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जाकोब तालाब : दो साल पहले गंदगी के कारण लोग आते भी नहीं थे, युवाओं ने सूरत बदली तो बना पिकनिक स्पॉट

करीब दो वर्ष पूर्व जाकोब तालाब की स्थिति इतनी दयनीय थी कि लोग यहां आना ही पसंद नहीं करते थे लेकिन वर्तमान में इस...

Dainik Bhaskar

Apr 04, 2018, 02:30 AM IST
जाकोब तालाब : दो साल पहले गंदगी के कारण लोग आते भी नहीं थे, युवाओं ने सूरत बदली तो बना पिकनिक स्पॉट
करीब दो वर्ष पूर्व जाकोब तालाब की स्थिति इतनी दयनीय थी कि लोग यहां आना ही पसंद नहीं करते थे लेकिन वर्तमान में इस तालाब की भामाशाहों व शहरवासियों के सहयोग से तालाब की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। निजी संस्थाओं, भामाशाहों व ट्रस्ट के सहयोग से अब इसकी कायापलट हो गई है।

एक समय जाकोब तालाब की पाल पर बड़ी तादाद में झाडिय़ां हुआ करती थी। दूर-दूर तक झाडिय़ों के कारण कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था। लोग तालाब में कचरा डाल रहे थे लेकिन पिछले दो साल में भामाशाहों के सहयोग से यहां इतना सौंदर्यीकरण करवाया गया है कि अब इसकी तस्वीर ही पलट गई है। अब यहां घाट, बगीचे, बच्चों के लिए झूले आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। यूथ फॉर नेशन संस्था के कार्यकर्ताओं की लगन का ही नतीजा है यह अब पर्यटन के रूप में विकसित होता जा रहा है। सहयोग के चलते वन विभाग ने यहां पौधे लगवाए तो विद्युत विभाग ने रोशनी की व्यवस्था की है।

बावड़ी देखकर घबरा गए थे



भामाशाहों व यूथ फॉर नेशन के कार्यकर्ताओं के सहयोग से बदली जाकोब तालाब की तस्वीर, हरी-भरी नजर आ रही तालाब की पाल, सैर-सपाटे के लिए पहुंच रहे शहरवासी

भीनमाल. दादेली बावड़ी से लिया गया जाकोब तालाब का नजारा। फोटो | भास्कर

60 कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई


भामाशाहों व ट्रस्ट ने भी करवाए कार्य

जाकोब तालाब की दुर्दशा देख स्थानीय भामाशाहों ने भी इसकी स्थिति में सुधार को लेकर जिम्मेदारी उठाई। जहां नाहर ट्रस्ट ने तालाब की खुदाई, पाल की पिचिंग, बगीचों का निर्माण सहित कई कार्य करवाए, वहीं नीम गोरिया ट्रस्ट ने अति प्राचीन नीमगोरिया खेतलाजी मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण के काम करवाया। खेतलाजी का मंदिर अति प्राचीन होने से यहां रोजाना दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते है।

यूथ फॉर नेशन संस्था के मीडिया प्रभारी ललित होंडा ने बताया कि संस्था के 60 कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत रंग लाई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत यहां उगी बबूल झाडिय़ों की कटाई का कार्य चल रहा था तो संस्था के कार्यकर्ताओं ने अति प्राचीन व ऐतिहासिक दादेली बावड़ी का कायाकल्प करने की ठानी। अगस्त 2016 में करीब दो माह तक लगातार कार्यकर्ताओं ने बावड़ी में उतर कर साफ-सफाई का कार्य किया। कार्यकर्ता किशोर सांखला बताया कि दादेली बावड़ी सफाई करने के दौरान कार्यकर्ताओं को काफी मेहनत करनी पड़ी क्योंकि लंबे समय से यह तालाब कचरे व झाडिय़ों से अटा पड़ा था।


नगरपालिका की अनदेखी पड़ रही भारी

भामाशाह व ट्रस्ट ने तो लाखों रुपए खर्च कर जाकोब तालाब में विकास कार्य करवा दिए मगर नगरपालिका की अनदेखी के चलते इस तालाब में धोराढ़ाल के कई मौहल्लों का गंदा पानी नाले के जरिए आता है। इस वजह से यह पानी हर समय बदबू मार रहा है। मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालु भी इससे परेशान रहते हैं फिर भी पालिका ने जाकोब तालाब में पहुंचने वाले गंदे पानी को लेकर नाले का विकास नहीं करवाया है।

बन गया पिकनिक पॉइंट

जाकोब तालाब की पाल पर राणेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है जिसके आसपास पहले झाडिय़ां उग आई थी। भामाशाहों के सहयोग के बाद अब यहां पिकनिक स्थल बन गया है। मंदिर के आसपास हरा-भरा बगीचा बनाया है जिसमें सुबह-शाम शहरवासी सैर के लिए आते हैं। वहीं बच्चों के लिए बगीचे के अंदर झूले लगे होने से बच्चे दिनभर यहां खेल आनंद उठा रहे हैं। खेतलाजी मंदिर के पास, दादेली बावड़ी के पास दो बड़े बगीचों में लोगों के बैठने के लिए कई बैंच भी लगाए गए हैं।

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