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दस संसदीय सचिवों को देने पड़ सकते हैं इस्तीफे

संसदीय सचिव कैलाश वर्मा, डाॅ. विश्वनाथ मेघवाल, सुरेश रावत, ओम प्रकाश हुड़ला, भीमा भाई डामोर, लादू राम विश्नोई,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:30 AM IST

संसदीय सचिव कैलाश वर्मा, डाॅ. विश्वनाथ मेघवाल, सुरेश रावत, ओम प्रकाश हुड़ला, भीमा भाई डामोर, लादू राम विश्नोई, शुत्रघ्न गौतम, नरेंद्र नागर, जितेंद्र गोठवाल व भैराराम सियोल को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ सकता है। राजस्थान हाईकोर्ट में उनकी नियुक्ति को तत्काल रद्द किए जाने को लेकर एक याचिका विचाराधीन है। जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है। राज्य सरकार को अपना जवाब रखना है। महाधिवक्ता नरपतमल लोढ़ा ने भास्कर से बातचीत में कहा कि वे कोर्ट में सरकार की तरफ से अपनी बात रखेंगे। निर्णय कोर्ट को करना है।

तर्क दिया जा रहा है कि देश में मंत्रिमंडल की तय सीमा से बाहर जाकर 10 संसदीय सचिव बनाए गए हैं। संविधान के आर्टिकल 164 (1ए) के मुताबिक राज्यों की विधानसभा में कुल विधायकों के 15 प्रतिशत और न्यूनतम 12 मंत्री रह सकते हैं। भारत के संविधान के बिजनेस रूल्स में संसदीय सचिवों को मंत्री माना गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित 30 मंत्री और 10 संसदीय सचिव हैं। इन संसदीय सचिवों को राज्यमंत्री का दर्जा और उनके समान वेतन भत्तों की सुविधाएं दी जा रही हैं। शेष | पेज 8

अब क्या होगा?

कानून के हिसाब से संसदीय सचिवों की नियुक्ति अवैध है। मौजूदा संसदीय सचिवों को राज्यमंत्री का दर्जा मिला हुआ है। इन्हें राज्यमंत्रियों के समान ही स्टॉफ, वाहन, टेलीफोन, बिजली-पानी व वेतन भत्ते दिए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से संसदीय सचिवों को हटना पड़ेगा नहीं तो इनकी सदस्यता भी जा सकती है।

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