आरोप-विदेशी निवेश की मंजूरी के नाम पर झूठे बिलों से घूस ली...

Bhilwara News - आईएनएक्स मीडिया केस में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी रद्द किए जाने के बाद पूर्व वित्त व गृह...

Bhaskar News Network

Aug 25, 2019, 11:35 AM IST
Ropa News - rajasthan news allegations bribed by false bills in the name of approval of foreign investment
आईएनएक्स मीडिया केस में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी रद्द किए जाने के बाद पूर्व वित्त व गृह मंत्री पी.चिदंबरम 21 अगस्त से सीबीआई की हिरासत में हैं। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस ने इसे राजनीति प्रेरित और बदले की कार्रवाई करार दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई भी जारी है। असल में पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने 2007 में आईएनएक्स मीडिया की नींव ही घोटाले के लिए रखी थी। क्योंकि, कंपनी को सिर्फ 4.62 करोड़ रुपए के ही विदेशी निवेश की मंजूरी मिली और उसने मंगा लिए 305.36 करोड़ रुपए यानी स्वीकृत राशि से तीन सौ करोड़ अधिक। बिना विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी के इतनी बड़ी राशि आने पर वित्त मंत्रालय की फायनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट का माथा ठनका और मामले की जांच शुरू हो गई। लेकिन, इसी बीच इस निवेश के लिए एफआईपीबी की मंजूरी लेने की कोशिशें भी मुखर्जी दंपती ने शुरू कर दी और 1 नवंबर 2008 को उन्हें इसकी अनुमति भी मिल गई। क्योंकि यह अनुमति निवेश आने के बाद हुई थी इसलिए इसकी जांच भी जारी रही और 2010 में फेमा के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा भी दर्ज हो गया।

इसके बावजूद करीब सात साल तक यह मामला फाइलों में ही चलता रहा, लेकिन 2017 में एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को कुछ ऐसे कागजात मिले, जिनसे यह पता चला कि आईएनएक्स मीडिया ने चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनी को काफी पैसा ट्रांसफर किया है। यह पैसा उसी अवधि में ट्रांसफर किया गया, जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद हुई जांच में एक-एक कर नई जानकारियां सामने आने लगीं। हाल ही में इंद्राणी मुखर्जी के अप्रूवर (वादा माफ गवाह) बनने के बाद तो सीबीअाई के हाथ मजबूत हो गए। अब सीबीआई ने इस केस में मनी ट्रेल की जांच के लिए भी पांच देशों से संपर्क किया है। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि 5 देशों को लेटर ऑफ रोगेटरी भेजे गए हैं। इनमें ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, बरमूडा, मॉरीशस और सिंगापुर शामिल हैं।

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सूत्रधार कंपनी : एक ऐसी कंपनी, जो 2007 मेें बनी। 2009 में इसके संस्थापक पीटर और इंद्राणी ने खुद को कंपनी के प्रबंधन से अलग कर लिया। अगस्त 2010 में कंपनी ने अपना नाम बदल कर 9एक्स मीडिया कर लिया और इसे जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज को 160 करोड़ रुपए में बेच दिया।

अहम किरदार

पीटर मुखर्जी

ब्रिटेन में पैदा हुए टेलीविजन इंडस्ट्री के एक रिटायर्ड अधिकारी। 1997 से 2007 तक स्टार इंडिया के सीईओ रहे। 2007 में आईएनएक्स मीडिया के चेयरमैन और मुख्य रणनीतिक ऑफिसर बने। 2009 में कंपनी छोड़ दी। नवंबर 2015 में शीना बोरा की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार, जेल में हैं।

क्यों की गड़बड़ी

आईएनएक्स को अनुमति मिली सिर्फ 4.62 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश की। लेकिन, मॉरीशस की तीन कंपनियों डनअर्न इन्वेस्टमेंट, एनएसआर-पीई और न्यू वरनॉन प्रा. लिमिटेड ने आईएनएक्स में 305 करोड़ रुपए का निवेश किया। आईएनएक्स मीडिया ने इसमें से 26 फीसदी राशि को एफआईपीबी की अनुमति के बिना ही आईएनएक्स न्यूज में लगा दिया। इस राशि को एफआईपीबी से मंजूरी दिलाने के लिए ही यह सारी गड़बड़ी करनी पड़ी।

