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टैक्स में 2 साल छूट मिली, जापानी कंपनियों ने 5 साल लाभ लिया, 200 करोड़ की चपत

वाणिज्यिक कर विभाग की लापरवाही से नीमराना के जापानी जोन और भिवाड़ी की 10 कम्पनियों ने 5 साल में केन्द्र एवं राज्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 30, 2018, 02:40 AM IST

वाणिज्यिक कर विभाग की लापरवाही से नीमराना के जापानी जोन और भिवाड़ी की 10 कम्पनियों ने 5 साल में केन्द्र एवं राज्य सरकार को करीब 200 करोड़ रुपए के सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी) की चपत लगा दी। इन कंपनियों को सरकार ने विदेशी निवेशक होने नाते 2 वर्ष की अवधि के लिए 0.25 प्रतिशत की दर से बिक्री कर चुकाने की छूट दी थी, लेकिन कंपनियां छूट अवधि खत्म होने के बाद भी इसी दर से कर चुकाती रहीं। छूट का राज्य सरकार से नवीकरण नहीं हुआ।

करीब पांच साल तक चली गड़बड़ी बिक्री कर अधिकारियों को नजर नहीं आई। इस वर्ष विभाग की स्पेशल ऑडिट हुई तो मामला पकड़ में आया। अब विभागीय अधिकारियों ने 10 कंपनियों को टैक्स की अंतर राशि जमा कराने के नोटिस दिए हैं, लेकिन मामला हाई प्रोफाइल जापानी कंपनियों का होने से उनके हाथ-पांव फूले हुए हैं, क्योंकि यह वसूली अपवंचना के 5 साल के भीतर करनी थी और यही अवधि 31 मार्च 2018 को समाप्त हो जाएगी।

31 मार्च तक करनी है बकाया टैक्स की वसूली

इसके बाद कानूनी दांवपेंच में फंस सकता है वसूली का मामला

समझिए,कैसे लगवाई अधिकारियों ने चपत

दरअसल राजस्थान स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम के तहत राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी-2003 ने विदेशी निवेशकों के लिए छूट तय की। इसके तहत जापान की इन कंपनियों को अन्तरराज्यीय बिक्री कर में सामान्य दर 2 फीसदी के बजाय महज 0.25 सीएसटी देना था। इस छूट के लिए कंपनियों को 15 जुलाई 2010 से 14 जुलाई 2012 तक की अवधि का प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसकी अवधि खत्म होने के बाद कंपनियों ने नवीनीकरण नहीं करवाया। बिना छूट प्रमाण पत्र ये कंपनियां 26 जुलाई 2012 से 30 जून 2017 तक 0.25 फीसदी की दर से टैक्स जमा करती रहीं। हैरानी की बात यह रही कि बिक्री कर अधिकारी भी यही टैक्स स्वीकार करते रहे और कोई आपत्ति नहीं की।

अब बचाव में जुटे, महज 10 दिन की डिटेल मांगी : ऑडिट टीम ने पूरी गड़बड़ी पर विभाग के कमिश्नर को जानकारी दी। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने अपने बचाव के लिए इन कंपनियों को 15 जुलाई 2012 से 25 जुलाई 2012 तक की महज 10 दिन की अवधि के लिए नोटिस देकर की गई बिक्री और टैक्स का विवरण मांगा है। मामला विदेशी कंपनियों का होने से विभाग अधिकारी व कंपनियों में हड़कंप मचा है। राज्य सरकार को भी इससे अवगत कराया गया है।

इन्हें थमाया नोटिस : डाइडो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नीमराना, डाइकीकन एयर कडिंशनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, डाइनीची कलर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, निपोन स्टील इंडूसुमिकीन पाइप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, निशिन ब्रेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड व टकाटा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, इमाशेन मेन्युफैक्चरिंग इं.प्रा.लि. माइटेक्स पॉलिमर्स इ.प्रा.लि., निहोन पार्कराइजींग इ.प्रा.लि व टीपीआर ऑटोपार्टस मेन्युफैक्चरिंग इ.प्रा.लि. को नोटिस थमाया है।

जापानी जोन का फाइल फोटो।

छूट प्रमाणपत्र का नवीनीकरण था जरूरी : बिक्री कर विशेषज्ञों का कहना है कि जापानी कंपनियों को 26 जुलाई 2012 की अधिसूचना क्रमांक एफ.12,18 एफडी, टैक्स, 2008,-51 के तहत रियायती सीएसटी दर के प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। इन्हें समापन अवधि के बाद नवीनीकरण कराना चाहिए था। इसके बाद ही 1.75 प्रतिशत की छूट मान्य थी। इस दर से डाइकीन, निपोन, निसिनब्रेक, टीपीआर जैसी कुछ बड़ी कंपनियों पर ही करीब 200 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया हो गया है। इन कंपनियों का करीब 10 हजार करोड़ की बिक्री मानी जा सकती है।

जापानी कम्पनियों के द्वारा दो साल बाद स्टेट स्क्रीनिंग कमेटी से अनुमोदन प्रमाण का नवीनीकरण नहीं करवाने की जानकारी मिली है। अधिसूचना के तहत 10 दिन का टैक्स बकाया होने से 10 जापानी कंपनियों को अंतर राशि बकाया का नोटिस दिया गया। कम्पनियों की ज्यादा राशि बकाया नहीं है। उच्च अधिकारियों को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। -पूरण सिंह, सीटीओ, वाणिज्यिक कर विभाग, शाहजहांपुर

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