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शहर में साढ़े तीन साल से चंबल पानी की सप्लाई, 5 काॅलाेनियां अब भी प्यासी
{पानी की 4 कराेड़ बकाया वसूली का अभियान... जलदाय विभाग पानी की करीब चार कराेड़ रुपए बाकियात वसूलने के लिए अभियान चला रहा है। इसके तहत कर्मचारी घर-घर पहुंच कर वसूली कर रहे है। 31 मार्च तक चलने वाले अभियान के दाैरान राशि जमा नहीं कराने वालाें के जल संबंध काटे जाएंगे। अधिकांश बाकियात घरेलू उपभाेक्ताअाें की है। जलदाय विभाग राजस्व के सहायक अभियंता निरंजनसिंह अाढ़ा ने बताया कि उपभाेक्ताअाें में करीब चार कराेड़ रुपए बाकी है। जनवरी से जारी अभियान के तहत कर्मचारी घर-घर पहुंचकर वसूली कर रहे हैं।
शहर के पटेलनगर विस्तार, मालाेला राेड व बालाजी खेड़ा सहित पांच बस्तियाें में चंबल का पानी नहीं पहुंच रहा है। क्षेत्रवासियाें ने कलेक्ट्रेट, जलदाय विभाग व चंबल प्राेजेक्ट के कार्यालय पर प्रदर्शन किया, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हाे रहा। यहां के लाेग हैंडपंप या टैंकराें पर निर्भर हैं।
यूअाईटी के अधीन पटेलनगर सेक्टर 8, 9 व 10 के लाेगाें ने पिछले दिनाें नलाें से जलापूर्ति की मांग काे लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन भी साैंपा। इसके बावजूद समस्या समाधान नहीं हुअा। क्षेत्र के राजेंद्र कुमार, सर्वेश्वर राय व राजूलाल का कहना है कि गर्मी में ताे संकट अाैर बढ़ेगा। अभी क्षेत्र में पाइप लाइन के साथ ही टंकी बनाने की भी अावश्यकता है। इसी तरह मालाेला राेड व बालाजी खेड़ा में भी चंबल का पानी नहीं पहुंचा है। यहां के निवासियाें ने भी पानी की मांग काे लेकर पिछले दिनाें कलेक्ट्रेट के साथ ही जलदाय विभाग व चंबल प्राेजेक्ट के अाॅफिस में प्रदर्शन कर ज्ञापन साैंपा था। उपराेक्त क्षेत्राें में फिलहाल पर्याप्त पाइप लाइन के साथ ही टंकियां अादि नहीं है। एेसे में नलाें से पानी मिलना संभव नहीं है। क्षेत्र में रहने वाले कैलाशचंद्र व राधेश्याम का कहना हैं कि मालाेला राेड व बालाजी खेड़ा के लाेगाें ने नलाें से पानी की मांग काे लेकर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया, इसके बावजूद काेई सुनवाई नहीं हाे रही है। कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं ताे जलदाय विभाग भेजा जाता है अाैर जलदाय विभाग पहुंचते हैं ताे चंबल प्राेजेक्ट के अधिकारियाें के पास भेजा जाता है, लेकिन समस्या समाधान नहीं हाे रहा। इस संबंध में चंबल प्राेजेक्ट के एक्सईएन वीके गर्ग का कहना हैं कि प्राेजेक्ट का काम कंपलिट हाे गया। अब नये सिरे से इसके लिए प्लानिंग बना संसाधन डवलप कर पानी पहुंचाया जा सकेगा।