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सदन में कमजोर पैरवी के कारण भीनमाल समेत 307 गांवों के लोग कर रहे मीठे पानी का इंतजार

Bhinmal News - इस वर्ष के अंत तक प्रदेश की इस सरकार का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा, लेकिन नर्मदा के मीठे पानी की ताक में बैठे भीनमाल...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
सदन में कमजोर पैरवी के कारण भीनमाल समेत 307 गांवों के लोग कर रहे मीठे पानी का इंतजार
इस वर्ष के अंत तक प्रदेश की इस सरकार का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा, लेकिन नर्मदा के मीठे पानी की ताक में बैठे भीनमाल शहर समेत जिले के 307 गांवों के लोगों की उम्मीद अब भी पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। दरअसल, नर्मदा परियोजना के तहत ईआर प्रोजेक्ट का कार्य तीन वर्ष में पूरा करना था, लेकिन साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी आधा कार्य ही हो सका है। इतना ही नहीं इतने कार्य में आधी से भी कम राशि खर्च की गई है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि विधायकों की कमजोर पैरवी के कारण ईआर कलस्टर प्रोजेक्ट को अभी तक स्वीकृति भी नहीं मिल पाई है। ऐसे में ईआर प्रोजेक्ट का कार्य पूरा हो जाएगा तो भी अपेक्षित ग्रामीणों को मीठा पानी नहीं मिल पाएगा।

307 गांवों को मिलना है इस प्रोजेक्ट के तहत पानी : दरअसल, सांचौर से रामसीन तक मुख्य पाइपलाइन का जो कार्य किया जा रहा है। वह 377 करोड़ रुपए का कार्य ईआर प्रोजेक्ट के तहत है, लेकिन इसमें से अभी तक केवल 170 करोड़ रुपए की राशि ही खर्च की गई है। यह कार्य तीन वर्ष में पूरा करना था। निर्धारित अवधि से करीब छह महीने ऊपर होने को हैं, लेकिन आधा कार्य ही हो पाया है। हालांकि, सरकार के नुमाइंदे इस वर्ष में अक्टूबर से पहले तक ईआर प्रोजेक्ट पूरा करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी कलस्टर प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के अभाव में ग्रामीण मीठे पानी से वंचित ही रहेंगे।

ईआर प्रोजेक्ट का निर्धारित समय तक आधा कार्य ही हो सका, 377 करोड़ का है पूरा प्रोजेक्ट


जालोर. ईआर प्रोजेक्ट के तहत भीनमाल क्षेत्र में किया जा रहा कार्य। फोटो| भास्कर

प्रोजेक्ट को अभी तक नहीं मिली स्वीकृति

सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि कलस्टर प्रोजेक्ट को अभी तक मंजूरी भी नहीं मिली है। स्वीकृति के अभाव में अगर ईआर प्रोजेक्टर का कार्य पूरा भी हो गया तो भी दर्जनों गांवों में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन भी नहीं है, ऐसे में उन गांवों के ग्रामीणों के लिए तो मीठा पानी सपना ही रहेगा। इस प्रोजेक्टर में 307 गांव शामिल है। जिसमें से भीनमाल शहर के साथ-साथ करीब सौ से अधिक गांव भीनमाल विधानसभा क्षेत्र के हैं, तो 22 गांव आहोर के हैं। रानीवाड़ा व जालोर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों को भी इस प्रोजेक्ट के तहत मीठा पानी उपलब्ध करवाया जाना है, लेकिन अभी तक ईआर कलस्टर प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।


आहोर विधायक ने सदन में आवाज उठाई तो मंत्री बोले क्रियान्वयन होने पर ही गांवों को मिल सकेगा पानी

ईआर कलस्टर मामले को लेकर आहोर विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित ने ही विधानसभा में शून्यकाल में मामला उठाया। जिसके जवाब में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने विधानसभा में बताया था कि जालौर जिले के नर्मदा ईआर परियोजना का कार्य 48 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य अक्टूबर 2018 तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। गोयल ने शून्यकाल में उठाए गये मुद्दे पर हस्तेक्षप करते हुए कहा था कि डेडवा गांव पर पम्प हाउस तथा पालड़ी सोलंकिया पर 100 एमएलडी क्षमता का फिल्टर प्लांट बनाकर रामसीन तक 144 किमी. राइजिंग मुख्य 5 पम्पिंग स्टेशनों का कार्य प्रगति पर है। इसमें से लगभग 48 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य अक्टूबर 2018 तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही उन्होंने बताया कि उक्त आधारभूत ढांचे से प्राप्त जल को वितरण करने के लिए उच्च जलाशय व वितरण प्रणाली विकसित करने के लिए 449.82 करोड़ रुपए की लागत की क्लस्टर योजना तैयार की गई है, जिसे वित्त पोषण के पश्चात क्रियान्वित किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि उक्त योजना के क्रियान्वयन के बाद ही आहोर विधानसभा क्षेत्र के रामसीन से बागरा तक 22 गांवों को भी लाभान्वित किया जाना संभव हो पाएगा।



हम पूरा प्रयास कर रहे हैं


हमारे कार्य को भी पूरा नहीं कर सके


जो नजदीकी गांव होंगे उन्हें लाभ मिल सकेगा


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