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मिनरल वाटर के नाम पर बिक रहा एयरकंडीशनर से ठंडा किया पानी, स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़

मिनरल वाटर के नाम पर सामान्य आरओ से पानी को फिल्टर कर पानी का कारोबार जोरों पर चल रहा है। सामान्य पानी को फिल्टर...

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 04:00 AM IST
मिनरल वाटर के नाम पर सामान्य आरओ से पानी को फिल्टर कर पानी का कारोबार जोरों पर चल रहा है।

सामान्य पानी को फिल्टर कर आरओ व मिनरल वाटर का नाम देकर बेचा जा रहा हैं। सप्लाई किया जा रहा यह फिल्टर वाटर किसी भी दृष्टिकोण से शुद्ध व फिल्टर नहीं हैं। हैरत की बात तो यह है कि इस तरह हो रहे स्वास्थ्य से खिलवाड़ को लेकर कभी विभाग ने कार्रवाई की ही नहीं है। कैंपरों द्वारा पानी की सप्लाई करने वाले कारोबारियों की शहर में बाढ़ आई हुई है। तापमान बढ़ने के साथ-साथ गर्मी के बढ़ जाने से ये लोग अपने रेट भी बढ़ा देते हैं। कस्बे मे दुकानों व निजी कार्यालयों में मिनरल वाटर के नाम पर बिक रहा फिल्टर पानी की दर प्रति कैंपर २० से 30 रूपए वसूले जा रहे हंै। शादी, पार्टी व प्रतिष्ठा समारोह में कैंपरों की ज्यादा मांग रहने के कारण कई बार पानी को मात्र ठंडा कर सप्लाई किया जाता है मगर टीडीएस की जांच के लिए कोई पहुंचता ही नहीं है।

एसी से ठंडा किया जाता है पानी : प्लास्टिक की कैन में बिकने वाले पानी को मिनरल वाटर का नाम दिया जाता है। जबकि पीने वाले को यह पता ही नहीं होता कि असल में यह पूर्णरूप से शुद्ध किया भी गया है कि नहीं। पानी ठंडा होने के कारण पीने वाले को इसका स्वाद भी पता नहीं चल पाता है। शहर में संचालित इन आरओ प्लांट की पडताल करने के लिए भास्कर ने मौके पर जाकर देखा तो अधिकतर जगह एयरकंडीशनर लगा के पानी को ठंडा किया जा रहा था जबकि नियमानुसार ऐसा करना गलत है। एसी से ठंडा किया गया पानी स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

फिल्टर प्लांट संचालक नहीं जानते पानी की शुद्धता के मानक

रीको औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री में एसी से ठंडा किया जा रहा पानी।

कितना होना चाहिए टीडीएस

दरअसल अलग-अगल जगहों का पानी का टीडीएस (टोटल डिजाल्व सॉलिड) स्तर अलग-अगल होता है। इसके मानक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तैयार किए हैं। उसने 100 से 150 स्तर के टीडीएस को ठीक बताया है। शहर में संचालित आरओ प्लांट में एक को छोडकऱ सभी प्लांट में दोयम दर्जे के उपकरणों का उपयोग पानी को शुद्ध करने के लिए किया जा रहा है।

भीनमाल. एक फैक्ट्री में लगा सामान्य दर्जे का आरओ।

गुणवत्ता की जांच का नहीं प्रावधान

हर रोज शहर में तीन से चार हजार कैन और कैम्पर बेचे जा रहे हैं। बगैर लाइसेंस का यह कारोबार धड़ल्ले से शहर में चल रहा है। चिकित्सा विभाग जहां इनके लिए लाइसेंस न होने की बात कह रहा है, वहीं जलदाय विभाग उसकी इसमें कोई भूमिका होने से इनकार कर रहा है। रोजाना लोगों को हजारों लीटर पानी बेचने वाले आरओ प्लांट के संचालनकर्ताओं में अधिकांश को यह भी नहीं पता कि पानी की शुद्धता के मानक क्या हैं? पानी की टीडीएस कितना होना चाहिए? इतना हीं नहीं, पानी की जांच कौन करता है?