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शराब ठेकेदारों पर 132 करोड़ रुपए बकाया, 30 साल में वसूल नहीं कर पाया आबकारी विभाग

आबकारी विभाग की डिफॉल्टर शराब ठेकेदारों पर बकाया राशि अब 132 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। बकाया राशि के ज्यादा मामले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 24, 2018, 02:25 AM IST

आबकारी विभाग की डिफॉल्टर शराब ठेकेदारों पर बकाया राशि अब 132 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। बकाया राशि के ज्यादा मामले वर्ष 1988 से लेकर वर्ष 2010-11 तक ही अवधि के हैं। विभाग के बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद ठेकेदार यह बकाया राशि जमा कराने का नाम ही नहीं ले रहे। हैरानी की बात तो यह है कि बीते वित्तीय वर्ष में विभाग दो बार ब्याज पर भारी-भरकम छूट की एमनेस्टी योजना भी लेकर आया, जिससे कम से कम मूल रकम तो मिले। इसके बावजूद ठेकेदारों से करीब 4.4 करोड़ रुपए ही वसूले जा सके। वसूली के सभी तरीके नाकाम होने के बाद आबकारी विभाग ने मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेन्स ऑफ रैवेन्यू इंटेलीजेन्स यूनिट इंडिया, नई दिल्ली तथा डायरेक्ट्रेट ऑफ रैवेन्यू इंटेलीजेन्स राजस्थान की मदद मांगी है।

रियलिटी

चैक

आबकारी विभाग के गोदाम से माल उठाकर भी ठेकेदारों ने नहीं चुकाई पूरी कीमत, विभाग ने एमनेस्टी योजना लागू की ...लेकिन वो भी काम नहीं आई

मूल रकम के लिए आबकारी एमनेस्टी योजना

शराब ठेकेदार विभाग के डिपो से माल उठाते रहे। ठेका खत्म हुआ, तो उन्होंने बकाया राशि जमा नहीं कराई। 1988 से बढ़ते हुए बकाया रकम करीब 150 करोड़ तक पहुंच गई। मूल रकम की तो वसूली हो, इसके लिए ब्याज माफी की ‘आबकारी एमनेस्टी योजना’ 2002 से अब तक 4 बार लाए, लेकिन अब भी 132 करोड़ बकाया हैं।

कब कितनी हुई ब्याज माफी

वर्ष माफ की गई राशि

2002-03 19.08

2006-07 38.03

2009-10 59.50

2017 -18 (प्रथम) 3.57

2017-18 (सैकंड) 18.05

लंबे समय से शराब ठेकेदारों पर बकाया है। उनको नोटिस भी दिया जाता है। विभाग ने एमनेस्टी योजना भी लागू की थी। बकाया न चुकाने वालों पर कार्रवाई करेंगे। -मुकेश शर्मा,

अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त आबकारी

 डिफाल्टर शराब ठेकेदारों की बकाया राशि पुरानी है। वर्तमान स्थिति की कोई बकाया नहीं है।

-प्रकाश चंद रैगर, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त, भरतपुर

38 केसों में 22 करोड़ की दी छूट

प्रदेश में वर्ष 2017-18 के अंतर्गत एमनेस्टी योजना प्रथम में 28 मामलों में 3.57 करोड़ एवं 2017-18 सैकंड में 10 प्रकरणों में 18.50 करोड़ की मूल रकम के ब्याज में छूट प्रदान की गई। इसके बावजूद दोनों बार में मिलाकर करीब 4.44 करोड़ रुपए की ही वसूली हो पाई।

राशि करोड़ों में है

वसूली के लिए डीआरआई को लिखा

वसूली करने में फेल होने पर विभाग ने मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेन्स ऑफ रैवेन्यू इंटेलीजेन्स यूनिट इंडिया नई दिल्ली तथा डायरेक्ट्रेेट ऑफ रैवेन्यू इंटेलीजेन्स राजस्थान को बकायादारों की संपत्तियों के बारें में जानकारी के लिए नाम, पते, पैन नंबर, पिन नंबर तथा बैंक खाता नंबर से संबंधित सूचना भेजी है।

टॉप -15 : किस पर कितनी बकाया राशि

जिला मदिरा समूह नाम वर्ष बकायादार का नाम राशि

कोटा कोटा-लाडपुरा-दीगोद 2000-01 परसराम पुत्र हरिशचंद्र 2076.97

नागौर कुचामन-परबतसर 2000-01 राजेश पुत्र धनेश कुमार 1200.62

नागौर जायल-मेड़ता 2000-01 राजेश पुत्र धनेश कुमार 1098.71

हनुमानगढ़ हनुमानगढ़ 2000-01 मोहम्मद एंड पार्टी 1074.55

जालौर भीनमाल-सांचौर 2000-01 डीएम सिद्धावत एंट पार्टी 887.84

जालौर जालौर 2000-01 डीएम सिद्धावत एंड पार्टी 856.17

बूंदी बूंदी जिला 2000-01 परसराम पुत्र हरीशचंद्र सिंधी 513.98

झुन्झुनू खेतड़ी-बुहाना 1999-00 बोदूराम पुत्र सूरजाराम 481.66

चूरू मदिरा चूरू 2003-04 इकबाल पुत्र अजीज खान 474.75

पाली सोजत 2000-01 चतुर्भुज पुत्र द्वारका प्रसाद 455.46

बाड़मेर बाड़मेर ग्रामीण 2000-01 आईशा प|ी मो. हनीफ 407.93

पाली देसूरी 2000-01 सुरेन्द्र सिंह पुत्र गोकुल सिंह 342.56

चूरू मदिरा रतनगढ़ 2000-01 हनुमानराम पुत्र गणेशराम 293.25

श्रीगंगानगर रायसिंहनगर 2000-01 सोनसिंह एंड पार्टी 257.77

झुन्झुनू खेतड़ी-नवलगढ़ 1992-93 वेदपाल पुत्र सुरजाराम 213.39

सभी की राशि लाखों में है

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