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इस साल अक्टूबर से दिसंबर तक एक भी सावा नहीं

तीन महीने में देवउठनी एकादशी पर एकमात्र स्वयं सिद्ध मुहूर्त भास्कर न्यूज | भीनमाल इस साल अधिकमास (पुरुषोत्तम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 23, 2018, 02:20 AM IST

तीन महीने में देवउठनी एकादशी पर एकमात्र स्वयं सिद्ध मुहूर्त

भास्कर न्यूज | भीनमाल

इस साल अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का असर शादी-विवाह के मुहूर्त पर भी पड़ेगा। अधिकमास और शुक्र अस्त होने के कारण इस साल अक्टूबर-नवंबर से दिसंबर में एक भी दिन विवाह मुहूर्त नहीं रहेगा। इस अवधि में कार्तिक सुदी, एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी) एकमात्र स्वयं सिद्ध (अबूझ) मुहूर्त है। पंडित पवन दाधीच ने बताया कि शुक्र और गुरु तारा अस्त होने से अक्टूबर-नवंबर दिसंबर में विवाह मुहूर्त नहीं होंगे। 17 से 31 अक्टूबर तक शुक्र अस्त रहेगा। 12 नवंबर से 7 दिसंबर तक गुरु अस्त रहने से विवाह के योग नहीं बनेंगे।

शुक्र वैभव और गुरु जीवनशैली के प्रतीक : शुक्र ग्रह का जीवन में विशेष महत्व है। दांपत्य जीवन, सुख, सौंदर्य, संतान उत्पत्ति के विशेष कारक शुक्र हैं। शादी का मुहूर्त निकालते समय कन्या (वधु) का बृहस्पति बल उच्च का होना चाहिए। जिससे विवाह के पश्चात स्वामी पक्ष में बृहस्पति उच्च होने से होने वाले पति के लिए धन योग, धान्य योग, भूमि योग, वाहन योग के लिए गुरु को कारक माना गया। विवाह संयोग के लिए गुरु और शुक्र तारा उदित होना जरूरी है।

16 मई से 13 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास : पंडित पवन दाधीच ने बताया कि इस साल 16 मई से अधिकमास यानि पुरुषोत्तम मास शुरू होगा। जो 13 जून तक रहेगा। यह मलमास की श्रेणी में आता है। पुरुषोत्तम मास में मांगलिक कार्य निषेध माने गए हैं। यह मास सिर्फ धार्मिक कार्य, पुण्य, तीर्थ यात्रा, कथा श्रवण ब्राह्मण भोज, जल मंदिर, ब्राह्मण बावड़ी, पक्षियों के लिए परिंडे, वृद्ध सेवा, अनाथालय में सेवा और निर्माण आदि धर्म सेवा के लिए ही विशेष उत्तम माना गया है।





इस माह में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। इस बार अधिकमास ज्येष्ठ मास में पड़ रहा है। साथ ही ज्येष्ठ माह में ज्येष्ठ पुत्र और पुत्री का प्रथम विवाह निषेध माना गया है। ज्येष्ठ माह में शादी के अच्छे मुहूर्त नहीं होते हैं। इसलिए मई और जून में विवाह के योग कम बन रहे हैं। अधिकमास 16 मई से शुरू होगा, जो 13 जून तक रहेगा, इसलिए इन दोनों माह में मुहूर्त कम हैं।

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