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60 मीटर सड़क बना नहीं पाई यूआईटी अब भूमि अवाप्ति निरस्त करने की तैयारी

एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने की नीयत से भिवाड़ी यूआईटी (अब बीड़ा) ने चार लाख लोगों की सुविधा, हजारों किसानों की उम्मीदों...

Dainik Bhaskar

Apr 05, 2018, 02:35 AM IST
एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने की नीयत से भिवाड़ी यूआईटी (अब बीड़ा) ने चार लाख लोगों की सुविधा, हजारों किसानों की उम्मीदों और भिवाड़ी के विकास को ही दरकिनार कर दिया। यह मामला भिवाड़ी में प्रस्तावित 60 मीटर रोड का है। भिवाड़ी यूआईटी ने 60 मीटर सड़क बनाने के लिए वर्ष 2011 में किसानों से भूमि अवाप्त भी कर ली, लेकिन सड़क आज तक नहीं बन पाई। अब भूमि अवाप्ति निरस्त करने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह कदम एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से उठाया जा रहा है। अगर यह सड़क बनती तो भिवाड़ी के चार लाख लोगों और उद्योगपतियों को इससे सीधे लाभ पहुंचता और भीतरी क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होता। ग्रेटर भिवाड़ी मास्टर प्लान (बीकेटी ) भिवाड़ी-खुशखेड़ा-टपूकड़ा के तहत वर्ष 2011 में भिवाड़ी यूआईटी ने 60 मीटर सड़क बनाने के लिए किसानों की भूमि अवाप्त की थी। यह सड़क अलवर बाईपास, पावर ग्रिड से रीको औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ते हुए काली खोली होते हुए हाइवे 71बी में मिलनी थी। इसके लिए 1508 खातेदारों की 53.9 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की गई थी।

एक दिन बाद जयपुर में बुलाई बैठक : सूत्रों के अनुसार इस 60 मीटर बाइपास रोड के लिए की गई भूमि अवाप्ति को निरस्त करने के लिए नगरीय विकास विभाग की ओर से 6 अप्रैल यानि एक दिन बाद ही दोपहर को जयपुर में बैठक बुलाई गई है। बैठक में अवाप्ति में विसंगतियों का हवाला देते हुए अवाप्ति को निरस्त करने के संबंध में चर्चा की जानी है। बैठक सचिवालय कक्ष में होनी है।

न मुआवजा मिला, न सड़क बनी, अब विकास पर भी ब्रेक की तैयारी

भूमि के बदले 1508 खातेदारों को कुल 126.51 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाना था। लेकिन खजाना खाली होने का हवाला देते हुए यूआईटी यह मुआवजा खातेदारों को नहीं दे पाई। इसके बाद यूआईटी ने भूमि के बदले भूमि देने के लिए खातेदारों से विकल्प पत्र भरवाए, लेकिन ये विकल्प पत्र महज 25 प्रतिशत खातेदारों ने ही भर कर दिए, जबकि भूमि के बदले भूमि लेने के लिए भी 80 प्रतिशत किसानों को विकल्प पत्र भरने थे। इस कारण खातेदारों को न तो मुआवजा नगद मिला और न ही अवाप्त भूमि के बदले भूमि मिल पाई। ऐसे में न तो सड़क बन पाई और न ही किसानों को लाभ मिला, लेकिन किसानों को उम्मीद थी कि देर सवेरे मुआवजा मिल जी जाएगा। उन्हें यह भी उम्मीद थी की सड़क बनने के बाद उनके गांव सीधे नेशनल हाइवे से जुड़ जाएंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन अब भूमि अवाप्ति निरस्त कर जहां विकास की रफ्तार को ब्रेक लगाए जाने की कोशिश की जा रही है वहीं हजारों किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फेरा जा रहा है।

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