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होटल-ढाबों पर बच्चों से करवा रहे मजदूरी, विभाग नहीं दे रहा ध्यान

प्रशासन की अनदेखी के चलते शहर में कई जगह बालश्रम हो रहा है। कई होटलों व ढाबों पर 10 से 15 साल के बच्चे बेरोकटोक दिहाड़ी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 10, 2018, 02:35 AM IST

प्रशासन की अनदेखी के चलते शहर में कई जगह बालश्रम हो रहा है। कई होटलों व ढाबों पर 10 से 15 साल के बच्चे बेरोकटोक दिहाड़ी मजदूरी कर रहे है। प्राइवेट व रोडवेज बसों में पानी की बोतलें, नाश्ता इत्यादि बेचते ये बच्चे अक्सर नजर आते है। मजदूरी का झांसा देकर बाल श्रमिकों से कठोर श्रम करवाया जाता है। इतना ही नहीं चल रहे विभिन्न निर्माण कार्य पर भी ठेकेदार नियमों को ताक में रखकर बालश्रमिकों से काम करवा रहे है। इतना कुछ होने के बाद भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है। निरीक्षण के नाम पर मात्र औपचारिकता की जाती है, लेकिन यह बाल श्रमिक उन्हें नजर नहीं आते है। खासकर शहरी क्षेत्र में स्थानीय बाल श्रमिकों के साथ-साथ उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश के बच्चें बालश्रम से जुड़े हुए है। इन बाल श्रमिकों से महज कुछ ही मानदेय का वादा कर कठोर श्रम करवाया जाता है। सरकार भले ही कानून बनाकर बालश्रम को लेकर काफी सख्त है, लेकिन यह कानून धरातल पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। इन कार्यों में अधिकांश गरीब परिवार के बच्चें दिहाड़ी मजदूरी कर रहे है।

करवाते है कठोर श्रम : मात्र कुछ ही मजदूरी का झांसा देकर यह लोग बाल श्रमिकों से कठोर श्रम भी करवाते है। कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी व्यवसाय में नियुक्त करना या किसी भी तरह का श्रम करवाना अपराध की श्रेणी में आता है ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का प्रावधान भी है। इसके बावजूद यहां पर इन आयु के बच्चों को अल्प मानदेय का झांसा देकर दिहाड़ी मजदूरी करवाई जा रही है। उन्हें दिनभर मजदूरी के 140 से 170 रुपए दिए जा रहे है। इनसे कार्य करवाने वालों का कहना है कि मजदूर नहीं मिलने से इन्हें ही काम दे रहे है। क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी व कठोर श्रम करने वाले अधिकांश बालश्रमिक अन्य जिलों व राज्यों के है जिसमें उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश के बच्चे भी निर्माण के कार्यों में लगे हुए है।

नहीं होती कार्रवाई

क्षेत्र में बालश्रम करवाने वाले लोगों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं होती है ऐसे में बाल श्रमिकों की संख्या में भी हर साल इजाफा होता जा रहा है। क्षेत्र में निर्माणाधीन इमारतों व अन्य कार्यों पर बालश्रम धड़ल्ले से चल रहा है। बालश्रम में जुटे बालक व किशोर विद्यालय की चौखट से दूर है। खास बात तो यह है कि बालश्रम चोरी छिपे तो कई जगह होता है, लेकिन शहर में सड़कों पर खुलेआम बालश्रम हो रहा है। यहां से दिनभर में कई अधिकारियों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद इनकी नजरे बालश्रमिकों पर नहीं पहुंच रही है।

कार्रवाई की जाएगी

भीनमाल में अगर 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे किसी प्रतिष्ठानों या होटलों में कार्य कर रहे है तो संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त करवाया जाएगा। इससे पहले भी हमने कार्रवाई कर बाल श्रमिकों को मुक्त करवाया था। हर तहसील स्तर पर हमारी समिति बनी हुई है। तहसील स्तर पर समिति ही कार्य करती है। -डूंगरराम, श्रम निरीक्षक, जालोर

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