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बिजौलिया के खान मालिकों को इतना खौफ कि नाम मिला डॉन...खानों में पार्टनर, वर्ग बदल कर रिश्तेदार को दी माइंस

Bhilwara News - भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा/बिजौलिया एसीबी की कोटा टीम ने राजसमंद जिले में अामेट के खनि अभियंता एवं बिजौलिया के...

Oct 31, 2019, 07:46 AM IST
Bijoliya News - rajasthan news the mine owners of bijaulia got so much fear that don mines turned partner mines given to relatives by changing class
भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा/बिजौलिया

एसीबी की कोटा टीम ने राजसमंद जिले में अामेट के खनि अभियंता एवं बिजौलिया के तत्कालीन खनि अभियंता गोपाल बच्छ के लिए उसके पार्टनर व दलाल साथी लक्ष्मण धाकड़ काे चार लाख की घूस लेते बुधवार काे बिजाैलिया में गिरफ्तार किया।

धाकड़ काे गिरफ्तार करने के बाद एसीबी टीम ने बच्छ के अारसी व्यास काॅलाेनी के मकान पर दबिश दी अाैर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। खनि अभियंता बच्छ ने नए खनिज की खनन स्वीकृति के लिए 25 लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। 25 सितंबर काे भी एसीबी ने ट्रेप के लिए जाल बिछाया, लेकिन बच्छ ने पहली किश्त में 4 लाख लेने से मना कर दिया अाैर 10 लाख रुपए ही देने की बात कही। इसके बाद परिवादी एक बार फिर बच्छ से मिला ताे उसने अपने पार्टनर और दलाल धाकड़ काे चार लाख रुपए देने की बात कही।

काेटा एसीबी के एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील कुमार ने बताया कि केर खेड़ा बिजाैलिया निवासी श्रवणलाल गुर्जर ने 20 सितंबर को एसीबी काे रिपाेर्ट दी कि उसकी राजसमंद के नाराणा गांव स्थित माइंस के नीचे ग्रेनाइट आने की संभावना पर ग्रेनाइट खनन की स्वीकृति के लिए आमेट खनि अभियंता काे आवेदन किया था। इस पर सर्वे के बाद विभाग ने प्रक्रिया रोक दी। खनि अभियंता गोपाल बच्छ ने 25 लाख रुपए रिश्वत के देने पर ही अनुमति दिलाने की बात कही। एसीबी जांच में सामने अाया कि बच्छ ने परिवादी से कहा कि काम से पहले 10 लाख दाे तभी फाइल देखूंगा। इसके बगैर काम नहीं हाेगा और बाद की बाद में देखेंगे। एसीबी के अधिकािरयों का कहना है कि अब यह जांच होगी कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। क्या उसके इस नेटवर्क में अन्य अफसर भी शामिल हैं?

27 में से 17 साल बिजाैलिया में ही नौकरी की, इसलिए खनन काराेबारी बिजाैलिया का किंग कहकर बुलाते थे

धार्मिक प्रवृत्ति का दिखावा, पैसाें के बिना काम नहीं... बच्छ अाॅफिस या साेशल मीडिया पर हर बार अलग अंदाज में दिखता। उसे धार्मिक प्रवृत्ति जैसा दिखना पसंद था, लेकिन पैसों के बिना काम नहीं करता था।

बेगूं स्थित घर में एसीबी की कार्रवाई।

बच्छ का परिजन संभालता है खानाें से पैसाें का लेनदेन



संपत्ति
एसीबी ने बच्छ के भीलवाड़ा और बेगंू स्थित निवास पर सर्च की कार्रवाई की। भीलवाड़ा में एसीबी के एएसपी साैभाग्य सिंह और बेगूं में पैतृक निवास पर एएसपी बृजराज सिंह के नेतृत्व में सर्च किया गया। भीलवाड़ा स्थित अारसी व्यास काॅलाेनी में एक लाख 48 हजार रुपए नकद, 38 ताैला साेना, करीब डेढ़ किलाे चांदी के जेवर मिले हैं। बच्छ और उसकी प|ी के नाम बैंक में छह खातों और दो लॉकर के दस्तावेज मिले हैं। एसीबी ने सभी बैंक खाते और लॉकर सीज करवा दिए हैं। गुरुवार को तलाशी हो सकती है। बेगूं में पैतृक निवास के अलावा 8 दुकान संपत्ति के रूप में मिली हैं।



लग्जरी लाइफ, नेताअाें से अच्छे संपर्क, कई के साथ पार्टनरशिप भी...बच्छ का भीलवाड़ा की सबसे पाॅश अारसी व्यास काॅलाेनी में बंगला है। उसकी कई बड़े नेताओं से दाेस्ती है। कई की खानाें में उसकी पार्टनरशिप भी है।

