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अंकित ने 25 फीट ऊंचे फिसलन भरे मलखंभ से लूटा प्रसाद साबित किया बाधाअाें में भी लगातार प्रयास से सफलता तय

Bhilwara News - भीलवाड़ा | जन्माष्टमी के अगले दिन रविवार शाम दूदाधारी गाेपाल मंदिर में नंद महोत्सव मनाया। बधावा गान, मटकी फाेड़ के...

Aug 26, 2019, 12:40 PM IST
भीलवाड़ा | जन्माष्टमी के अगले दिन रविवार शाम दूदाधारी गाेपाल मंदिर में नंद महोत्सव मनाया। बधावा गान, मटकी फाेड़ के बाद प्रमुख अाकर्षण मलखंभ का था। सांगानेरी गेट स्थित मंदिर परिसर में शाम 4 बजे बधाई गान शुरू हुअा। ग्वाल-बाल का रूप धरे भक्त नाचने लगे। फल-टाॅफियां लुटाई गईं। ग्वाल-बालों ने पिरामिड बनाकर करीब 15 फीट ऊंचाई पर बंधी माखन मटकी फोड़ी। इसके बाद पुजारी कल्याण शर्मा के सान्निध्य में कोट के बालाजी मंदिर के मैदान में मलखंभ खेल शुरू हुअा। करीब 25 फीट ऊंचा लकड़ी का खंभा रोपा गया था। इसे फिसलन वाला बनाने के लिए तेल व मुल्तानी मिट्टी का लेप किया गया। कैलाशचंद्र शर्मा, नंदकिशाेर, धर्मनारायण, भुवनेशकुमार, मनाेज, विकास, सत्यनारायण, गाेपाल आदि ग्वाल-बालाें ने पूर्व महंतों की चरण पादुकाओं व मलखंभ की पूजा की। इसके साथ शुरू हुअा मलखंभ का वह खेल जाे शरीर काे चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अखाड़ाें में खेला जाता रहा है।




45 साल से जारी है यह खेल... दूदाधारी गोपाल मंदिर में 45 साल पहले कृष्ण जन्म पर बधाई गान, मटकी फाेड़ व मलखंभ की शुरुअात ब्रज से अाए महंत दीनबंधु शरण महाराज ने 1974 में की। ऐसा अायाेजन भीलवाड़ा व सलेमाबाद स्थित निंबार्क पीठ में हर साल हाेता है। इसमें ग्वाल-बाल करीब दो घंटे तक 25 फीट ऊंचे मलखंभ पर चढ़कर प्रसाद लूटते हैं। अखाड़ाें में कुश्ती की तरह ही यह दमखम वाला खेल है।

लक्ष्य तक पहुंचे अंकित

इन बाधाओं को हराया



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