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भीलवाड़ा पहला शहर जहां बाढ़ राेकने वाला कपड़ा बनने लगा, सामान्य से 4 गुना मजबूत

Jan 24, 2020, 07:30 AM IST
Bhilwara News - rajasthan news bhilwara is the first city where the flood breaking fabric started becoming 4 times stronger than normal

1 मजबूती के लिहाज से देखा जाए ताे सल्जर लूमाें पर बनने वाली सामान्य शूटिंग 150 से 300 डेनियर की हाेती है, लेकिन पाेली प्राेपलीन कपड़ा 800 से 1200 डेनियर का हाेता है।

2 सल्जर लूम में विड्थ के हिसाब से थाेड़ा बदलाव किया जाता है। इसके लिए यार्न गुजरात के सिलवासा से मंगाया जाता है।

नरेंद्र जाट | भीलवाड़ा

भीलवाड़ा राजस्थान का पहला एेसा शहर बन गया है, जहां अब बाढ़ राेकने का कपड़ा भी बनने लगा है। पाेली प्राेपलीन नाम का यह कपड़ा अब पूरे देश भर में सप्लाई हाेगा। अब तक देश में पानी के बहाव काे राेकने के लिए सीमेंट के कट्टे लगाए जाते हैं, लेकिन पहली बार अब पानी के तेज बहाव काे राेकने के लिए यह कपड़ा लगाया जाएगा। यह कपड़ा वाटर प्रूफ हाेता है अाैर सामान्य कपड़े से इसकी मजबूती चार गुना ज्यादा हाेती है। यह कपड़ा जिस यार्न से बनता है उसे बिना नुकीली चीज से काटना मुश्किल है। इसलिए बाढ़ राेकने में यह पाेली प्राेपलीन कपड़ा काफी कारगर साबित हाे रहा है।

भीलवाड़ा के उद्यमियाें का यह इनाेवेशन टेक्सटाइल इंडस्ट्री का अब तक का सबसे बड़ा वैल्यू एडिशन है। एक्सपर्ट्स का मानना है एेसा कपड़ा बनाने के लिए अलग तरह की टेक्नाॅलाेजी के लूम की जरुरत पड़ती है, लेकिन भीलवाड़ा के कपड़ा उद्यमियाें ने सल्जर लूम में ही थाेड़ा बदलाव करके यह कपड़ा बनाना शुरू कर दिया है। उद्यमियाें काे इस कपड़े की कीमत भी ज्यादा मिलती है। भीलवाड़ा में सबसे पहले इसका उत्पादन रीकाे एरिया स्थित गाेमूर टेक्सटाइल ने शुरू किया था। इसके बाद कुछ अाैर इंडस्ट्री भी यह कपड़ा बनाने लगी। यह बाढ़ग्रस्त राज्याें में सप्लाई हाे रहा है।

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पानी का तेज बहाव राेकने के काम अा रहा है, बाढ़ग्रस्त राज्यों में होगी सप्लाई

अभी बारिश में पानी के तेज बहाव को राेकने के लिए सीमेंट के कट्टे काम में लिए जाते हैं। इन कट्टाें में रेत या मिट्टी भरकर पानी के बहाव के अागे रख दिया जाता है। सिंथेटिक वीविंग मिल्स एसोसिएशन के सचिव रमेश अग्रवाल का कहना है कि सीमेंट के कट्टे कमजाेर हाेने के कारण बहाव तेज हाेते ही फट जाता है। लेकिन पाेली प्राेपलीन का कपड़ा सीमेंट के कट्टे से कई गुना ज्यादा मजबूत हाेता है। इस कपड़े के 50, 100 व 200 किलाे के बैग बनाए जाते हैं ताकि इनमें रेत या मिट्टी भरकर पानी के तेज बहाव में रख दिए जाते हैं। यह तेज बहाव में भी फटता नहीं है।

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