मूंगफली की फसल में समय पर राेग व कीटों पर काबू पाना जरूरी, तभी हाेगी अच्छी पैदावार

Bhilwara News - मूंगफली की फसल आमतौर पर सिंचित इलाकों में बहुतायत से होती है। इन इलाकों में मूंगफली की बुअाई के बाद सिंचाई व...

Bhaskar News Network

Jul 23, 2019, 10:50 AM IST
Ropa News - rajasthan news it is important to control the peanut crop in time and it is necessary to control good crops
मूंगफली की फसल आमतौर पर सिंचित इलाकों में बहुतायत से होती है। इन इलाकों में मूंगफली की बुअाई के बाद सिंचाई व देखभाल का काम शुरू हो गया है। मूंगफली की अच्छी पैदावार लेने के लिए यह जरूरी है कि इनको रोग और कीटों से बचाया जाए। इसके अभाव में यह फसल आशानुरूप फायदा नहीं दे पाएगी। मूंगफली की फसल काे कातरा, दीमक, मोयला, सफेद लट नियंत्रण, टिक्का रोग और पीलिया रोग से खतरा हाेता है। इनके उपचार के लिए समय पर कृषि विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए। दुर्गापुरा स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान में पौध व्याधि विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. रिद्धिशंकर शर्मा ने बताया कि मूंगफली की फसल में अधिक उपज के लिए 0.1 प्रतिशत थायोयूरिया या 0.01 प्रतिशत थायोग्लाइकोलिक अम्ल के घोल के दो छि़ड़काव 30 या 60 दिन की फसल अवस्था पर करें। थायोग्लाइकोलिक अम्ल शरीर के किसी भी अंग पर न पड़े। छिड़काव रबर के दस्ताने पहनकर करें। अधिक उत्पादन के लिए नेफ्थलिन एसेटिक एसिड का 50 पीपीएम का प्रथम छिड़काव 35 दिन पर एवं दूसरा छिड़काव 45 दिन की अवस्था पर करें।

कीटों से पौधों का बचाव


रोगों से बचाव के उपाय

टिक्का रोग : यह रोग फसल उगने के 40 दिन बाद दिखता है। इससे पौधों की पत्तियों पर मटियाले गहरे भूरे धब्बे पड़ जाते हैं। यह रोग दिखते ही कार्बेंडेजिम आधा ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का या डेढ़ किलो मैन्कोजेब का प्रति हैक्टेयर छिड़काव करें। 10 से 15 दिन के अंतर से दो बार ऐसे छिड़काव और करें।

पीलिया रोग : जिन खेतों में मूंगफली की फसल में पीलिया रोग होता है, वहां 3 साल में एक बाद बुअाई से पहले 250 किलो जिप्सम प्रति हैक्टेयर डालना चाहिए। इसके अभाव में हरा कसीस (फेरस सल्फेट) 0.5 प्रतिशत या गंधक के अम्ल के 0.1 प्रतिशत घोल का फसल में फूल आने से पहले एक बार और पूरे फूल आने पर दूसरी बार छिड़काव करें। इसमें साबुन का घोल भी मिलाएं।

विषाणु गुच्छा रोग ( क्लम्प वाइरस) : जून के प्रथम पखवाड़े में बुवाई करने से इस रोग का प्रकोप कम होता है। दूसरा, रोग ग्रसित क्षेत्र में बाजरे की बुअाई 100 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से करें व 15 दिन बाद बाजरे को पलट मूंगफली की बुअाई करें। इससे विषाणु गुच्छा रोग में 90 प्रतिशत की कमी आंकी गई है। यह जल्दी व समय पर बोई जाने वाली मूंगफली की फसल में प्रभावी है। तीसरा, बुअाई के समय ब्लाइटोक्स 50 कवकनाशी 10 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से उमरों में डालने से रोग कम लगता है।

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