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उदयपुर-अजमेर के बीच बिजली ट्रैक को सीआरएस की हरी झंडी, इसी माह 110 किमी स्पीड से ट्रेनें चलना संभव

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | भीलवाड़ा

जिले के लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। अजमेर और उदयपुर के बीच इसी महीने इलेक्ट्रिक ट्रेन में सफर कर सकेंगे। ट्रैक को विद्युतीकृत कर दिया है। डेट से उदयपुर के बीच केवल 24 किलोमीटर ट्रैक का रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) निरीक्षण बाकी था। यह निरीक्षण सोमवार को पूरा हो गया।

सीआरएस मुंबई सुरेशचंद्र ने टीम के साथ निरीक्षण के बाद ट्रैक को हरी झंडी दे दी है। यानि उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन सुरक्षित बता दिया है। इसके साथ ही चित्तौड़गढ़, उदयपुर व अजमेर के वरिष्ठ अधिकारी इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन में जुट गए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मार्च में ही इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने का प्रयास रहेगा। वर्तमान में इस ट्रैक पर अधिकतम 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गाड़ियां चलती हैं। इलेक्ट्रिक ट्रेन की अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा तक की जा सकेगी।

अभी 80 किमी प्रतिघंटा ही चलती हैं गाड़ियां, स्पीड बढ़ने से आने-जाने का समय होगा कम

 क्या अजमेर-उदयपुर के बीच पूरे रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण हो गया है?

 सोमवार को उदयपुर से देबारी, डेट से चंदेरिया और चंदेरिया से चित्तौड़गढ़ खंड कुल 24 रूट किलोमीटर विद्युतीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उदयपुर के समीप देबारी स्टेशन से चित्तौड़ के समीप बैराच स्टेशन का निरीक्षण पहले ही कर लिया गया था। अजमेर से डेट तक भी विद्युतीकरण पहले ही पूरा हो गया था।

 विद्युतीकरण का अब क्या काम बाकी है?

 पश्चिम परिमंडल मुंबई के रेल संरक्षा आयुक्त सुरेशचंद्र ने सोमवार को निरीक्षण किया। यह काम विद्युतीकरण विंग का था। अब यह विंग ओपन लाइन विंग को रिपोर्ट सबमिट करेगी। इलेक्ट्रिक ट्रैक कब चलेगी यह तय करना ओपन लाइन विंग का काम है।

 कहां से कहां तक चलेगी?

 उदयपुर-अजमेर रेल खंड के विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इसके निरीक्षण से शेष रहे ट्रैक का सोमवार को ट्रायल लेने के बाद सीएसआर ने पूरे खंड के इलेक्ट्रिफिकेशन कार्य को ओके कर दिया है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने उदयपुर से अजमेर मार्ग पर इसी महीने से इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलने के संकेत भी दिए हैं।

 अब तक क्या स्थिति थी?

 सोमवार को उदयपुर से चंदेरिया तक विद्युत इंजन से स्पीड ट्रायल ली गई। प्रति घंटा 110 किमी की गति से यह ट्रायल सफल रही। चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा से जुड़े चारों रेल मार्गों पर वर्तमान में डीजल इंजन से ट्रेनें चल रही हैं। जिनकी गति लगभग 80 किमी प्रति घंटा रहती है। उदयपुर-अजमेर के बीच इलेक्ट्रिक इंजन चलने पर इनकी गति 110 तक हो जाएगी।

 अब ट्रैक पर कोई दिक्कत तो नहीं आएगी?

 शुरुआती दिनों में गाड़ियां कुछ कम रह सकती हैं। हालांकि कुछ छोटी-मोटी खामियां पाई गई जिसे दो चार दिन में पूरा करने के निर्देश दिए गए। वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी रेलवे विद्युतीकरण जयपुर महेश चंद्र शर्मा के अनुसार रेल संरक्षा आयुक्त सुरेश चन्द्रा ने इस नए विद्युत रेल मार्ग पर ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी है। अभी इसकी तारीख घोषित नहीं की है। निरीक्षण के दौरान मुख्य परियोजना निदेशक, रेल विद्युतीकरण जयपुर हरीशचंद्र मीणा, उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर आरके अटोलिया, डीआरएम अजमेर राजेश कश्यप, मुख्य संकेत इंजीनियर ओपी मेहरा, मुख्य विद्युत एवं वितरण इंजीनियर एसएन खींची आदि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल रहे।

देर से चलीं गाड़ियां

चित्तौड़ व आसपास के स्टेशनों पर विद्युतीकृत ट्रैक के निरीक्षण के चलते सोमवार को चित्तौड़गढ़ की तरफ से आने वाली सभी गाड़ियां देर से भीलवाड़ा पहुंची। इंदौर- जोधपुर एक्सप्रेस को भीलवाड़ा स्टेशन पर सुबह 11 बजे आना था, इसकी जगह 3.30 बजे पहुंची। मदार जंक्शन पैसेंजर ढ़ाई घंटे देरी से पहुंची। इसी तरह कोलकाता से आने वाली ट्रेन तीन घंटे, हरिद्वार जाने वाले ट्रेन करीब सवा घंटा देरी से आई। चेटक एक्सप्रेस पौन घंटे देर से आई। ट्रेनों के देर से चलने के कारण यात्री परेशान हुए।

सीआरएस निरीक्षण के लिए आई ट्रेन।

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