कब - कब

क्या हुआ

इंद्राणी मुखर्जी

पूर्व एचआर सलाहकार व मीडिया अधिकारी। पीटर मुखर्जी की प|ी। 2007 में पीटर के साथ आईएनएक्स मीडिया शुरू किया और उसकी सीईओ बनीं। अगस्त 2015 में बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया और तब से जेल में हैं।

कब आया कार्ति का नाम

मुकदमा दर्ज होने के करीब सात साल बाद एयरसेल-मैक्सिस डील में जब प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी कार्ति से जुड़ी कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) की जांच कर रहे थे तो उन्हें वहां आइएनएक्स से जुड़े कुछ कागजात मिले। इनमें संकेत थे कि जिस दौरान आईएनएक्स को एफआईपीबी की अनुमति दी गई थी, उसी अवधि में उसने कार्ति से संबंधित कंपनी को पेमेंट की थी।

2010 आईडी ने आईएनएक्स के खिलाफ फेमा उल्लंघन का मामला दर्ज किया।

2017

15 मई - सीबीआई ने एफआईपीबी की अनुमति में गड़बड़ी का मामला दर्ज किया।

16 जून - गृह मंत्रालय ने कार्ति के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया।

10 अगस्त- मद्रास हाईकोर्ट ने इस लुकआउट सर्कुलर पर स्टे दिया।

14 अगस्त- सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।

16 फरवरी- कार्ति के सीए एस.भास्कररमन को गिरफ्तार किया गया।

28 फरवरी- सीबीआई ने कार्ति को चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया।

23 मार्च - कार्ति को जमानत मिली।

11 अक्टूबर- ईडी ने कार्ति की 54 करोड़ की संपत्तियों को जब्त किया।

2019

11 जुलाई - इंद्राणी मुखर्जी इस मामले में वादा माफ गवाह बन गई।

20 अगस्त - दिल्ली हाईकोर्ट ने पी. चिदंबरम की जमानत अर्जी खारिज की।

21 अगस्त - सीबीआई ने चिदंबरम को गिरफ्तार किया।

पी. चिदंबरम

कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य और पूर्व वित्त व गृहमंत्री। वह यूपीए सरकार में मई 2004 से नवंबर 2008 तक वित्तमंत्री रहे। नवंबर 2008 से जुलाई 2012 तक गृहमंत्री रहे और फिर जुलाई 2012 से मई 2014 तक वित्तमंत्री रहे। वह राजीव गांधी की सरकार में भी उपमंत्री रहे।

क्या हैं इस मामले में आरोप

इंद्राणी और उनके पति पीटर मुखर्जी पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम के साथ मिलकर एफआईपीबी की अनुमति हासिल करने के लिए आपराधिक साजिश रची। कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने फरवरी, 2018 में गिरफ्तार किया। वह बाद में जमानत पर रिहा हुए। ईडी भी इस मामले में कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पी. चिदंबरम से भी ईडी ने दिसंबर 2018 व जनवरी 2019 में पूछताछ की थी।

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इलस्ट्रेशन- सुरोजीत देबनाथ

कार्ति चिदंबरम

पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति शिवगंगा से सांसद हैं। बड़े व्यवसायी हैं। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में गुप्त भागीदारी के आरोपों की जांच चल रही हैं। कार्ति आरोपांे को गलत बताते रहे हैं। फरवरी 2018 में सीबीआई कार्ति को आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार भी कर चुकी है। वह अभी जमानत पर हैं।

कैसे आया टर्निंग प्वाइंट

जेल में बंद इंद्राणी ने मार्च 2018 में एक बयान में सीबीआई के समक्ष कहा कि आईएनएक्स मीडिया के पक्ष में एफआईपीबी की स्वीकृति दिलाने के लिए उनके और कार्ति के बीच 10 लाख डॉलर (करीब सात करोड़ रुपये) की डील हुई थी। जुलाई, 2019 में इंद्राणी ने कोर्ट में अर्जी लगाकर माफी का आग्रह किया और कहा कि इसके बदले में वह इस मामले का पूरा सच उजागर करने को तैयार है। इस पर कोर्ट ने सहमति दे दी। बस यहीं से इस मामले में नया मोड़ आ गया।

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