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स्वयं- भू शिवालय; द्वादश ज्याेतिर्लिंग स्वयं प्रगटे हमारे यहां स्वनिर्मित शिव मंदिरों के होते हैं दर्शन

Bhilwara News - शिव आराधना का महापर्व शुक्रवार को है। इस दिन चार प्रहर के िवशेष अभिषेक व पूजा सुख-समद्धि और उत्तम स्वास्थ्य दायी...

Feb 21, 2020, 07:26 AM IST
Bhilwara News - rajasthan news self pagoda dwadash jyotirlinga is self manifested we have a vision of self built shiva temples here
शिव आराधना का महापर्व शुक्रवार को है। इस दिन चार प्रहर के िवशेष अभिषेक व पूजा सुख-समद्धि और उत्तम स्वास्थ्य दायी हाेती है। सूर्यास्त के साथ शाम 6:18 बजे से प्रथम प्रहर की पूजा की जा सकती है। करीब तीन घंटे का एक प्रहर माना गया है। द्वितीय प्रहर की पूजा रात 9:29 बजे से, तृतीय प्रहर की मध्यरात्रि 12:40 बजे से व चतुर्थ प्रहर की पूजा शनिवार तड़के 3:53 बजे से शास्त्र सम्मत रहेगी। शुक्रवार सुबह 9:13 से रात तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दौरान किए व्रत-अनुष्ठान पुण्यकारी हैं। जल, दूध, गन्ने का रस से अभिषेक, पंचामृत स्नान तथा बिल्व-अाक अाैर धतूरा पुष्प चढ़ाना शुभ बताया है। कई श्रद्धालु दान रूप में शिवालयाें में प्रसाद, फल, दूध वितरण भी करेंगे।

शिव महिमा अपार है। शिव ज्ञान...विज्ञान और आध्यात्म के प्रतीक हैं। इसीलिए देश में सबसे अधिक मंदिर शिवजी के हैं। वेद-पुराणाें में द्वाद्वश ज्याेतिर्लिंग का महात्म्य हैं। इन स्थानाें पर शिवलिंग स्वयंभू हैं। यानि स्वत: प्रगट हुए हैं। गुजरात के सौराष्ट्र अंचल (काठियावाड़) में सोमनाथ, दक्षिण में श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, मध्यप्रदेश के मालवा के उज्जैन में महाकाल, इंदाैर के निकट अाेमकारेश्वर अथवा ममलेश्वर, झारखंड के दुमका जिले में बैद्यनाथ, डाकिनी में भीमाशंकर, तमिलनाड्ु में समुद्र तट पर रामेश्वरम, दारुकावन में नागेश्वर, उत्तरप्रदेश के बनारस में काशी विश्वनाथ, महाराष्ट्र में नासिक के निकट गोदावरी तट पर त्र्यंबकेश्वर, अजंता-एलेरा गुफाअाें के पास घृष्णेश्वर अाैर हिमालय पर केदारनाथ ज्याेतिर्लिंग हैं। इनके नाम शिव पुराण (शतरुद्र संहिता, अध्याय 42/2-4) में भी उल्लेखित हैं। अरावली में कई स्थान शिवमय हैं। गुफाअाें में बने शिव मंदिराें काे क्षेत्रवासी ज्याेतिर्लिंग की तरह ही पूजते हैं। भीलवाड़ा जिले में एेसे अनेक शिवालय हैं जिनमें न केवल शिवलिंग स्वयंभू माने जाते हैं बल्कि प्राकृतिक रूप से पूरे शिवालय ही स्वयं-भू हैं।

{अधरशिला : एक दूसरे पर झूलती हुई चट्टानें, बाहर विशाल मंदिर

राजसमंद हाईवे पर उपनगर पुर के पास पहाड़ी में यह स्थान है। चट्टाने इस तरह से एक-दूसरे पर टिकी हैं कि देखने पर अाश्चर्य हाेता है। बाहर से विशाल मंदिर दिखता है लेकिन विशाल चट्टान इस तरह झूलती हुई सी है कि गर्भगृह पर छत बनाने की जरूरत ही नहीं रही।

{हरणी : 800 साल से पूजन, 50 साल पहले कराया गया जीर्णोद्धार

शहर से करीब 8 किलाेमीटर हरणी गांव के पास गुफा मंदिर है। कभी घने जंगल यानि अरण्य में था। अरण्य का अपभ्रंश हरणी रह गया। बताते हैं कि 50 साल पहले बाहरी मंदिर का निर्माण हुअा। वर्ष 1969 में माघ शुक्ला त्रयाेदशी काे शिखर पर पहली बार ध्वजा चढ़ाई गई थी।

{ तिलस्वां : कुंड का जल अाराेग्य देने वाला, 7 दिन तक मेला होगा

काेटा राेड पर शहर से करीब 88 किलाेमीटर दूर यह शिवधाम है। एेरू नदी के तट पर पवित्र कुंड बना है। मान्यता है कि कुंड मेें स्नान से चर्म राेगियाें काे फायदा हाेता है। महाशिवरात्रि के 7 दिवसीय मेले में मेवाड़ समेत हाड़ाैती व मालवा अंचल से भी जत्थे पहुंचते हैं।

चार प्रहर की
पूजा दिलाएगी सुख-समृिद्ध


पहले प्रहर का पूजन शाम 6.18 बजे से

जनअास्था के केंद्र जिले के ये तीन स्वयंभू शिवालय जहां आज होगा चतुर्प्रहर पूजन


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