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भीषण गर्मी में गांवों में पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं ग्रामीण

एक तरफ जारी भीषण गर्मी का दौर एवं दूसरी तरफ क्षेत्र के गांवों में व्याप्त पेयजल संकट लोगों व पशुओं के लिए परेशानी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 30, 2018, 02:35 AM IST

भीषण गर्मी में गांवों में पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं ग्रामीण
एक तरफ जारी भीषण गर्मी का दौर एवं दूसरी तरफ क्षेत्र के गांवों में व्याप्त पेयजल संकट लोगों व पशुओं के लिए परेशानी का सबब बन गया है। लोगों को पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है, लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारी व प्रशासन समस्या के लिए कोई ठोस उपाय करता नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन की ओर से गांवों में टैंकरों से जलापूर्ति के दावे भी किए जा रहे है लेकिन धरातल स्तर पर तो हलक तर करने के लिए ग्रामीणों को खुद पानी के टैंकर डलवाने को मजबूर है। इधर उपखंड क्षेत्र के गांवों में पेयजल संकट से सबसे ज्यादा असर पशुओं पर पड़ रहा है जो पानी के अभाव में दम तोड़ रहे है। अधिकतर गांवों में पानी की व्यवस्था के लिए बने जीएलआर वर्षों से सूखे पड़े होने से गर्मी के मौसम में अवाडे भी सूखे ही रहते है जिससे पशु पक्षियों को हलक तर करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

वर्षों से सूखी पड़ी पशु खेलिया : पेयजल के लिए सरकार ने गांवों में जीएलआर तो बना दिए लेकिन इनमें पेयजल की सप्लाई नहीं देने से यह ग्रामीणों के लिए नकारा साबित हो रहे है। इधर पशुओं के लिए बने अवाड़े भी भीषण गर्मी में सूखे रहने से पशुओं को पेयजल के लिए परेशानी होती है। क्षेत्र के जेरण फांटा, वाडाभाडवी, राह, भादरडा, रणजी का गोलिया, सेवडी, मिण्डावास, नरसाणा, खांडादेवल, आलडी, कारलू, जेतू, पूनासा सहित कई गांवों में जीएलआर में कभी-कभार ही पेयजल सप्लाई हो रही है। गांवों में कई पशु खेलियों पर दर्जनों पशु मंडराते नजर आ रहे है, कई जगह प्यास से काल का ग्रास बने पशु दिखाई पड़ रहे है। हर गांव में दो से तीन पशु खेलिया है जिसमें से अधिकांश सूखी पड़ी है।

साल-दर-साल घट रहा पानी : राजस्थान सरकार के भूजल विभाग के 2014 के आंकडों के मुताबिक भीनमाल पंचायत समिति में वर्ष १९८४ में भूमि में उपलब्ध पानी का प्रतिवर्ष १०१ प्रतिशत ही उपयोग करते थे लेकिन अब २३९ प्रतिशत दोहन कर रहे है अर्थात कुल वार्षिक पुनर्भरण की तुलना में ८७ मिलीयन घनमीटर भूजल अधिक निकाला जा रहा है। १९८४ में औसत १४ मीटर गहराई पर पानी उपलब्ध था जो अब ५४ मीटर तक हो गया है। पंचायत समिति क्षेत्र अतिदोहित (डार्कजोन) श्रेणी में सम्मिलित है इस कारण यहां पेयजल का संकट सबसे ज्यादा होता है।

अधिकांश गांवों में पशुओं के लिए नहीं है पानी की व्यवस्था, सूखी पड़ी है पशु खेलिया

भीनमाल. जेरण फांटा में जीएलआर के पास सूखी पड़ी पशु खेली।

शहर में भी हालात विकट, प्यास नहीं बुझा पा रहा डीआर प्रोजेक्ट

शहर में भी पेयजल संकट की समस्या बरकरार है। डीआर प्रोजेक्ट का पानी मिलने के बाद भी शहर में चार दिन में एक बार जलापूर्ति हो रही है। कई मौहल्लों के लोग पेयजल के लिए हर रोज परेशान है और निजी टैंकरो के भरोसे चल रहे है। डीआर प्रोजेक्ट का पानी आने से पूर्व अधिकारियों द्वारा तीन दिन में एक बार जलापूर्ति करने की बात कही जा रही थी लेकिन फिर भी हालात वही के वही है। जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता डीसी डांगी ने बताया कि ट्यूबवैल में गर्मी के मौसम में पानी की कमी रहती है इस कारण चार दिन में एक बार जलापूर्ति हो रही है हालांकि 1 जून से रात्रि में अलग से जलापूर्ति करने के लिए नर्मदा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा है।

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