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कूकावास में जांभाणी हरिकथा के समापन पर विश्नोई समाज ने यज्ञ में दी आहुति

निकटवर्ती कूकावास गांव के गुरू जम्भेश्वर मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय जाभांणी हरिकथा का समापन रविवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 21, 2018, 02:35 AM IST

कूकावास में जांभाणी हरिकथा के समापन पर विश्नोई समाज ने यज्ञ में दी आहुति
निकटवर्ती कूकावास गांव के गुरू जम्भेश्वर मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय जाभांणी हरिकथा का समापन रविवार को हुआ। इस दौरान आसपास के गांवों से भारी संख्या में विश्नोई समाज के लोग मौजूद रहे।

हरिकथा के समापन पर स्वामी भागीरथदास आचार्य के सानिध्य 120 शब्दों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन का आयोजन कर पाहल बनाया गया। इस अवसर पर सांचौर विधायक सुखराम विश्नोई ने कहा कि पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है। गुरु महाराज ने 550 वर्ष पहले जो बात कही वो ही आज वैज्ञानिक बता रहे हैं। उनकी वाणी मानव मात्र के लिए कल्याणकारी है। जिला परिषद सदस्य जयंती विश्नोई ने कहा कि इस भ्रम अवस्था से बाहर निकलने के लिए भगवान जम्भेश्वर ने 29 नियमों की एक आचार संहिता प्रदान की है। उक्त आचार संहिता के नियमों के पालन करने से निश्चित रुप से इस लोक और परलोक दोनों में जीवन की उन्नति, अम्युदय, कल्याण निश्चित है। इस तरह जीवन जीने वाला मनुष्य धर्मात्मा पुरूष कहलाता है। इस अवसर पर संत राजु महाराज, नारायणदास महाराज कूका, कल्याणदास महाराज चैनपुरा, श्यामदास महाराज जोगाऊ, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ समरजीत सिंह, श्याम खिचड़, पूर्व प्रधान देराम विश्नोई, उमसिह चांदराई, कांग्रेस नेता आमसिह, पंचायत समिति सदस्य रमेश पुरोहित, पार्षद पुखराज विश्नोई, मंडी सचिव जयकिशन विश्नोई, राजुराम ईराम, कूका सरपंच सोहनीदेवी, प्रेमाराम खिलेरी, एसीटीओ ओमप्रकाश विश्नोई, बाबुलाल मांजु, प्रवीण खिलेरी सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में विश्नोई समाज के लोग मौजूद रहे।

मेले व यज्ञ का आयोजन

रविवार को कथा के समापन पर संत महात्माओं के सान्निध्य में यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें में विश्नोई समाज के सैकड़ो लोगों ने घी व नारियल की आहुति दी। विश्नोई समाज के लोगों ने 120 शब्दों से बने पाहल को ग्रहण किया। मेले में जिलेंभर से हजारों श्रद्धालुओ ने मंदिर परिसर में धोक लगाई और गुरू जम्भेश्वर के जयकारे लगाए।

भीनमाल. हरिकथा में आहुतिया देते हुए विश्रोई समाज के लोग।

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