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पूरी तरह जले शव की जेब में सुसाइड नोट, जिसमें जिक्र बेटी की मौत से आहत हूं...शादीशुदा नहीं, अनपढ़ भी था...पुलिस कह रही आत्महत्या

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बिजौलिया

कांस्या क्षेत्र के बहादुरजी का खेड़ा में एक कंपनी के कार्यालय के सामने खेत में अधेड़ का अधजला शव मिला। शव एक सूखे पेड़ के नीचे पड़ा था। पेड़ भी अधजला है और बाइक के टायरों के तारों से शव इसके लिपटा था। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या माना है। जबकि परिजनों ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर हत्या की आशंका जताई है। परिजन मुआवजे की मांग पर अड़ गए। एफएसएल टीम ने भी सबूत लिए हैं। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस के अनुसार पास पड़े मिले आधार कार्ड से शिनाख्त गंगाराम (65) पुत्र बरदा बलाई निवासी उम्मेदनगर (शाहपुरा) के रूप में हुई। वह बहादुरजी का खेड़ा में पत्थर कारोबारी कंपनी कैलाश माइनिंग में 3 साल से बागवानी का काम करता था। इसी कार्यालय के सामने सड़क के दूसरी तरफ कुछ ही दूर पेड़ के पास शव मिला। भतीजे मदनलाल ने पुलिस को बताया कि चाचा गंगाराम करीब 30 साल से तिलस्वां क्षेत्र में ही मजदूरी कर रहा था। करीब 27 साल तक तिलस्वा महादेव मंदिर की बगीची में बागवानी की। पिछले 3 साल से वह बहादुरजी का खेड़ा में कंपनी एवं तिलस्वा महादेव में बन रही सराय के काम काम पर जा रहा था। गंगाराम शादीशुदा नहीं था।

खनन कंपनी में 3 साल से बागवानी करता था गंगाराम

पड़ताल : समझिए कौन से तथ्य है जिनसे उठ रहे सवाल

पुलिस का तर्क...कांस्या चौकी प्रभारी जोगेंद्र सिंह का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का लग रहा है। सुसाइड नोट मिला है।

संदेह इसलिए...भाई और भतीजे नेे बताए हैं ये तथ्य

जेब में सुसाइड नोट : सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेड़ और शव बुरी तरह जल गए तो जेब में कागज का टुकड़ा कैसे मिला ?

अनपढ़ ने लिखा कैसे : गंगाराम के भतीजे मदनलाल का कहना है कि चाचा पढ़े-लिखे नहीं थे तो नोट कैसे लिखा?

बेटी कहां से आई : भाई नारायण का कहना है कि गंगाराम ने शादी ही नहीं की। हम भी हैरान है कि बेटी का जिक्र कहां से आया?

बाइक के टायर से बंधा : गंगाराम का शव पेड़ से टायर से बंधा मिला। इन हालात में आत्महत्या कैसे कहा जा सकता है?

आगे क्या...यह प्रकरण अभी पुलिस के प्रारंभिक बयान और परिजनों की ओर से उठाए गए सवालों के आधार पर ही टिका है। पुलिस की जांच में कई खुलासे संभव है। पुलिस यह जानना चाहेगी कि आखिर एक बागवान इस तरह आत्महत्या क्यों करेगा या उसकी किसी ने जान ली तो क्यों?

भास्कर ऐसे फोटो प्रकाशित नहीं करता है लेकिन क्या इन हालात में सुसाइड नोट बच सकता है। बस यही बताने के लिए।

