बिजौलिया सीएचसी में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं, कम वजन वाले व बीमार नवजात काे काेटा रैफर कर रहे

Bhilwara News - भास्कर न्यूज| गुलाबपुरा/बिजाैलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्राें की स्थिति चिंताजनक है। भामाशाह ने वार्ड गोद...

Jan 16, 2020, 08:15 AM IST
Gulabpura News - rajasthan news not a pediatrician in bijoulia chc referring to low weight and sick newborn feta
भास्कर न्यूज| गुलाबपुरा/बिजाैलिया

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्राें की स्थिति चिंताजनक है। भामाशाह ने वार्ड गोद ले रखे हैं। जहां व्यवस्थाएं बेहतर हैं, लेकिन डॉक्टरों के पद खाली हैं। जिले में डाॅक्टराें के 168 पद रिक्त हैं। जिले के 85 स्वास्थ्य केंद्र जर्जर भवन में चल रहे हैं। गुलाबपुरा में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद खाली हैं। गायनिक नहीं होने से प्रसव नर्सिंग स्टाफ कराता है। शिशु रोग विशेषज्ञ का पद 7 साल से खाली है। सर्जन नहीं होने से दुर्घटना में गंभीर घायलों को सिर्फ रैफर किया जा रहा है। बिजौलिया सीएचसी के भी हालात ऐसे ही हैं। यहां नवजात की स्थिति बिगड़ने पर कोटा या भीलवाड़ा रैफर कर दिया जाता है। डॉक्टरों के चार पद खाली हैं। सीएमएचअाे डाॅ. मुश्ताक खान का कहना है कि जिले में डाॅक्टर्स की कमी है, जहां जाे जरूरत हाेगी व्यवस्था की जा रही है।

रैफर होकर आने वाले बच्चों को बचाना सबसे मुश्किल काम: डाॅ. बैरवा

काेटा के जेकेलाेन में शिशु राेग विभाग के एचअाेडी डाॅ. एएल बैरवा ने बताया कि हमारे यहां मरने वाले 70 से 80 प्रतिशत बच्चे न्यू बाेर्न हाेते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या उन बच्चाें की हाेती है, जाे दूसरी जगह से रैफर होकर आते हैं। कड़ाके की सर्दी में बच्चों को दूसरी जगह से यहां लाना खतरनाक है।

50 बैड वाले गुलाबपुरा सीएचसी में गायनिक, शिशु राेग विशेषज्ञ अाैर सर्जन नहीं

50 बैड वाले गुलाबपुरा सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद रिक्त हैं। वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी का पद समाप्त कर दिया गया। अब चिकित्सकों के 10 ही रह गए हैं। जिसमें से 6 पद रिक्त हैं। एक डाॅक्टर काे डेपुटेशन पर हुरड़ा लगा रखा है। तीन डॉक्टर आउटडोर संभालते हैं। अभी प्रतिमाह 10 हजार का आउटडोर है। ऐसे में मरीज काे अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। गायनिक नहीं होने से नर्सिंग स्टाफ प्रसव करा रहे हैं। प्रतिमाह 170 प्रसव अस्पताल में होते हैं। मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवा का अलग वार्ड व लेबर रूम है। 20 बैड का वार्ड है। शिशु रोग कनिष्ठ विशेषज्ञ का पद सृजित है, लेकिन यह 7 साल से रिक्त है। चिकित्सा अधिकारी डीडी गुप्ता शिशुअाें का इलाज करते हैं। गायनिक व सर्जन कनिष्ठ विशेषज्ञ के पद भी वर्षों से रिक्त हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग होने से अाए दिन हादसे हाेते रहते हैं। सर्जन नहीं हाेने से प्राथमिक उपचार के बाद मरीज काे रैफर कर दिया जाता है। चिकित्सा प्रभारी डाॅ. विजय सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रतिमाह औसतन 170 प्रसव होते हैं।



बदनाैर सीएचसी का नया भवन तैयार है लेकिन उदघाटन नहीं हाे पाया है। इससे अस्पताल पुराने भवन में ही चल रहा है। यहां व्यवस्थाएं ठीक नहीं हैं। सर्दी के बावजूद वार्डों में बैड पर बैडशीट तक नहीं बिछाई जाती है। प्रसूताओं के लिए बैड की व्यवस्था भी नहीं है। इससे प्रसूताओं व नवजात को फर्श पर सुलाया जाता है। सर्दी में फर्श पर सुलाने से बच्चे निमोनिया का शिकार हो जाते हैं। वार्डों में पर्याप्त कंबल भी नहीं हैं।

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