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कई गांवों में नहीं लग पाए आरओ प्लांट, टेंडर समयावधि पूरी होने पर कार्य बीच में ही छोड़ चली गई कंपनी

Dainik Bhaskar

May 27, 2018, 02:05 AM IST

Bhinmal News - भास्कर न्यूज | गुडा बालोतान कस्बे समेत आहोर तहसील के करीब 10 गांवों में वर्ष 2017-18 के दौरान आरओ प्लांट लगाने की...

कई गांवों में नहीं लग पाए आरओ प्लांट, टेंडर समयावधि पूरी होने पर कार्य बीच में ही छोड़ चली गई कंपनी
भास्कर न्यूज | गुडा बालोतान

कस्बे समेत आहोर तहसील के करीब 10 गांवों में वर्ष 2017-18 के दौरान आरओ प्लांट लगाने की निविदा लेने वाली दिल्ली की फॉन्टस कम्पनी निर्धारित समयावधि 31 मार्च 2018 तक गांवों में आरओं प्लांट नहीं लगा पाई और कम्पनी आधा अधूरा काम छोड़कर चली गई। जिससे कस्बे समेत आहोर तहसील के करीब आठ दस गांवों में आधा अधूरा काम छोड़कर कंपनी के ठेकेदार चलते बने। जिससे गांवों के ग्रामीणों को आरओं प्लांट से मिलने वाला फ्लोराइड मुक्त शुद्ध पानी का सपना बनकर रह गया है। गौरतलब है कि दिल्ली की फॉन्टस कम्पनी की ओर से वर्ष 2017-18 के दौरान जालोर जिले के विभिन्न 95 गांवों में आरओ प्लांट निर्धारित समयावधि 31 मार्च 2018 तक लगाए जाने प्रस्तावित थे। लेकिन दिल्ली की कम्पनी की ओर से निविदा खोलने के दौरान सबसे कम रेट भरे जाने पर सरकार की ओर से उसे अधिकृत किया गया था। निविदा लेने वाली अन्य कम्पनियों ने दिल्ली की फॉन्टस कंपनी से ज्यादा रेट भरी थी तथा कम्पनी की ओर से वर्ष 2017 के दौरान टेंडर लेने के बाद 31 मार्च 2018तक आरओ प्लांट नहीं लगाए गए। हालांकि कम्पनी की ओर से जिले के 95 गांवों में से करीब आठ दस गांवों में औपचारिकता के नाम पर आरओ प्लांट के लिए प्लेटफार्म जरूर बनवाए गए है। लेकिन दिल्ली की कम्पनी द्वारा अभी तक जिलेभर में एक भी आरओ प्लांट नहीं लगाया गया है। इसके बारे में जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों से बातचीत करने पर सामने आया कि गांवों में आधा अधूरा काम छोड़ने वाली कम्पनी को जब आरओ प्लांट लगाने ही नहीं थे तो प्लेटफार्म क्यों बनवाए। तब सामने आया कि निविदा लेने वाली कम्पनी अगर थोड़ा बहुत काम भी नहीं कर पाती है तो उसे भविष्य में टेंडर लेने की अनुमति नहीं दी जाती है। इसके चलते कम्पनी के ठेकेदार की ओर से समयावधि बीत जाने के बावजूद भी अप्रैल मई माह के दौरान औपचारिकता के नाम पर ये प्लेटफार्म बनाए गए है। अब इस प्लेटफार्म पर नया टेंडर लेने वाली दूसरी कम्पनी आकर ही आरओ प्लांट लगा सकेगी।