सहकर्मी से कहा था कुछ दिन की बात और है
पुलिस को उसके साथ काम करने वाले लोगों ने बताया कि गंगाराम को पेड़-पौधों को पालने का शौक था। तिलस्वां महादेव मंदिर में नौकरी के दौरान शिवजी की बाड़ी डवलप की, जहां से भगवान को पुष्प चढाएं जाते हैं। इसके बाद उसने एक और सराय में फुलवारी और गार्डन डवलप किया। उसके काम को देखते हुए एक अन्य धर्मशाला में भी उसे चौकीदारी का काम मिल गया। करीब एक साल पहले गंगाराम यहां आ गया, जहां भी उसने गार्डन डवलप किया था। चौकी इंचार्ज का कहना है कि एक दिन पहले बिजौलिया से एक सहकर्मी उसके पास आया और गंगाराम से पूछा कि बुझे-बुझे कैसे दिख रहे हो। इस पर उसने कहा कि दो-तीन दिन की और बात हैं। पुलिस का कहना है कि आखिर गंगाराम ने ऐसा क्यों बोला। हम इस दिशा में जांच करेंगे कि क्या वह किसी बात को लेकर परेशान तो नहीं था।

गंगाराम 27 साल से तिलस्वां क्षेत्र में काम कर रहा था... तिलस्वां के लोगों ने बताया कि गंगाराम स्वभाव से सरल था। वह 27 साल तक तिलस्वा में ही बगीची में काम करता रहा। मंदिर में भोग व भक्तों की ओर से होने वाली परसादी से ही गुजारा कर लेता था। हर दिन की तरह उसने शुक्रवार तड़के भी कंपनी के कर्मचारियों के लिए चाय बनाई थी। इसके बाद वह बाहर निकल गया था। पुलिस को सुबह करीब 6 बजे उसका शव पड़ा होने की सूचना मिली। गांव में सुबह 9 बजे उसके भाई नारायण बलाई, भतीजे व अन्य परिजनों को सूचना मिली। ये मौके पर पहुंचे और हत्या का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग करने लगे। शाम तक पुलिस और परिजनों में समझाइश के दौर चले। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के बाद शव गांव ले जाया गया। पुलिस ने परिजनों को भरोसा दिया है कि मामले की गंभीरता से पूरी जांच करके स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

आरोप : बंधक बना जंगल में ले गए और जलाया... शाहपुरा. ईंटमारिया पंचायत के उम्मेदनगर के गंगाराम पुत्र बरदा बलाई की तिलस्वां के पास हत्या की आशंका सुबह 9 बजे भाई नारायण को फोन पर मिली। परिजन ईंटमारिया से सरपंच कैलाशचंद्र शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए बिजौलिया थाने पर रिपोर्ट दी। ग्रामीणों ने हत्या का मामला दर्ज नहीं होने पर बिजौलिया में प्रदर्शन भी किया। नारायण बलाई का आरोप है उसके भाई को अज्ञात लोग बंधक बनाकर जंगल में ले गए जहां पेड़ से बांधकर उस पर डीजल छिड़क जिंदा जलाया। घटना की जानकारी शुक्रवार सुबह लोगों ने पुलिस को दी। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम के बाद देर शाम परिजन शव लेकर उम्मेदनगर आए। गंगाराम अधिकांश समय तिलस्वा व कास्या ही रहा। कभी-कभी ही गांव आता था। परिजनों का कहना है कि कई संदेह के सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस : गंगाराम अंगूठा लगाता था लेकिन 6 साल पहले के हस्ताक्षर मिले
कास्या चौकी प्रभारी जोगेंद्रसिंह का कहना है कि गंगाराम अंगूठा लगाता था। हालांकि वह थोड़ा-बहुत लिख लेता था। टूटी-फूटी बोली में लिखा सुसाइड नोट मिला है। तिलस्वा मंदिर में बागवानी करता था। मंदिर ट्रस्ट का वर्ष 2013 का रजिस्टर देखा जिसमें अंगूठा लगाने की बजाय उसने हस्ताक्षर कर रखे हैं। सुसाइड नोट में टूटी-फूटी बोली में लिखा है कि मैं कभी झूठ नहीं बोलता। मैं आहत हूं। मेरी बेटी मर गई अब मेरी कौन सुने? लेकिन सुसाइड नोट में बेटी के जिक्र के मामले में सवाल यह उठ रहा है कि उसकी शादी ही नहीं हुई तो बेटी कहां से आ गई? आखिर वह किस बात को लेकर आहत था।

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