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एक साल से बंद पड़े दो ट्यूवबैल, एक से ही हो रही 5 गांवों की जलापूर्ति, एक पखवाड़े में एक बार होती है पानी की सप्लाई

निकटवर्ती भागलसेफ्टा, नासोली, पादरा सहित पांच गांवों को पेयजल सप्लाई देने के लिए भागलसेफ्टा सरहद में स्थित बांडी...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 02:05 AM IST
एक साल से बंद पड़े दो ट्यूवबैल, एक से ही हो रही 5 गांवों की जलापूर्ति, एक पखवाड़े में एक बार होती है पानी की सप्लाई
निकटवर्ती भागलसेफ्टा, नासोली, पादरा सहित पांच गांवों को पेयजल सप्लाई देने के लिए भागलसेफ्टा सरहद में स्थित बांडी नदी में दो ट्यूबवैल गत वर्ष आई बारिश में ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के बाद से एक वर्ष से बंद पड़े है ऐसे में पांचों गांवों की पेयजल आपूर्ति मात्र एक ट्यूबवैल के भरोसे चल रही है। वर्तमान में पांचों गांवों में करीब एक पखवाडे से पानी की सप्लाई दी जा रही है जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान होना पड रहा है। ट्रांसफार्मर को ठीक करवाने के लिए ग्रामीणों ने कई मर्तबा डिस्कॉम को अवगत करवाया मगर एक साल गुजर जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नही हुई। सोमवार को उपसरपंच के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपकर इसको शीघ्र शुरू करवाने की मांग की है। ग्रामीण कैलाशपुरी गोस्वामी ने बताया कि नासोली, भागलसेफ्टा, सरथला, रूचियार, गंगारी नाडी में पेयजल सप्लाई देने के लिए जलदाय विभाग ने बांडी नदी में तीन ट्यूबवैल खुदवाए थे जिसमें दो ट्यूूबवैल गत वर्ष आई बारिश से ट्रांसफार्मर गिर जाने के कारण बंद पडे है इस कारण पांच गांवों में एक वर्ष से पेयजल व्यवस्था बाधित हो रही है और लोगों को मजबूरन महंगे दाम देकर निजी टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है। ट्रांसफार्मर सही करवाने के लिए कई बार विद्युत विभाग को अवगत करवाया मगर ट्रांसफार्मर यथास्थिति में ही पडा है। ग्रामीणों ने विभाग से ट्रांसफार्मर जल्द ठीक करवाने की मांग की है ताकि पांच गांवों की पेयजल आपूर्ति सुचारू हो सके।

भीनमाल. गत वर्ष बाढ से गिरे ट्रांसफार्मर को दिखाते उप सरपंच व ग्रामीण।

भीनमाल. ट्रांसफार्मर लगाने के लिए डिस्कॉम के एक्सईएन को ज्ञापन सौंपते हुए ग्रामीण।

ट्यूबवैल शुरू करवाने की मांग

पांचों गांवों में पेयजल आपूर्ति सुचारू करवाने के लिए सोमवार को ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता को भी ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया कि 15 नंबर टयूबवैल को भागलसेफ्टा से जोड़ा जावे। इसी तरह 16 व 18 नंबर ट्यूबवैल को सुचारू करवाने के लिए टूटी पाइप लाइन को बदलकर नई लगाने की मांग की है। इस अवसर उपसरपंच भूराराम पुरोहित, भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष कैलाशपुरी गोस्वामी, पंचायत समिति सदस्य हुआदेवी गोस्वामी, जगदीश कुमार, वार्डपंच घेवाराम सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।

इधर, अतिवृष्टि के एक वर्ष के बाद भी नहीं सुधरी सड़कों की हालात, पलट रहे है वाहन

बडग़ांव-हड़मतीया मार्ग खस्ताहाल

भास्कर न्यूज बडग़ांव

बडग़ांव से हड़मतिया सिरोही जिले को जोड़ने वाले सड़क मार्ग गत साल हुई अतिवृष्टि के दौरान कदम-कदम पर सड़क पानी के बहाव के साथ बहकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। क्षतिग्रस्त सड़क की सार्वजनिक निर्माण विभाग ने एक साल के बाद भी कोई सुध नहीं ली गई। जिस कारण आए दिन वाहन पलट की दुर्घटना ग्रस्त हो रहे हैं। ग्रामीणों ने भी सांसद व स्थानीय विधायक को सड़क की मरम्मत के लिए कई बार मांग कर चुके हैं,लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं। गौरतलब है रविवार को हड़मतिया से बडग़ांव तरफ एक ट्रैक्टर ट्रॉली पशुओं के लिए चारा भरकर आ रहा था। इस दौरान सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। जिस कारण ट्रैक्टर का पीछे का भाग क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं ट्रैक्टर चालक को मामूली चोटें आई। इस जगह पर सोमवार को एक और वाहन पलट गया। इस मार्ग पर अतिवृष्टि के दौरान खेतों से निकलने वाले नाले के पानी से आधा किलोमीटर सड़क टूट कर गहरी खाई बन गई। क्षतिग्रस्त हुई सड़क पर सार्वजनिक निर्माण विभाग ने एक साल बीतने के बाद भी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों ने अपने स्तर जैसे-तैसे कर रास्ता को ठीक कर बड़ी मुश्किल से चल पा रहे हैं। इतना होने के बावजूद सार्वजनिक निर्माण विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों की नींद नहीं उड़ रही हैं।

बडग़ांव-हड़मतिया क्षतिग्रस्त मार्ग पर पलट ट्रैक्टर-ट्रॉली।

विभागीय अधिकारी नहीं देते है ध्यान

अतिवृष्टि के दौरान टूट सड़कों की एक साल के बाद भी मरम्मत नहीं हुई हैं। बडग़ांव से हड़मतिया होकर जसवन्तपुरा जाने वाले सड़क मार्ग अतिवृष्टि के दौरान पूरी से क्षतिग्रस्त हो चुकी था। इस मार्ग पर करीब दो महीने तक तो वाहनों को आवागमन भी बाधित रहा था। बाद में ग्रामीणों ने रास्ता सुचारू करवाने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को अवगत करवाया, लेकिन विभाग ने भी राहगीरों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने मिलकर अपने-अपने स्तर पर बड़ी मुश्किल से हल्के वाहन चलने हेतु रास्ता बनाया। बाद में ग्रामीणों ने सड़क मार्ग की मरम्मत हेतु जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत करवाया, लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद अभी तक क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत नहीं हुई।

क्यों नहीं होती है मरम्मत


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