जिलेभर में अभी तक करीब १५४ गांवों में लग चुके है आरओ प्लांट : जालोर जिले में करीब १५४ गांवों में आरओ प्लांट लगाए जा चुके है। जिन गांवों में भी आरओ प्लांट लगाए गए है उसके मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी आरओ प्लांट लगाने वाली कम्पनी की है। वर्ष २०१४-१५ के दौरान वॉटर राईट कम्पनी हैदराबाद की ओर से टेंडर लेकर जालोर, सांचौर व भीनमाल तहसील के करीब ४० गांवों में आरओ प्लांट लगाए थे। जिसमें से वर्तमान में करीब आठ या दस आरओ प्लांट की चालू हालत में है। शेष सभी बंद पड़े हुए है। वॉटर राईट कम्पनी हैदराबाद की ओर से गांवों में लगाए गए आरओ प्लांट से पानी लेने पर ग्रामीणों को मात्र दस पैसे प्रतिलीटर की दर से पानी उपलब्ध करवाया जाता था। पैसे का लेनदेन कंपनी की ओर से नकद सिस्टम से किया जाता था। कम्पनी की ओर से सही ढंग से मैनेजमेंट नहीं करने से कम्पनी को सरकार एवं जलदाय विभाग की ओर से ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। उसके बाद से गांवों में लगे आरओ प्लांट की सार संभाल नहीं होने से एक के बाद एक करके प्लांट बंद होते गए। वर्तमान में आठ से दस आरओ प्लांट की चालू स्थिति में है।

इसके बाद वर्ष २०१६ के दौरान नागपुर की राईट वॉटर सॉल्यूशन कम्पनी की ओर से टेंडर लिया गया था। जिस पर कम्पनी की ओर से पूरे जिलेभर में करीब ११४ आरओ प्लांट लगाए गए। जिसमें जालोर, आहोर व सायला में कुल ३८ आरओ प्लांट लगाए गए है। वही राईट वॉटर सॉल्यूशन कम्पनी नागपुर की ओर से लगाए गए ११४ आरओ प्लांट में से केवल एक पादरली गांव के आरओ प्लांट को छोड़कर शेष सभी आरओ सुचारू है। पादरली गांव में लगा कम्पनी का आरओ वॉल्टेज की समस्या के चलते शुरू नहीं हो पाया है। जैसे ही गांव में वॉल्टेज की समस्या का समाधान होगा उसे शुरू कर दिया जाएगा। राईट वॉटर सॉल्यूशन कम्पनी नागपुर की ओर से फ्लोराइड मुक्त शुद्ध पानी बीस पैसे प्रति लीटर की दर से ग्रामीणों को उपलब्ध करवाया जाता है। तथा कम्पनी की ओर से मॉनिटरिंग की व्यवस्था ऑन लाईन सिस्टम से की गई है। आरओ प्लांट का मैनेजमेंट करने वाले इंजार्च को जालोर व बाड़मेर के गांवों में लगे सभी आरओ प्लांट की ऑन लाईन सूचना रहती है। कोई भी आरओ प्लांट बंद होते ही इंचार्ज को ध्यान पड़ जाता है और उसे जल्द शुरू करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। तथा कम्पनी की ओर से आरओ प्लांट से पानी लेने वाले ग्रामीणों के लिए एटीएम की व्यवस्था की गई है। नकद लेने देन की बजाय ग्रामीणों को राशि के हिसाब से कार्ड दे रखे होते है। जिसे एटीएम में डालने के बाद पानी की मात्रा दर्ज करते ही आटोमैटिक कार्ड से पैसे लेश हो जाते है। जिससे ग्रामीणों को झंझट से निजात मिलती है और आरओ प्लांट पर काॢमक को बिठाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

फ्लोराइड मुक्त शुद्ध पानी का सपना ग्रामीणांे के लिए सपना बनकर रह गया है

दिल्ली की कम्पनी आधा अधूरा काम छोड़ चलती बनी

इन दोनों कम्पनियों के काम करने के बाद वर्ष २०१७-१८ के दौरान जालोर जिले के करीब ९५ गांवों में आरओ प्लांट लगाने का टेंडर लेने वाली दिल्ली की फॉन्टस कम्पनी निर्धारित समयावधि ३१ मार्च २०१८ तक एक भी आरओ प्लांट नहीं लगा पाई। जब कम्पनी को लगा कि टेंडर लेने के बाद नाममात्र का काम नहीं किया गया तो उसे ब्लैक लिस्टेड होना पड़ेगा तब जाकर जाते जाते जालोर व आहोर के करीब आठ से दस गांवों में केवल प्लेट फार्म बनवा दिए और बिना आरओ प्लांट लगाए कम्पनी चलती बनी।

इनका कहना है



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