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यह पेंटिंग नहीं... , चावंडिया तालाब के पास पुराने पेड़ की कोचर में बैठा घुग्घू का जोड़ा है, अंधविश्वास इतना कि परिंदों की जान पर बन अाई

Bhilwara News - लोग इसे मनहूस पक्षी बताते हैं। कहते हैं इसका घर की मुंडेर या अासपास पेड़ों पर बोलना किसी की मृत्यु का संकेत या...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST
Bhilwara News - rajasthan news this painting is not there is a pair of knuckles sitting in the old tree39s cot near chavandia pond superstition so much that lives of birds

लोग इसे मनहूस पक्षी बताते हैं। कहते हैं इसका घर की मुंडेर या अासपास पेड़ों पर बोलना किसी की मृत्यु का संकेत या अनिष्टकारी होता है। इसके इतर पुराणों में इसे गरुड़, हंस, मोर की तरह है दस पवित्र पक्षियों में एक बताया हुअा है। धन की अाराध्य देवी लक्ष्मी का वाहन होने से इसे समृद्धि का सूचक बता रखा है।


मनहूस नहीं, दस पवित्र पक्षियों में शामिल


भीलवाड़ा | किसी सधे चित्रकार की कलाकृति लगती यह तस्वीर घुग्घू की है। इसे उल्लू भी कहते हैं। यह परिंदा रात्रिचर है। यानि अाहार-विहार रात में करता है। इसलिए कहते हैं कि जंगल में यह रात का पहरेदार है। चावंडिया तालाब के पास पुराने पेड़ की कोचर के बाहर धूप सेंकने निकला उल्लू का जोड़ा दूर से सूखी-सड़ी लकड़ी का ही हिस्सा लग रहा था। बर्ड फोटोग्राफर पर्यावरणविद डाॅ. अनिल त्रिपाठी बताते हैं कि भीलवाड़ा जिले में इंडियन स्कूप अोवल यानि उल्लू काफी कम नजर अाते हैं। अंधविश्वास ने इनके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया है। जोदू-टोना, तंत्र-मंत्र वाले इसकी पंख, पंजों व चोंच के लिए शिकार करते हैं। इनके ताबीज बनाकर महंगे बेचते हैं।


मूर्ख नहीं, परिंदों में सबसे चतुर

छात्र शिक्षक से अाए दिन उल्लू की संज्ञा पाते हैं। किसी का उपहास करने के लिए उल्लू कह दिया जाता है। एक तरह से यह मूर्ख का पर्यायवाची सा हो गया। लेकिन उल्लू तो काफी चतुर है। वाल्मीकि रामायण में प्रसंग है। राम जब रावण को नहीं मार पाते हैं तब सुग्रीव कहते हैं- राक्षस की उलूक चतुराई से बचना होगा।

हैरीपाॅटर का दोस्त, डाकिया

बच्चों के चर्चित पात्र हैरीपाॅटर का दोस्त अौर डाकिया उल्लू है। वर्ष 2010 में संसद में इसकी संख्या कम होने संबंधी एक सवाल अाया था। जवाब में तत्कालीन वन मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि हैरीपाॅटर की मित्र होने से बच्चे घरों में माता-पिता से उल्लू पालने की जिद करने लगे। इसलिए इनकी संख्या कम हो रही है।

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