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शहर की हवा जांचने के लिए 3 करोड़ से बनेगी लैब मोहल्लों में यंत्र लगाएंगे... स्वास्थ्य पर असर जांचेंगे
औद्योगिक विस्तार एवं वाहनों के दबाव से हवा-पानी प्रदूषित है। प्रदूषण का शरीर पर असर अा रहा है। क्या असर अा रहा है? यह जानने के लिए शहर में वायु गुणवत्ता जांच प्रयाेगशाला शुरू हाे रही है। पुर राेड पर यह प्रतापनगर राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल परिसर में बनेगी।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल इस प्रोजेक्ट पर करीब तीन करोड़ रुपए खर्च करेगा। इसमें बरसात, हवा की गति एवं तापमान के साथ ही हवा में घुले आठ प्रकार के तत्वों की मात्रा की जांच होगी। इसके लिए अलग-अलग काॅलाेनियाें में जांच यंत्र लगाए जाएंगे। रिहायशी इलाके में स्थापित करने से यह पता लगाया जाएगा कि उद्योगों एवं वाहनों से शहर की हवा में क्या परिवर्तन आया है। इसका एक डेटा बैंक तैयार किया जाएगा ताकि शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन अाैर इससे बचाव के उपाय किए जा सके। जिले में वायु गुणवत्ता जांच केंद्र की स्थापना के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने योजना तैयार कर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भेजा है। जहां से स्वीकृति मिलने के बाद मंडल मुख्यालय ने क्षेत्रीय अधिकारी काे जमीन तलाशने के निर्देश दिए हैं।
सीबीईओ से एनओसी का इंतजार... शहर के कई प्रमुख स्थानों के परीक्षण के बाद मंडल ने प्रतापनगर स्कूल परिसर को इसके लिए उपयुक्त माना। मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय ने कलेक्टर को विद्यालय परिसर में केंद्र स्थापित करने लिए जगह मुहैया कराने की स्वीकृति देने के लिए पत्र लिखा। इस पर कलेक्टर ने मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं प्रतापनगर स्कूल प्रिंसिपल को अनापत्ति पत्र देने के निर्देश दिए हैं। विभाग का अनापत्ति पत्र मिलते ही प्रदूषण मंडल वायु गुणवत्ता जांच केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर देगा।
मंडल मुख्यालय ने जिला मुख्यालय पर परिवेशीय वायु गुणवत्ता स्टेशन स्थापित करने के लिए स्थान की उपलब्धता की जानकारी मांगी। इसके बाद प्रतापनगर स्कूल परिसर को उपयुक्त मानते हुए प्रस्ताव भेजा है। शिक्षा विभाग से एनओसी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। महावीर मेहता, आरआे, आरपीसीबी, भीलवाड़ा
किस गैस की ज्यादा मात्रा से शरीर पर क्या असर
{ पीएम-10 एवं पीएम-2.5 हवा में अति महीन कण होते हैं जो आखों से दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे प्रदूषक तत्व श्वांस नली से फेफड़ों में पहुंचकर शरीर के जैविक तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं। जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां हाेती हैं।
{ ओजोन की हवा में ज्यादा मात्रा में होने पर कफ व सीने में दर्द हाेता है।
{ सल्फर डाई ऑक्साइड श्वसन प्रणाली की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
{ नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा ज्यादा हाेने पर बच्चों की श्वसन नली में इंफेक्शन की शिकायत रहती है।
{ कार्बन मोनो आक्साइड की ज्यादा मात्रा होने पर खून में मिलकर जहरीला असर करती है। इससे माैत भी हाे सकती है। इसकी हिमोग्लोबिन से जुड़ने की मात्रा आक्सीजन के मुकाबले 200 गुना अधिक होती है।
प्रदेश में इन आठ स्थानों
पर है लैब
प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से वायु गुणवत्ता जांच केंद्र जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, भिवाड़ी, अलवर व पाली में अभी लगा रखी है।
भीलवाड़ा औद्योगिक शहर है। यहां 19 प्रोसेस हाउस के अलावा करीब डेढ़ हजार अन्य औद्योगिक इकाइयां हानिकारिक रसायनों वाला धुओं उत्सर्जित करती है। नवंबर, 2019 की रिपाेर्ट के अनुसार जयपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूअाई) का स्तर 417 अाैर प्रदेश में सबसे भिवाड़ी शहर में 500 एक्यूअाई है। दिल्ली में वायु प्रदूषण 708 एक्यूअाई था। इससे पहले 6 नवंबर 2016 काे यह 497 तक पहुंचा था। एक्सपर्ट के मुताबिक पीएम 2.5 का स्तर 22 रहने पर यह एक सिगरेट के बराबर है। यदि कोई 24 घंटे 500 एक्यूआई में रहे तो 22 सिगरेट पीने के बराबर होगा। औसत एक्यूआई 497 का मतलब लोग एक दिन में 22 सिगरेट तथा जयपुर में औसत एक्यूआई 303 का मतलब लोग करीब 14 सिगरेट जितना धुआं निगल रहे हैं। पीएम 2.5 का स्तर 1000 जाने पर यह 45 सिगरेट के बराबर हाेगी। एक्यूअाई 0 से 50 के बीच अच्छा, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101-200 के बीच हल्का या सामान्य, 201 से 300 खराब, 301-400 बहुत खराब, 401-500 गंभीर अाैर 500 से ऊपर ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है।
{जरूरत इसलिए...19 प्रोसेस हाउस और डेढ़ हजार अन्य फैक्ट्रियां रोज उगल रहीं काला धुआं
इसलिए किया प्रतापनगर स्कूल परिसर का चयन...वायु गुणवत्ता जांच केंद्र स्थापित करने के लिए पुर रोड स्थित प्रताप नगर विद्यालय का चयन इसके रिहायशी इलाके में संचालित होने के कारण किया गया। साथ ही इसके आस-पास ऊंची बिल्डिंग नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिसर के दूर तक बड़े- घने पेड़ पौधे नहीं होने से हवा व प्रकाश सीधा इस स्टेशन पर रहेगा। सड़क की दूरी भी कम से कम 100 मीटर होना आवश्यक होने के कारण मंडल के इंजीनियर्स ने स्कूल परिसर काे सबसे उपयुक्त माना है।
अाॅनलाइन-अत्याधुनिक उपकरण लगेंगे...वायु गुणवत्ता जांच केंद्र स्थापित करने में करीब तीन करोड़ रुपए लागत आएगी। यह लैब अत्याधुनिक उपकरणाें के साथ पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। इसमें तापमान, हवा की गति, वर्षा एवं वातावरण में दबाव जैसे मौसमी घटकों की जांच होगी। वायु की गुणवत्ता, पीएम-10, पीएम-2.5, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कॉर्बन मोनो आक्साइड, ओजोन गैस, हवा में घुले मिश्रित कार्बन जिनमें बैंजिन, टॉल्यूइन व जाइलीन की मात्रा की जांच होगी।