नगर परिषद में भाजपा के 38 पार्षद फिर भी पक्ष में न विपक्ष में, सभापति व विपक्ष की नेता दोनों कांग्रेसी

Bhilwara News - नगर परिषद सभापति ललिता समदानी के कांग्रेस में शामिल हाेने के बाद अब अजीब राजनीतिक स्थिति बन गई है। परिषद बाेर्ड...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:41 AM IST
Bhilwara News - rajasthan news 38 councilors of bjp in city council yet not in favor president and leader of opposition both congressmen
नगर परिषद सभापति ललिता समदानी के कांग्रेस में शामिल हाेने के बाद अब अजीब राजनीतिक स्थिति बन गई है। परिषद बाेर्ड में भाजपा के ज्यादा पार्षद हाेने के बावजूद अब यहां सता अाैर विपक्ष दाेनाें में कांग्रेस हाे गई है। नगर परिषद बाेर्ड में कांग्रेस के केवल नौ पार्षद है। लेकिन सभापति ललिता समदानी के राजनीतिक दृष्टि से भाजपा से कांग्रेस में चले जाने के बाद कांग्रेस विपक्ष के साथ-साथ अब सत्ता पक्ष में भी आ गई है। नेता प्रतिपक्ष अभी कांग्रेसी पार्षद समदू देवी हैं। भाजपा के 38 पार्षद होने के बावजूद फिलहाल वह पक्ष और विपक्ष किसी भी पक्ष में नहीं है। फिलहाल नगर परिषद में पार्षदों की गणित को देखते हुए सभापति ललिता समदानी सेफ जोन में हंै, जब तक काेर्ट की तरफ से काेई फैसला नहीं अा जाता। जानकाराें के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है लेकिन भाजपा के पास उतने पार्षद नहीं हैं। प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने से अब निलंबित करने जैसी कोई कार्रवाई भी नहीं हाेगी।

अजीब स्थिति: अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं ला सकती भाजपा, क्राॅस वाेटिंग का डर

नगर पालिका अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नियम-2017 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लिखित में कलेक्टर को देना होता है। नगर परिषद बोर्ड में निर्वाचित 55 पार्षद हैं। अविश्वास प्रस्ताव के लिए कलेक्टर के सामने तीन चौथाई (42 पार्षद) को पेश करवाना होगा। कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव की शिकायत देने के अधिकतम 30 दिन में कलेक्टर की ओर से बोर्ड के सभी पार्षदों को बुलाकर उनके सामने अविश्वास प्रस्ताव पढ़ा जाता है। इसके बाद वोटिंग होती है। अविश्वास प्रस्ताव पास करने के लिए भी तीन चौथाई (42 पार्षदों) के वोट मिलना जरूरी है जबकि अविश्वास प्रस्ताव गिराने के लिए केवल एक चौथाई (14 पार्षद) चाहिए। यानी सभापति ललिता समदानी को हटाने के लिए 42 पार्षद चाहिए जबकि उनको बने रहने के लिए केवल 14 पार्षद ही चाहिए। मौजूदा नगर परिषद बोर्ड में कांग्रेस के 9 और 8 निर्दलीय है। जबकि भाजपा के 38 पार्षद है। भाजपा के पास ज्यादा पार्षद हाेने के बावजूद उन्हें डर है कि कई पार्षद क्राॅस वाेटिंग कर सकते हैं। इसलिए फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव के बारे में काेई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष बदलेगा या नहीं स्थिति स्पष्ट नहीं ... नगर परिषद में अब नए समीकरण के अनुसार नेता प्रतिपक्ष बदला जाएगा या नहीं, फिलहाल यह स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि नेता प्रतिपक्ष बदला जाता है ताे भाजपा के लिए यह अजीबाे-गरीब स्थिति हाे जाएगी कि बाेर्ड में सबसे ज्यादा 38 पार्षद हाेने के बावजूद उसे विपक्ष में बैठना पड़ेगा।

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