25 काे होगी धनतेरस, 26 काे त्याेहार नहीं, 27 काे सुबह रूप चाैदस व रात काे जलेंगे दिवाली के दीए

Bhilwara News - भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा ग्रह-नक्षत्र की चाल से इस बार दीपावली के पांच पर्वाें पर विचित्र स्थिति बन रही है।...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:36 AM IST
Bhilwara News - rajasthan news 25 will be dhanteras 26 will not be a festival 27 will be lit as morning and the night will be lit by diwali
भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

ग्रह-नक्षत्र की चाल से इस बार दीपावली के पांच पर्वाें पर विचित्र स्थिति बन रही है। ज्याेतिषियाें का मानना है कि 25 अक्टूबर काे द्वादशी सुबह अाैर शाम काे धनतेरस मनेगी। 26 अक्टूबर काे काेई त्याेहार या पर्व नहीं रहेगा। 27 अक्टूबर सुबह रूप चाैदस अाैर प्रदाेष काल में अमावस्या हाेने से स्थिर लग्न में दीपावली मनाएंगे।

पंडित अशाेक शर्मा के अनुसार इस साल दीपावली के दिनाें में तिथि गणना की स्थिति अजीब बन रही है। कार्तिक कृष्ण द्वादशी 25 अक्टूबर काे शाम सात बजे तक है। इसके बाद धनतेरस मना सकेंगे। अगले दिन 26 अक्टूबर काे त्रयाेदशी तिथि दाेपहर 3:46 बजे तक ही रहेगी। 27 अक्टूबर सूर्याेदय काल में चतुर्दशी तिथि है, जाे दाेपहर 12:22 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या शुरू हाेगी जाे 28 अक्टूबर सुबह 9 बजे तक रहेगी। 28 अक्टूबर काे सूर्याेदय कालीन साेमवती अमावस्या तिथि में सुबह 9 बजकर 8 मिनट बाद गाेवर्धन पूजा व अन्नकूट महाेत्सव हाेंगे। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का क्षय हैं, इसलिए 28 अक्टूबर काे गाेवर्धन पूजा व 29 अक्टूबर मंगलवार काे भाई दूज पर्व मनेगा। नगर व्यास राजेंद्र कुमार ने बताया कि लक्षमी पूजन धन त्रयाेदशी 25 अक्टूबर से शुरू हाे जाएगा, जाे विभिन्न अायाम से पूर्ण हाेकर साेमवती अमावस्या 28 अक्टूबर तक चलेगा। इस अवधि में पंडिताें द्वारा व्यापार वृद्धि व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गाेपाल सहस्त्रनाम, श्रीशुक्त श्रीयंत्र साधना संपन्न कराई जाएगी।

दीपावली मनाने में उदय तिथि नहीं रखती महत्व: नगर व्यास

नगर व्यास राजेंद्रकुमार के अनुसार पर्व कालीन तिथि गणना के अाधार पर पर्व मनाना ही शास्त्रज्ञान है। उसी के अनुरूप दीपावली मनाना श्रेष्ठ रहेगा। प्रदाेष नहीं हाेने से उदयकालीन त्रयाेदशी मान्य नहीं है। 25 काे सूर्याेदय कालीन द्वादशी में धनतेरस मनेगी, लेकिन 26 अक्टूबर काे उदयतिथि त्रयाेदशी है, किंतु प्रदाेष नहीं हाेने से शनिवार काे पंचांगकाराें ने काेई पर्व निर्धारित नहीं किया है। अमावस्या की भी विचित्र कहानी बन रही है। 27 अक्टूबर सुबह सूर्याेदय काल में ताे रूप चतुर्दशी का पर्व मनेगा, लेकिन दाेपहर 12 बजकर 22 मिनट के बाद दीपावली पर्व शुरू हाेगा। क्याेंकि प्रदाेषकाल सूर्यास्त के बाद 144 मिनट का रहेगा। दीपावली पूजन भी प्रदाेष काल में करना शुभ हाेता है। 28 अक्टूबर काे उदयकालीन अमावस्या 9 बजकर 8 मिनट हाेने से इसके बाद गाेवर्धन पूजा व अन्नकूट महाेत्सव मनेगा। पड़वा का क्षय हाेने से भाई दूज 29 अक्टूबर मंगलवार काे मनेगा।

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