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घरों में बंटवारे की एक और लकीर, जहां कई परिवार साथ वहां पानी भी तालों में

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट राज्य के सबसे प्यासे इलाकों से लाइव... श्यामराज शर्मा | जयपुर ताजमहल को उसका नूर...

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 02:20 AM IST
घरों में बंटवारे की एक और लकीर, जहां कई परिवार साथ वहां पानी भी तालों में
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट

राज्य के सबसे प्यासे इलाकों से लाइव...

श्यामराज शर्मा | जयपुर

ताजमहल को उसका नूर देने वाला...मकराना आज खुद बेनूर हो चुका है। आज उसकी दो पहचान है...एक जिससे दुनिया वाकिफ है : सबसे अच्छी क्वालिटी का संगमरमर यहीं निकलता है। और दूसरी वो पहचान जो उसके सफेद चेहरे को स्याह बना देती है। 1.61 लाख की आबादी वाला मकराना आज सबसे प्यासे इलाकों में से एक है। छह-छह दिन में एक बार सरकारी नलों से पानी आता है। इतनी ज्यादा अवधि में जल वितरण की इससे और बुरी मिसाल राज्य में कहीं नहीं है।

हालात इतने बुरे हैं कि जिन इमारतों में कई परिवार साथ रहते हैं..वहां पानी बंटवारे की एक और लकीर खींच चुका है। एक परिवार...दूसरे परिवार से ही सिर्फ इसलिए डरा रहता है कि कहीं उसका पानी चोरी न हो जाए। साथ रहते हुए भी यहां पानी तालों और पहरों में कैद रहता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

सबसे सूखा प्रदेश...सबसे प्यासे गले

राज्य में 3395 गांव-ढाणियां ऐसी जहां पीने का पानी नहीं

प्रदेश के 3395 गांव व ढाणियों में पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। यहां महिलाओं को तीन से पांच किमी दूर से पानी सिर पर लाना पड़ता है। जलदाय विभाग ने यहां टैंकरों का इंतजाम तो किया है, लेकिन आधा पानी रास्ते में ही महंगे दामों पर बिक जाता है।

छह जिलों के 2374 गांव में सबसे बुरे हाल

जैसलमेर 579

सीकर 498

जयपुर 415

बूंदी 399

झालावाड़ 269

बारा 214



10 कस्बे: किशनगढ़, परबतसर, डीडवाना, मेड़तासिटी, डेगाना, खेतड़ी, दौसा कस्बा, बांदीकुई, बालोतरा व भीनमाल में 96 घंटे में नल से पानी।


15 कस्बे :बिजयनगर, गुलाबपुरा, गंगापुर, लाडनूं, गोठरा, सुजानगढ़, कामां, मारवाड़ जंक्शन, सोजत सिटी, राईपुर, जैतारण, सिवाना, समदरी, संचौर, व फतेहनगर।


फोटो : अनिल शर्मा

घर से खाली आए बर्तन...घर तक पहुंचते ही सबसे कीमती हो गए

यह तस्वीर दो मस्जिद इलाका क्षेत्र की है। 200 की आबादी का मोहल्ला व तीन वार्ड की सीमा। यहां तो नलों में पिछले छह महीने से एक बूंद पानी नहीं आया। सरकारी पेयजल सप्लाई के नाम पर 2-4 दिन में एक टैंकर आता है। लोग जेईएन को सुबह से फोन कर रहे थे तब जाकर शाम को 6:30 बजे एक टैंकर आया। टैंकर दिखते ही बच्चे दौड़ पड़े। टैंकर आया- टैंकर आया की आवाजें सुन कर महिला, बच्चे व बूढ़े बर्तन उठा कर लपके। अचानक ही टैंकर में सैकड़ों नल डाल दिए गए और छोटे हैंडपंप निकाल कर पानी खींचा जाने लगा। दस 10 मिनट में ही टैंकर खाली हो गया। महिलाएं झगड़ने लगीं। आधे से ज्यादा बर्तन घर खाली ही लौटे। जो भर पाए, वे घर जाकर तालों में कैद हो गए। यहां जिन बिल्डिंगों में एक से ज्यादा परिवार रहते है वहां पानी तालों में रखा जाता है।

पानी हजार फीट पर...वो भी पीने लायक नहीं, 8 साल पहले पाइप बिछाए, पर आज तक पानी नहीं

मकराना में भू-जल स्तर 1000 फीट गहरा है। पानी खारा है। ऐसे में टैंकरों का कारोबार पनप गया है। एक टैंकर 400 रुपए में बेचा जाता है। वार्ड 3 के पूर्व पार्षद अब्दुल रहमान गैसावत का कहना है कि मकराना में 4 से 8 साल से विष्णु आर पुंगलिया कंस्ट्रक्शन कंपनी ने डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बिछाया था, लेकिन ज्यादातर इलाकों में एक दिन भी पानी नहीं आया। वहीं जलदाय विभाग के जेईएन वासुदेव सुथार का कहना है कि यहां सप्लाई सिस्टम तहस नहस है। अब 16 करोड़ 80 लाख का प्रस्ताव बना कर चीफ इंजीनियर भेजा है। वहां से मंजूरी मिलने पर काम होगा।

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घरों में बंटवारे की एक और लकीर, जहां कई परिवार साथ वहां पानी भी तालों में
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