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2800 पेज का वेद विज्ञान आलोक ग्रंथ लिखने वाले आचार्य अग्निव्रत पहुंचे जालोर

पत्रकारों से हुए रूबरू, बोले= अंग्रेजों ने हमारे ग्रंथ नष्ट कर दिए, जिससे विद्या भी लुप्त हो गई भास्कर न्यूज |...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 23, 2018, 02:35 AM IST

2800 पेज का वेद विज्ञान आलोक ग्रंथ लिखने वाले आचार्य अग्निव्रत पहुंचे जालोर
पत्रकारों से हुए रूबरू, बोले= अंग्रेजों ने हमारे ग्रंथ नष्ट कर दिए, जिससे विद्या भी लुप्त हो गई

भास्कर न्यूज | जालोर

भारत ने विद्या और चरित्र के कारण दुनिया में यश प्राप्त किया था न कि हथियारों की ताकत पर। विद्या के कारण ही भारत जगतगुरू था, लेकिन अंग्रेजों ने कई ग्रंथ नष्ट कर दिए, जिससे विद्या लुप्त हो गई। ये शब्द श्री वैदिक स्वस्ति पंथा ट्रस्ट भागलभीम (भीनमाल) के अध्यक्ष आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक ने कहे। आचार्य नैष्ठिक का हाल ही में ‘वेद विज्ञान आलोक’ नामक ग्रंथ प्रकाशित हुआ है। जिसका पिछले दिनों उप राष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने विमोचन भी किया था। ग्रंथ के प्रकाशन के बाद जालोर आने पर उन्होंने सीनियर सिटीजन हॉल में शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए ग्रंथ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने हमारी विद्या को नष्ट कर दिया, भारत से जाते समय वे ग्रंथ ले गए। अब हमारे यहां वेद अलमारियों में रह गए। भारत में विदेशी शिक्षा हावी हो गई। स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों को पुनर्जीवित करने का काम किया था। आचार्य ने कहा कि प्राचीन विज्ञान से वर्तमान की विज्ञान बहुत ही पीछे हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृत भाषा है और संस्कृत के शब्दों की गूंज से ही ब्रह्मांड बनता है। आचार्य ने बताया कि करीब 2800 पेज का वेद विज्ञान आलोक ग्रंथ के शोध में करीब दस वर्ष लगे हैं। इस ग्रंथ में चारों वेद, विभिन्न ऋषियों के 68 ग्रंथों एवं अन्य संस्कृत ग्रंथों सहित कुल 94 ग्रंथों के अतिरिक्त आधुनिक भौतिकी के लगभग 30 उच्च स्तरीय ग्रंथों को उद्धृत किया गया है। आचार्य ने बताया कि हिंदी भाषा में प्रकाशित उनका यह ग्रंथ भारत के प्राचीन वैदिक ज्ञान विज्ञान को संपूर्ण मानव जाति के लिए हितकारी सिद्ध करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान विशाल आर्य, सीए मोहन पाराशर, सेवानिवृत्त इंजीनियर बीएल सुथार, पदमाराम चौधरी, ईश्वरलाल शर्मा, साहित्यकार पुरुषोत्तम पोमल आदि उपस्थित थे।

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