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दानदाताओं ने लाखों रुपए खर्च किए फिर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में घटा नामांकन

दानदाताओं की ओर सेकरोड़ों खर्च करके बनाए गए सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने व लोगों की अरूचि के...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:25 AM IST
दानदाताओं ने लाखों रुपए खर्च किए फिर भी 
 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में घटा नामांकन
दानदाताओं की ओर सेकरोड़ों खर्च करके बनाए गए सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने व लोगों की अरूचि के चलते निजी स्कूलों का प्रभुत्व तेजी से बढ़ रहा है। शहर की सरकारी विद्यालयों के हालात यह है कि कभी 400-500 नामांकन वाले विद्यालय आज मात्र 40-50 नामांकन पर आकर रह गए हैं। जल्द ही शिक्षा विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले कुछ ही सालों में नामांकन न के बराबर हो सकता है। लोगों की आर्थिक स्थिति जैसे-जैसे ठीक हो रही है वे सरकार विद्यालयों का मोह छोड़ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों को निजी विद्यालयों में भर्ती करा रहे हैं। इधर, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं है।

विद्यालयों के लिए भी है परेशानी

तीनों विद्यालयों में कई तरह की समस्याए भी व्याप्त है। यहां बरसाती पानी के लिए बनाए गए टांके भी नकारा साबित हो रही है जब से बनाए गए है तभी से इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। सर्व शिक्षा के तहत सदर बाजार में आधा अधूरा भवन बनने से झाडिय़ां उग आई है। विद्यालय गेट के सामने ही यात्रियों बसों के खड़ा रहने से छात्रों को आवागमन में परेशानी है। तीनों विद्यालयों की जगह बड़ी होने से यहां आए दिन कार्यक्र्रम होते हैं जिस वजह से कई बार कचरा यही पर पड़ा रहता है। रात्रि में शराबी दीवार फांदकर यहा शराब पार्टी करते हैं।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं है

भीनमाल. माघ चौक स्थित संस्कृत सीनियर सैकण्डरी विद्यालय।

भीनमाल. संस्कृत विद्यालय के सामने ग्राउंड के बीचों-बीच बरसाती पानी के लिए बनाया गया टांका।

भीनमाल. सदर बाजार विद्यालय में उग आई झाडिय़ा व टांके पर फोड़ी गई शराब की बोतलें।

साल दर साल गिरा नामांकन

दानदाता सुखराज नाहर ने सदर बाजार, शिवनारायण गोधुलाल अग्रवाल ने संस्कृत व सेठ चुन्नीलाल हंसराज ने कचहरी रोड विद्यालयों का निर्माण करवाया है। माघ चौक पर एक ही जगह स्थित इन तीन विद्यालयों के नांमाकन साल दर साल इस तरह गिरते गए।

विद्यालय वर्ष 2018 2017 2016 2015 2014

सदर बाजार 45 49 65 87 74

कचहरी रोड 90 97 111 106 94

संस्कृत विद्यालय 72 103 73 83 89

संस्कृत विद्यालय सीनियर सैकण्डरी होने के बावजूद यहा नामांकन कम है क्योंकि माध्यमिक कक्षाओं के लिए यहा मात्र एक व्यायाता ही कार्यरत है। इधर, कक्षा 1 से 8 तक संचालित होने वाले सदर बाजार में 2 अध्यापिकाएं व कचहरी रोड में 3 अध्यापक वर्तमान में कार्यरत है। दोनों विद्यालयों में नामांकन की स्थिति बेहद खराब है।

कई योजनाएं संचालित फिर भी नांमाकन कम

निशुल्क पाठ्यपुस्तक, छात्रवृत्ति, स्कूटी, साईकिल, मध्याह्न भोजन, शैक्षणिक संवाद जैसे कार्यक्रम भी अभिभावकों व छात्रों का विश्वास सरकारी विद्यालयों के प्रति नहीं बढ़ा रहे है। सरकार अब निजी विद्यालयों में छात्रवृत्ति सहित अन्य सभी सुविधाएं देने लगी है जो बच्चों को सरकारी विद्यालयों में मिलती है। इससे विद्यार्थियों का रूझान निजी स्कूलों की तरफ बढ़ गया है।

आरटीई भी एक वजह

आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में भी 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब छात्रों को प्रवेश दिए जाने से भी छात्रों की संया कम हो रही है। इसके अलावा सरकारी शिक्षकों पर पढ़ाई के अलावा अन्य कार्य भी थोपे जाने से सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिस कारण लोगों का सरकारी विद्यालयों से मोहभंग हो रहा है।

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 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव में घटा नामांकन
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