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मिलन बिश्नोई ने किन्नर समाज पर शोध कर तमिलनाडु में हासिल किया गोल्ड मेडल .... वाड़ा भाड़वी की सरकारी स्कूल से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2018, 03:55 AM IST

मिलन बिश्नोई ने किन्नर समाज पर शोध कर तमिलनाडु में हासिल किया गोल्ड मेडल ....

वाड़ा भाड़वी की सरकारी स्कूल से सीनियर करने वाली मिलन बिश्नोई ने किन्नर समाज पर शोध कर तमिलनाडु में हासिल किया गोल्ड मेडल


शादी के बाद अक्सर जो बेटियां शिक्षा से नाता तोड़ देती है, उनके लिए जिले की वाड़ा भाड़वी निवासी एक बेटी मिलन बिश्नोई ने बड़ा उदाहरण पेश करते हुए दक्षिण भारत में जिले समेत प्रदेश का नाम रोशन किया है। शुरुआती से लेकर सीनियर तक की पूरी शिक्षा सरकारी स्कूल में लेने के बाद स्नातक की डिग्री भी भीनमाल की सरकारी कॉलेज से की। उसके बाद शादी हो गई, लेकिन मिलन ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इतना ही नहीं शोध के लिए चयनित किया गया विषय भी बड़ा कठिन था, लेकिन मिलन ने मेहनत करते हुए इस पर गहन अध्ययन किया। जिस कारण उसे स्वर्ण पदक से नवाजा गया।

इंजीनियर पति के साथ रहते हुए जारी रखा अध्ययन

यूं तो मिलन के पिता जगराम विश्नोई सरकारी सेवा में शिक्षक है, लेकिन मिलन की शिक्षा उन्होंने सरकारी संस्थाओं में ही करवाई। स्नातक की डिग्री के बाद मिलन की शादी हो गई। मिलन के पति अरविंद बिश्नोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, वे दक्षिण भारत में कार्यरत है। जिस कारण मिलन ने पति के साथ रहते हुए पढ़ाई जारी रखी। जहां उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद से हिंदी साहित्य विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में केन्द्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु से पीएचडी कर रही है। जहां उन्होंने ‘मैं हिजड़ा... मैं लक्ष्मी-किन्नर विमर्श’ विषयक हाशियाकृत किन्नर समाज पर अपना लघु शोध कार्य पूर्ण किया है।

शादी के बाद भी पढ़ाई जारी रखी, इंजीनियर पति के साथ रहते हुए तमिलनाडु में किन्नर समाज पर शोध किया, राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में दिया स्वर्ण पदक

राज्यपाल ने मिलन को स्वर्ण पदक से नवाजा

हाल ही में दक्षिण भारत के लब्धप्रतिष्ठ हिंदी शिक्षण संस्थान ‘दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास’ में 81वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। जिसमें तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने मिलन बिश्नोई को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि जालोर जिले के एक छोटे से गांव की राजकीय विद्यालय में अध्ययन करने वाली मिलन ने राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में सहभागिता करने के साथ कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में आलेख एवं काव्य रचनाएं भी प्रकाशित हो चुकी है। मिलन बिश्नोई ने बताया कि वह अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभावकों और शोध निर्देशिका डॉ बलविंदर कौर को देती है। मिलन ने कहा कि वे हाशियाकृत पिछड़े समाज एवं बालिका शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक कार्य करना चाहती है।

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर है लक्ष्मी

मिलन बिश्नोई ने जिस शोध विषय में जिस लक्ष्मी किन्नर को शामिल किया है, वह लक्ष्मी किन्नर ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए संघर्षरत रही। उसके बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उज्जैन सिंहस्थ में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर घोषित किया गया। बताया जाता है कि उन्हें देश के लगभग 20 लाख किन्नरों की सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया है। लक्ष्मी ने पर्यावरण संरक्षण, गोरक्षा, कन्या भू्रण हत्या का विरोध और बाल विवाह रोकने के लिए काम किए जा रहे हैं। आपको बता दें कि जालोर जिले की एक किन्नर गंगाकुमारी ने पुलिस कांस्टेबल में चयनित होकर समाज के सामने एक नया उदाहरण पेश किया है।

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