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बदला काराेबारी रंग; परंपरागत सूटिंग के बाद अब रंगीन कपड़ा बनने लगा...अफ्रीकी देशों में सप्लाई
अब तक पारंपरिक रंगाें में सूटिंग बना रहा भीलवाड़ा का कपड़ा उद्याेग रेडिमेड गारमेंट उद्याेग के लिए विविध रंगाें का फेब्रिक भी बनाने लगा है। देश के बड़े रेडिमेड गारमेंट उत्पादक पहले सूरत से रंगीन कपड़ा खरीदते थे। छह महीने से भीलवाड़ा में शुरुअात हुई है। उद्यमियाें ने ट्रेडिशनल सूटिंग के साथ ही रंगीन कपड़ा बनाना शुरू किया। सनग्लाे सूटिंग के डायरेक्टर पंकज हरकुट ने बताया कि महिलाएं ही नहीं, किड्स अाैर जेंट्स के लिए भी जैकेट, काेट का विशेष बुनाई एवं रंगाें का कपड़ा बन रहा है। महिलाअाें के लिए रंगीन प्लाजाे, कुर्ती, हेरम सहित अन्य कपड़ाें के अलावा बच्चाें अाैर पुरुषाें में ट्राउजर, जैकेट, काेट की अच्छी मांग देश के मेट्राे सिटी अाैर विदेशाें में है।
घरेलू बाजार में भी डिमांड बढ़ी
{घरेलू बाजार : सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, इंदाैर, कानपुर, नई दिल्ली, अमृतसर, लुधियाना, बैंगलुर अादि शहराें में रंगीन कपड़ाें की अच्छी मांग है।
{ विदेशी बाजार : अफ्रीकी दशाें मुख्य रूप से केन्या, नाइजीरिया अादि सहित खाड़ी के कुछ देशाें में भी भीलवाड़ा का रंगीन कपड़ा निर्यात हाे रहा है।
परिंदों के साथ प्रकृति की होलीनौ रंग इसलिए नवरंग है यह...जिले में दुर्लभ है यह चिड़िया
भीलवाड़ा. सही है प्रकृति से बड़ा चितेरा कोई नहीं। प्रकृति फूलों, पेड़ों-परिंदों के रंगों में होली खेलती है। ऐसा ही एक परिंदा है इंडियन पिट्टा। यह चिड़िया प्रदेश में अब दुर्लभ श्रेणी में है। इसके शरीर पर 9 रंग हैं इसलिए नवरंग कहा जाता है। पक्षी फोटोग्राफर प्रो. अनिल त्रिपाठी ने इसे जिले के पक्षी गांव चावंडिया में क्लिक किया। {कंटेंट| राकेश पाराशर
रीको एिरया की एक फैक्ट्री में अलग-अलग रंगों के कपड़े की ग्रेडिंग करता कारीगर।