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संदल की रस्म के साथ जश्न ए सैलानी का समापन

एक वर्ष पहले
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सैलानी आश्रम में सालाना उर्स जश्न ए सैलानी का समापन शनिवार को संदल व कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ। प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से अकीदतमंद पहुंचे। जायरीनों ने ढोल-ताशों के साथ सैलानी आश्रम पहुंच सद्गुरु पीरो मुर्शिद मोहम्मद हनीफ रहमान बाबा के चिल्ले पर अकीदत के फूल पेश किए। देश के कई हिस्सों जायरीन सैलानी आश्रम पहुंचे थे। मन्नत पूरी होने पर बच्चों को गुड़, खोपरे एवं पंचमेवों से तुलवाया।

आश्रम के सज्जादानशीन गुलामाने सैलानी मोहम्मद सलीम बाबा ने बताया कि शनिवार शाम आस्ताने की खिदमत कर गुलाब जल से गुस्ल किया। ऊंट की सवारी पर शाही संदल, चादर सैलानी आश्रम लाई गई। जायरीनों को पंचमेवा की तबर्रुक लुटाई।

उर्स का पैगाम है मोहब्बत: सलीम बाबा

सज्जादानशीन मोहम्मद सलीम बाबा ने कहा कि उर्स जात-पात, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर सौहार्द एवं मोहब्बत का पैगाम देता है। जिस तरह उर्स में सर्वधर्म का समायोजन पाया उसी तरह राष्ट्र निर्माण में भी एकता का परिचय दें। इंसान एक दूसरे के दर्द को समझें। खून का कोई मजहब नहीं होता। आपस में बैर न रखते हुए एक-दूसरे का दर्द साझा करें।

सांस-सांस में खुदा बसा है, रोम-रोम में राम

संदल की रस्म के बाद महफिल का शुभारंभ सहाड़ा विधायक कैलाश त्रिवेदी व अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन से की। बीकानेर के कव्वाल भंवर अली, अब्बू आरीफ भोपाली, रेखा भोपाली एवं सजदा ग्रुप ने ‘या चुंदड़ मारी ऐसी रंगो गुरुदेव’, ‘तेरी रहमतों का दरिया’, ‘तू माने या ना माने दिलदारा’, ‘सांस-सांस में खुदा बसा है रोम रोम में राम’ अादि प्रस्तुतियों से महफिल को देर रात तक जमाए रखा।

करेड़ा. उर्स में बच्चों को मन्नत से तोलते हुए जायरीन।

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