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ऑटो व ट्रेन चलाने लगी बेटियां, वीर की शहादत पर अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक जाने लगी बेटियां
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पांच दिवसीय फूलडोल महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार रात कॉलेज ग्राउंड पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। वीर रस की कवयित्री कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना मां हम सब पर कृपा बरसा दो.. सुनाई। कोई जर्रा नहीं ऐसा जहां रब नहीं होता, लड़ाई वे ही लड़ते हैं जिन्हें मतलब नहीं होता। परिवार पर बोझ बढ़ा तो ऑटो-रिक्शा, ट्रेन को चलाने लगी बेटियां, वीर की शहादत पर अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक भी अब जाने लगी बेटियां...कविता सुनाई तो श्रोताओं ने उनका स्वागत किया। कवि अमन अक्षर ने राम पर कविता सुनाकर तालियां बटोरी। अमन अक्षर ने सारा जग है प्रेरणा...भाव सिर्फ राम है... जैसी कविता से लोगो को मंत्रमुग्ध किया। अमन अक्षर ने कविता में एक मुक्तक कहा है कि आज कैकई अगर राम के बनवास के लिए दशरथ को प्रेरित नहीं करती तो आज राम-राम पूजनीय राम वो राम नहीं होते जो आज हैं। हास्य कवि संपत सरल ने मन की बात पर कविता सुनाई। मंजर भोपाली, अमन अक्षर ने भी काव्य पाठ किया।
जहाजपुर में आयोजन; कविता से पाकिस्तान को ललकारा, शहीदों को श्रद्धांजलि दी
जहाजपुर | रंग पंचमी महोत्सव समिति के तत्वावधान में 12 मार्च की रात बस स्टैंड पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कवियों ने श्राेताअाें काे गुदगुदाया। कविता से पाकिस्तान को ललकारा। शब्दों से शहीदाें काे श्रद्धांजलि भी दी।
कवि सम्मेलन के सूत्रधार कवि महेंद्र मतवाला, समिति के अतुल भारद्वाज, राजीव कांटिया, किशन पंचोली, भंवरलाल लड्ढा, शिवराज टाक ने कवियों व अतिथि थाना प्रभारी हरीश सांखला का स्वागत किया। कवि अतुल भारद्वाज ने मां शारदे की स्तुति कर कवि सम्मेलन की शुरुअात की। कवि ओमपाल सिंह निडर फिरोजाबाद, गीतकार प्रांजल सिंह फिरोजाबाद, हास्य कवि कुलदीप ललकार दिल्ली, गीतकार शिव शैलेंद्र यादव, देवकरण मेघवंशी केकड़ी, हरीश हंगामा नीमच, नम्रता नमिता भोपाल, धर्मेंद्र सोनी कोटा, परमानंद दाधीच कोटा ने रचनाएं पेश की।
मैं अपने गीत गजलों से उसे पैगाम देता हूं.. डॉ. कुमार विश्वास
सूत्रधार कवि डॉ. कुमार विश्वास ने मैं अपने गीत गजलों से उसे पैगाम देता हूं, जख्म भर जाएंगे तुम मिलो तो सही...कविता पढ़ी। कुमार विश्वास की पहली पोस्टिंग शाहपुरा के राजकीय प्रतापसिंह बारहठ महाविद्यालय में हुई थी। तब के प्रेम के बारे में कुमार विश्वास ने बताया कि शाहपुरा से बड़ी धरती मेरे लिए हो ही नहीं सकती, शाहपुरा मेरे दिल और जिगर में समाया हुआ है। कुमार विश्वास ने कहा वे पल आज भी मुझे याद आते हैं उन पलों को मैं भुला नहीं सकता हूं, जो प्रेम कहानी मेरे साथ शाहपुरा में हुई। जहां से मैं उठा हूं आज मैं जो सब कुछ भी हूं सिर्फ और सिर्फ शाहपुरा की वजह से हूं। शाहपुरा से मेरा व्यवसायिक जीवन ओर निजी जीवन दोनों ही शुरू हुआ है।