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अायुक्त ने अादेश में लिखा- पार्षद विभागों से फाइलें लेकर घूमते हैं, गाेपनीयता नहीं रहती...यह गलत है

एक वर्ष पहले
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अायुक्त बाेले-गड़बड़ी की संभावना... आयुक्त मीणा के अनुसार कई बार देखा गया कि पार्षद, जनप्रतिनिधि, ठेकेदार या अन्य व्यक्ति फाइलें एक से दूसरे सेक्शन में ले जाते हैं। इससे फाइलाें में गड़बड़ी की आशंका रहती है। फाइल में काेई भी अपने हिसाब से बदलाव कर सकता है। इसलिए यह अादेश जारी किया।

नगर परिषद में नए आदेश से नया विवाद

नगर परिषद में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब एक विवाद नगर परिषद अायुक्त नारायणलाल मीणा के उस अादेश काे लेकर शुरू हुअा है जिसमें उन्हाेंने पार्षद, जनप्रतिनिधियाें पर सेक्शन की फाइलें ले जाने की बात कही है। फाइलें ले जाने वालाें काे नहीं राेकने पर अायुक्त ने कर्मचारी-अधिकारियाें पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

अायुक्त ने अादेश में उन्हाेंने ठेकेदार व अन्य लाेगाें का भी जिक्र किया है लेकिन पहली बार इनके साथ-साथ पार्षदाें व जनप्रतिनिधियाें का नाम भी जाेड़ा है। अादेश में लिखा गया कि परिषद की पत्रावलिया पार्षद, जनप्रतिनिधि, ठेकेदार अाैर अन्य लाेग अाॅफिस से अपने साथ लेकर अधिकारियाें अाैर यहां तक की अायुक्त काे भी साइन के लिए देते हैं। यह सही नहीं है अाैर इससे परिषद की गाेपनीयता भंग हाे रही है। इसलिए सभी अनुभाग प्रभारी, अधिकारी व कर्मचारियाें काे अादेश दिए जाते हैं कि एक से दूसरे सेक्शन में फाइल भेजनी हाे या अायुक्त काे प्रस्तुत करनी है ताे खुद या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के माध्यम स प्रस्तुत करें। अादेश की अवहेलना मिलने पर दाेषी कर्मचारी के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण अाैर अपील) नियम, 1958 के नियम-17/ नियम-16 में जांच शुरू की जाएगी। इधर, यह अादेश जारी हाेने के बाद इसके विराेध में पार्षद लामबंद हाेने लगे हैं। उनका अाराेप है कि अायुक्त की अाेर से अादेश में पार्षदाें व जनप्रतिनिधियाें का जिक्र करना उनका अपमान करना है।

इन तीन मामलाें में भी हाे चुका है विवाद, जांच भी चल रही है

पहला: 23 कराेड़ के टेंडर में पूल... 10 कराेड़ 95 लाख 50 हजार रुपए के 43 काम और 12 कराेड़ रुपए के 79 काम के टेंडर में ठेकेदाराें व पार्षदाें में काम के बंटवारे हाे जाने के बाद इसमें पूल की पुष्टि हाेने के बाद अायुक्त ने ये टेंडर निरस्त कर दिए थे। दाेनाें टेंडर के पूल सिस्टम काे कुछ पार्षद लीड कर रहे थे। पार्षद अपने चहेते ठेकेदार काे टेंडर दिलाना चाहते थे।

दूसरा: अामंत्रण पत्र में भाजपा के चुनाव चिह्न का फाेटाे... महाशिवरात्रि पर हरणी महादेव मंदिर में हुए मेले के लिए छपवाए आमंत्रण पत्र को लेकर भी कलेक्टर को शिकायत की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि कार्ड पर जो फूल बना है वह भाजपा के चुनाव चिह्न कमल का है। परिषद में सभापति भाजपा की हैं इसलिए जानबूझकर एेसा किया गया है। इस मामले की जांच चल रही है।

तीसरा: सभापति का शहर से बाहर सरकारी गाड़ी ले जाना... सभापति मंजू चेचाणी के सरकारी गाड़ी को निजी काम में ले जाने की शिकायत हुई है। कुछ लोगों ने सभापति की गाड़ी की लॉग बुक की प्रति सूचना के अधिकार के तहत मांगी है। सूचना निर्धारित समय में नहीं दी गई क्योंकि चालक ने लॉगबुक ही जमा नहीं करवाई है। इसके बाद गैराज शाखा ने ड्राइवर को नोटिस जारी किया।

के लिए देते हैं। यह सही नहीं है अाैर इससे परिषद की गाेपनीयता भंग हाे रही है। इसलिए सभी अनुभाग प्रभारी, अधिकारी व कर्मचारियाें काे अादेश दिए जाते हैं कि एक से दूसरे सेक्शन में फाइल भेजनी हाे या अायुक्त काे प्रस्तुत करनी है ताे खुद या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के माध्यम स प्रस्तुत करें। अादेश की अवहेलना मिलने पर दाेषी कर्मचारी के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण अाैर अपील) नियम, 1958 के नियम-17/ नियम-16 में जांच शुरू की जाएगी। इधर, यह अादेश जारी हाेने के बाद इसके विराेध में पार्षद लामबंद हाेने लगे हैं। उनका अाराेप है कि अायुक्त की अाेर से अादेश में पार्षदाें व जनप्रतिनिधियाें का जिक्र करना उनका अपमान करना है।


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