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शहर फिर ओडीएफ घोषित, स्वच्छता सर्वेक्षण में हम कर सकेंगे 1500 अंक के लिए दावा
ओडीएफ के दर्जे का स्वच्छता सर्वेक्षण में यह फायदा... स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में ही ओडीएफ प्लस प्लस के ही 1500 अंक है। हमारे नॉन ओडीएफ के दर्जे के कारण 1500 अंकों पर दावा ही नहीं कर सके। 100 प्रतिशत शौचालय होने पर ही ओडीएफ प्लस प्लस हो सकते है। इस बार सर्वेक्षण में शहर को फायदा नहीं मिला है लेकिन अगले सर्वेक्षण में अधिक अंकों मिल सकेंगे।
स्वच्छता के मामले में भीलवाड़ा काे एक साल पहले खाेया गौरव फिर मिल गया है। भीलवाड़ा का ओडीएफ दर्जा पिछले साल छीन लिया गया था। इसकी वजह से स्वच्छता सर्वेक्षण में अंक कटे थे। यहां तक कि ओडीएफ, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ प्लस प्लस के लिए आवेदन नहीं कर सके। नतीजा यह रहा कि 1500 अंक हम पहले गवां चुके थे। लेकिन खुशी की बात है कि भीलवाड़ा फिर से ओडीएफ हो चुका है। इससे हम अगले स्वच्छता सर्वेक्षण में अधिक अंकों के लिए दावेदारी कर पाएंगे। भीलवाड़ा नगर परिषद ने स्वयं को ओडीएफ घोषित किया था। इसके बाद क्यूसीआई की टीम ने निरीक्षण किया था तब कांवाखेड़ा और कीरखेड़ा में सामुदायिक शौचालय नहीं थे। एेसे में भीलवाड़ा के ओडीएफ का दर्जा छीन लिया गया। जनवरी में सर्वेक्षण टीम व क्यूसीआई की टीम भी भीलवाड़ा आई थी। उसने खामी दूर हाेना मानते हुए भीलवाड़ा का दर्जा फिर से लौटाया।
नगर परिषद आयुक्त नारायणलाल मीणा का कहना है कि हमारी टीम की मेहनत की वजह से भीलवाड़ा को ओडीएफ दर्जा फिर से मिला है। अब सिर्फ सर्टिफिकेट का इंतजार है। अगले सर्वेक्षण में रैंक में फायदा मिलना तय है।
अब व्यक्तिगत श्रेणी के टॉयलेट नहीं बने तो छीनेगा दर्जा
फिलहाल जो दर्जा मिला वह सामुदायिक शौचालय के निर्माण के आधार पर मिला है। लेकिन अब जो दर्जा बरकरार रहेगा उसमें व्यक्तिगत श्रेणी के शौचालय का निर्माण करना जरूरी है। भीलवाड़ा में करीब 600 व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण बाकी है। इसके लिए नगर परिषद की ओर से टेंडर हो चुके है। वर्क ऑर्डर होना शेष है। करीब छह महीने में अगर शौचालय का निर्माण नहीं होता है और टीम के निरीक्षण के दौरान कमी मिलती है तो दर्जा छीन सकता है।