गाेपाल बच्छ 1992 में नाैकरी लगा। 1999 में माइंस फाेरमैन पद पर बिजाैलिया एमई अाॅफिस में ज्वाॅइन किया। 1999 से 2003 तक बच्छ फाेरमैन रहा। 2003 में ट्रांसफर हुअा लेकिन 2005 में फिर बिजाैलिया अा गया। 2009 तक फौरमेन रहा। इसके बाद पद्दाेन्नति हुई अाैर 2009 से 2016 तक एएमई अाैर एमई पद पर काम किया। बच्छ की बिजाैलिया एरिया में अच्छी पकड़ थी। कई रसूखदार लोगों व राजनेताअाें से भी संपर्क हैं। बिजाैलिया के खनन काराेबारियाें में पकड़ (डर) का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि माइंस काराेबारियाें के बीच उसका निक नेम बिजाैलिया का डाॅन अाैर बिजाैलिया का किंग रख दिया। पिछले दिनाें उसकी बिजाैलिया के ही एक बड़े जनप्रतिनिधि से पैसाें के लेन-देन काे लेकर बात बिगड़ने के बाद उसका ट्रांसफर हाे गया लेकिन हकीकत यह है कि माैजूदा अधिकारियाें की जितनी नहीं चलती उतनी बच्छ की अभी भी बिजाैलिया एमई अाॅफिस में धाक थी।

रिश्तेदारों को फायदा
खनिज पट्टा स्वीकृत करने, नामांतरण में भ्रष्टाचार व अनियमितता को लेकर बच्छ के खिलाफ फरवरी में ही एसीबी में एक परिवाद दर्ज हुआ था। शिकायत में बताया था कि निवर्तमान खनिज अभियंता माथुर व बच्छ के साथ ही कार्मिकों ने नया नगर खनन क्षेत्र ए में भूखंड संख्या 366 स्वीकृत कर आवेदक की मूल जाति के साथ ही श्रेणी बदल दी। आवेदक का नाम जलेरी निवासी कंवर लाल बंजारा था, जो ओबीसी है। कांट छांट कर एससी कर अनुचित लाभ पहुंचाया। सुखपुरा ब्लॉक 36 में अनुसूचित जाति के मांगीलाल मीणा के नाम लॉटरी से आबंटित व स्वीकृत खदान 19 जुलाई 1988 से 31 दिसंबर 2011 तक नवीनीकरण है, लेकिन इस खदान काे सामान्य वर्ग की महिला के नाम स्थानांतरित की। महिला अभियंता बच्छ के साले की बहू है। मुख्यालय ने परिवाद दर्ज कर जांच के लिए एसीबी के ब्यूरो कार्यालय भीलवाड़ा को भेज दिया था।



लालची : पैसा देने पर ही फाइल की स्वीकृति... परिवादी श्रवण गुर्जर ने बताया कि उसे पिछले 2 साल से रिश्वत नहीं देने पर ग्रेनाइट खनन की अनुमति नहीं दी जा रही थी। एमई की अाेर से उनसे पैसे के बिना काम नहीं होने को लेकर कहा जा रहा था। जिस पर बच्छ को रिश्वत नहीं देने की ठानी और एसीबी मे शिकायत कर उनको और उनके दलाल साथी को पकड़वाया।

बचता रहा : क्योंकि एक जगह नहीं टिकता था ... एसीबी के एडिशनल एसपी ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि बच्छ पैसे कमाने मंे बड़ा खिलाड़ी है। बहुत चतुराई से अपने कार्य को अंजाम दे रहा था। वह अामेट में नाैकरी करने के साथ-साथ वहां रहता भी था ताे उसका बेंगू, बिजाैलिया अाैर भीलवाड़ा भी अाना-जाना लगा रहता था। आखिरकार वह शिकंजे में फंस ही गया।

गठजोड़
एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने अाया कि बच्छ पैसाें का काफी लालची था। सांठगांठ में ही विश्वास रखता था, इसलिए हर मामले में लेन-देन की बात करता था। रिकाॅर्डिंग में यह भी बात समाने अाई है कि बच्छ परिवादी श्रवण काे कह रहा है कि यह पैसा मैं अकेला नहीं रखता हूं। मुझे इसमें से एक हिस्सा ऊपर के अधिकारियाें के पास भी पहुंचाना हाेता है। बच्छ मूल चित्ताैड़गढ़ जिले के बेगूं का रहने वाला है अाैर अभी अामेट में खनि अभियंता है। इससे पहले वे बिजाैलिया में खनि अभियंता रह चुका है अाैर उनका भीलवाड़ा में भी मकान है। वह भीलवाड़ा अाैर बिजाैलिया में भी रहता है।

रसूख का लाभ
सूत्रों के अनुसार बच्छ की क्षेत्र के सुखपुरा, खड़ीपुर, नयानगर, चंपापुर, छोटी बिजौलियां सहित कई खनन क्षेत्रों में पार्टनरशिप में खाने चल रही हैं। पार्टनरशिप में सीधे बच्छ का नाम नहीं है लेकिन उनका प्रतिशत फिक्स है। उसकी पार्टनरशिप का नया तरीका है। पैसा लगाने के बजाय अाॅफिस के काम अाैर कार्रवाई नहीं हाेने की जिम्मेदारी बच्छ की रहती थी। बच्छ के बिजाैलिया में एमई रहते हुए कई बार भीलवाड़ा एमई का भी अतिरिक्त चार्ज था, लेकिन उसकाे भीलवाड़ा अाॅफिस में ज्यादा रुचि नहीं थी क्याेंकि उसका ज्यादा लेन-देन बिजाैलिया में ही थी। माइंस फाेरमैन गिरिराज मीणा व देशराज मीणा बिजाैलिया अाॅफिस में पदस्थापित थे। गिरिराज का बारां व देशराज का टाेंक तबादला हाे गया था। दाेनाें वहां रिश्वत लेते हुए पकड़े गए थे। कुछ साल पहले एलडीसी गाेविंद पाराशर काे भी एसीबी ने रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।

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