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गायों की सेवा के लिए घर-घर जाकर एकत्रित कर रहे रोटियां

गायों की सेवा के लिए व्यापारियों व सोनी समाज के सहयोग से पिछले ढाई साल से संचालित हो रहा गौरथ अब लोगों के लिए भी घर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 18, 2018, 02:35 AM IST

गायों की सेवा के लिए घर-घर जाकर एकत्रित कर रहे रोटियां
गायों की सेवा के लिए व्यापारियों व सोनी समाज के सहयोग से पिछले ढाई साल से संचालित हो रहा गौरथ अब लोगों के लिए भी घर बैठे ही गायों की सेवा का माध्यम बन गया है। शहर के विभिन्न गली-मौहल्लों में घर-घर रोटियां एकत्रित करने वाला गौरथ का सूर्य की पहली किरण के साथ ही इंतजार रहता है। घर-घर लोग गौरथ आने से पहले ही रोटिया, अन्न व दान तैयार रखते है।

ढाई साल पहले व्यापारियों के मन में विचार आया कि आज की भागदौड़ भरी जिदंगी में हर किसी के पास समय नहीं है। ऐसे में कई लोग गायों की सेवा के लिए गौशाला तक नहीं जा पाते हैं। उन्होंने एक ई-रिक्शा (गौरथ) संचालित करने का निर्णय लिया ताकि घर बैठे ही लोगों को गायों की सेवा करने का मौका मिले और प्रतिदिन गायों के लिए कुछ दान कर सके। सोनी समाज के सहयोग से व्यापारियों ने गौरथ खरीदा और एक ड्राइवर को रखकर इसका संचालन भीलों का चौहटा, सुनारों की गली तक किया तो अन्य मौहल्लों में रहने वाले लोगों ने भी गौरथ का क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापारियों से आग्रह किया। इसके पश्चात जैसे-जैसे लोगों का रुझान बढ़ता गया। वैसे-वैसे गौरथ का संचालन क्षेत्र भी बढ़ता गया। अब शहर के आधे से अधिक गली-मौहल्लों से रोटियां एकत्रित कर प्रतिदिन गायत्री गोशाला पहुंचाई जाती है। अब शहर की हर गली में सुबह की पहली किरण के साथ सभी को गौरथ का इंतजार रहता है। जब तक गौरथ में लगा लाउडस्पीकर से धार्मिक गीतों की आवाज नहीं आती तब तक हर मौहल्ले के लोगों को गौरथ का इंतजार रहता है।

लोग करते है इंतजार : दिलीप सोनी ने बताया कि गौरथ में रोटी के साथ-साथ गुड़ और नकदी राशि भी गोशाला के लिए दानपात्र में एकत्रित करते है। सवेरे करीब 7 बजे से प्रारंभ हुआ सफर करीबन 12 बजे तक थम जाता है। गौरथ चालक मांगसिंह ने बताया कि उसने अपनी सुविधा के लिहाज से शहर की गलियों में समय बांटा हुआ है और प्रतिदिन तय समय के अनुसार ही वह गायों के लिए रोटी लेने के लिए निर्धारित गलियों तक पहुंचते है। इस दौरान वह करीब 15 से 20 किलो मीटर का सफर तय कर लेता है। मांगसिंह ने बताया कि गौरथ में हर धर्म के लोग रोटिया डालते है ऐसे में यह रथ धर्म शांति, एकता और विश्वास भाई-चारे का संदेश भी देता है।

सेवा

ढाई सालों से गायों की सेवा के लिए घर-घर जाकर गौरथ से एकत्रित कर रहे रोटिया व अन्न

भीनमाल। गायों के लिए रोटिया एकत्रित करता गौरथ।

इन मौहल्लों में पहुंचता है गौरथ

गौरथ शहर के भीलों का चौहटा, घांचियों का चौहटा, मालियों का वास, मुख्य बाजार, खारी रोड, जुंजाणी बस स्टैण्ड, पूरानी टंकी, सुनारों का वास में प्रतिदिन रोटिया लेने के लिए पहुंचते है। लोगों की मांग को देखते हुए संचालनकर्ताओं ने एक और गौरथ खरीदा है तथा शीघ्र ही इसका संचालन भी अन्य मौहल्लाों में किया जाएगा। गौरथ जहा सवेरे नहीं पहुंच पाता है वहा शाम को पहुंचता है। मुख्य बाजार में गायों के लिए गुड सबसे ज्यादा आता है जिसकी लापसी गौशाला में बनाई जाती है।

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