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लोग नहीं भूल पा रहे बाढ़ का मंजर, पीएम आवास की किश्त मिलने के बाद भी नहीं बना रहे मकान

वर्ष 2015 व 2017 में आई बाढ़ का कहर लोग अब भी नहीं भूल पा रहे हैं। लोगों की आंखों से बाढ़ का वो भयावह मंजर अब भी नजरों से ओझल...

Danik Bhaskar | Feb 28, 2018, 03:40 AM IST
वर्ष 2015 व 2017 में आई बाढ़ का कहर लोग अब भी नहीं भूल पा रहे हैं। लोगों की आंखों से बाढ़ का वो भयावह मंजर अब भी नजरों से ओझल नहीं हो रहा है क्योंकि उस दौरान उनके अपने पक्के मकान तक पानी के साथ बहकर चले गए थे।

ऐसा ही वाकया निकटवर्ती पूनासा गांव का है जहां तीन परिवार ऐसे हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना मकान बनाना तो चाहते है लेकिन उनको यह चिंता खाए जा रही है कि अगर वे दोबारा उसी जगह पर मकान बनाएंगे जहां पहले बाढ़ आई थी तो मकान कभी भी चपेट में आ सकते हैं। मगर अब कुछ हो नहीं सकता क्योंकि उनके पास मकान बनाने के लिए दूसरी कोई जमीन नहीं है। वर्ष 2017 में आई बाढ़ के बाद से यह तीनों परिवार गांव में अस्थाई तौर पर निवास कर रहे हैं।

पानी में बह गया था मेटेरियल : दरअसल पूनासा गांव के फगलु भील, भागु देवी भील, मंशाराम भील ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। अप्रेल 2017 में मकान निर्माण के लिए तीनों को प्रथम किश्त जारी हो गई थी ऐसे में उन्होंने प्रथम किश्त के पैसों से मेटेरियल डलवाकर कार्य शुरू करवाया था। जुलाई 2017 में पूनासा क्षेत्र में बाढ़ आने से निर्माण कार्य भी चपेट में आ गए थे। मकान निर्माण के लिए रखा मेटेरियल पानी में बह गया था। इसके बाद से ही वे अस्थाई तौर पर गांव में ही निवास कर रहे हैं।

2017 की बाढ़ के बाद से यह परिवार गांव में अस्थाई तौर पर रह रहे हैं

भीनमाल. पूनासा के एक खेत में बाढ़ से जलमग्न हुआ खेत। -फाइल फोटो

दर्जनों गांवों में २०१५ व २०१७ में आई थी बाढ़

भीनमाल के निकटवर्ती दांतीवास, भागलभीम, निंबावास, किरवाला, नोहरा, पूनासा, वाड़ाभाड़वी, फोगोतरा, वनु की ढ़ाणी सहित दर्जनों गांवों में २०१५ व २०१७ में बाढ़ आई थी इसके बाद दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के मकान पानी के साथ बह गए थे। बाढ़ से कई दिनों तक गांवों का शहर से संपर्क कट गया था। कई गांवों में हालात इतने विकट हो गए थे हेलीकॉप्टर की सहायता से निकाला गया था। वर्ष २०१७ में आई बाढ़ से दांतिवास गांव में निंबाराम भील (15) व पूजा भील (9) की खोली की ढाणी में अचानक ही बारिश का पानी आने से उनकी डूबने से मौत हो गई थी। अन्य गांवों में भी बाढ़ से जान-माल का नुकसान हुआ था।

जांच करवाई जाएगी


बाढग़्रस्त जमीन पर नहीं बना रहे मकान