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हाल-ए-भीनमाल चिकित्सालय, अपने कक्ष से नदारद रहते है चिकित्सक, मरीज परेशान

राजकीय चिकित्सालय में लगे चिकित्सक रोजाना अन्य कामों में व्यस्त रहने के कारण अपने कक्ष से गायब ही मिलते है ऐसे में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 12, 2018, 02:15 AM IST

राजकीय चिकित्सालय में लगे चिकित्सक रोजाना अन्य कामों में व्यस्त रहने के कारण अपने कक्ष से गायब ही मिलते है ऐसे में इसका खामियाजा यहां पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। दूर-दराज से पहुंचने वाले मरीजों को उस समय निराशा हाथ लगती है जब चिकित्सक अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिलते है। यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है कि बल्कि ऐसा माहौल रोजाना ही देखने को मिलता है। घंटों इंतजार के बाद भी चिकित्सकों के नहीं पहुंचने पर मजबूर लोगों को निजी चिकित्सालय में जाना पड़ता है। बुधवार को भी चिकित्सालय में भारी संख्या में मरीजों की भीड़ लगी रही लेकिन राजकीय चिकित्सालय के प्रभारी सहित कई चिकित्सक घंटों तक नदारद मिले। वर्ष 2017 में 1 लाख, 35 हजार 547 मरीज इलाज के लिए पहुंचे है इस तरह से देखा जाए तो ओपीडी की संख्या में दिनोदिन इजाफा हो रहा है मगर मरीजों के चैकअप के लिए कोई खास प्रबंध नहीं किए है।

खोल रखे है स्वयं के अस्पताल

राजकीय चिकित्सालय में कार्यरत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल चौधरी व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पांचाराम देवासी ने बाबा रामदेव कॉलोनी में दोनों खुद का अस्पताल चलाते है। अस्पताल के साथ-साथ यहां लैब भी संचालित की जा रही है। ऐसे में कई बार दोनों चिकित्सक अपनी ड्यूटी में खुद के अस्पताल में आना-जाना लगा रहता है। इसको लेकर 10 जनवरी को भास्कर ने सरकारी चिकित्सालय में कार्यरत दो चिकित्सक चला रहे है निजी अस्पताल शीर्षक से समाचार प्रकाशित भी की थी।

शिकायत के बावजूद उच्चाधिकारी नहीं दे रहे ध्यान, मरीज परेशान

भीनमाल. राजकीय चिकित्सालय में पर्ची के लिए खड़ी महिलाएं।

भीनमाल. राजकीय चिकित्सालय में अपने कक्षों से नदारद चिकित्सक।

एक चिकित्सक के भरोसे था ओपीडी

राजकीय अस्पताल की लचर व्यवस्था का खामियाजा आए दिन मरीजों को भुगतना पड़ता है। चिकित्सालय में प्रतिदिन सैकडों लोग इलाज कराने आते हैं मगर मरीजों की सुध लेने वाले चिकित्सक अक्सर नदारद मिलते है। बुधवार को मरीजों से भरा ओपीडी मात्र एक चिकित्सक डॉ. सोहनराज मेहता के भरोसे नजर आया। जबकि यहां वर्तमान में 10 चिकित्सक कार्यरत है। अन्य ओपीडी में केवल कुर्सियां ही नजर आई। पता करने पर पाया गया कि सभी चिकित्सक ड्यूटी पर है। सवेरे 9 बजे पहुंचे मरीज 11 बजे तक चिकित्सकों का इंतजार करते रहे।

अन्य कामों में उलझे रहते हैं चिकित्सक

भीनमाल सहित आसपास के करीबन 40 गांवों से रोजाना मरीज इलाज के लिए राजकीय चिकित्सालय में पहुंचते है। 20-30 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचने वाले मरीजों को चिकित्सकों के नहीं मिलने से परेशानी होती है। चिकित्सकों के अपने कक्ष में नहीं मिलने की एक वजह यह भी कि विशेषज्ञ चिकित्सकों को अन्य कार्य दे रखे है जैसे डॉ.एमएम जांगिड़ को चिकित्सालय प्रभारी व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जुगमल चौधरी को बीसीएमओ नियुक्त कर रखा है जिसके चलते वे दिनभर अन्य ऑफिशियल कार्यों में उलझे रहते है।

नहीं मिले चिकित्सक

मैं अपनी माताजी को दिखाने के लिए सवेरे 9 बजे से खड़ा हूं। अभी 10.30 बजने को आए है लेकिन अभी तक चिकित्सक अपने कक्ष में नही आए है। सरकार द्वारा नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था है मगर डॉक्टर साहब ही नहीं मिले है ऐसे में मजबूरन निजी चिकित्सालय जाना पड़ेगा। - भारताराम माली, भीनमाल

दिनभर चिकित्सक अपने कक्ष में नहीं बैठ सकते क्योंकि उनको वार्ड भी देखने पड़ते है। चिकित्सालय प्रभारी होने के नाते मेरे पास ऑफिस संबंधी अन्य कार्य होने की वजह से मैं अपने कक्ष में नहीं बैठ पाता हूं। - डॉ. एमएम जांगिड़, प्रभारी राजकीय चिकित्सालय भीनमाल

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