर घर की माली हालत ठीक न होने पर चार किलो मीटर दूर स्थित मनुताई कन्या शाला में दाखिल करा दिया गया। यहां पढ़ने वाली लड़कियों से फीस नहीं ली जाती है। यहां काजल को रोज पैदल ही जाना पड़ता था।
काजल की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट उस वक्त आया, जब उन्होंने दूरदर्शन पर रोबोट से जुड़ा एक शो देखा। उन्होंने संकल्प लिया कि अब वह भी एक दिन रोबोट बनाएंगी। कॉलेज की पढ़ाई के वक्त पिता की नौकरी छूट गई। घर-गृहस्थी और भी खस्ताहाल हो चली। फिर लोन लेकर जैसे-तैसे इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया। यहां पर काजल ने नई टेक्नोलॉजी के लिए एक सिलेबस तैयार कर पुणे के कॉलेजों में जाकर छात्रों के साथ उसे शेयर किया। यहां असफलता हाथ लगी पर हार नहीं मानीं। अकोला लौटकर किसी तरह छिटपुट कामों से अपना खर्च निकालने लगीं। इसके साथ ही कोचिंग आदि से बचे समय में इंटरनेट के जरिए रोबोटिक्स सीखती रहीं।
कुछ समय बाद वह प्राइमरी स्कूलों में जाकर पांचवीं कक्षा के बच्चों की रोबोटिक्स वर्कशॉप लेने लगीं। यहीं से काजल ने कंपनी की शुरूआत कर दी। अब उनकी कंपनी महाराष्ट्र के सबसे बड़े तकनीकी-व्यावसायिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर में से एक है। देश के हर बीस में से एक टेक्नो-कमर्शियल पेशेवर को उनकी कंपनी ने ट्रेनिंग दी है।
महाराष्ट्र के अकोला में काजल राजवैद्य के पिता पान की दुकान चलाते थे
दवा बनाने के लिए रॉ मेटेरियल एपीआई (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट्स) भारत में तैयार किया जा सके, इसके लिए इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रमोट किया जाएगा। इंडस्ट्री लगाने वाली कंपनियों को केन्द्र सरकार की ओर से कुछ आर्थिक रियायत दी जाएगी ताकि दवा इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सके। दरअसल चीन में तैयार होने वाली एपीआई की कीमत कम है, लिहाजा उससे तैयार दवा भी सस्ती होती है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि देश में ही एपीआई तैयार करने का पूरा ढ़ांचा खड़ा किया जाए, जिसके दूरगामी परिणाम हो।
कोरोनावायरस: रसायन और उर्वरक मंत्रालय तैयार कर रहा कैबिनेट नोट, इस माह बैठक में पेश होगा
एजेंसी |मुंबई
कई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा कंपनी के निवेशकों का कर्ज वापस न करने के चलते सेबी इस मामले में नया नियम लाने जा रहा है। सुरक्षित ऋण पत्रों पर डिफाल्ट के चलते सेबी वर्तमान नियमों की समीक्षा कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों के हितों की सुरक्षा करना और नियामक प्रणाली में उनके भरोसे को बनाए रखना है।
सेबी ने एक नए परामर्श पत्र में कॉरपोरेट बांड और डिबेंचर ट्रस्टीज (डीटी) के लिए नियामकीय व्यस्था की समीक्षा का प्रस्ताव रखा है। कंपनी के बांड और ऋण पत्र का न्यासी कंपनी द्वारा नियुक्त व्यक्ति होता है और उनकी जिम्मेदारी निवेशकों के हित की रक्षा करना होता है। एनबीएफसी को ऋण पत्र के संदर्भ में किसी सम्पत्ति विशेष को चिन्हित करना होगा, जिससे ऋण-पत्र का धन वसूला जा सकता हो।