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9 माह बाद भी खातों में नहीं पहुंची पेंशन, जिंदा लोगों को दिखाया था मृत

नगरपरिषद भिवाड़ी के कर्मचारियों द्वारा पेंशनधारियों के सर्वे में बरती गई लापरवाही का खामियाजा दस माह बाद भी...

Dainik Bhaskar

Apr 06, 2018, 03:00 AM IST
9 माह बाद भी खातों में नहीं पहुंची पेंशन, जिंदा लोगों को दिखाया था मृत
नगरपरिषद भिवाड़ी के कर्मचारियों द्वारा पेंशनधारियों के सर्वे में बरती गई लापरवाही का खामियाजा दस माह बाद भी संबंधित लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सर्वे में मृत घोषित किए गए पेंशनधारियों ने नगर परिषद पहुंचकर जब स्वयं के जिंदा होने का सबूत पेश किया तो उसके बाद उनकी पेंशन फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी लेकिन नौ माह गुजरने के बाद भी संबंधित लोगों के खातों में पेंशन नहीं पहुंच सकी है। ज्ञातव्य है कि नगरपरिषद की ओर से क्षेत्र के 45 वार्डों में पेंशनधारियों के सर्वे का काम जून 2017 में कराया गया था। जिसके आधार पर जो पेंशनधारी मृत मिले उनकी पेंशन जुलाई माह से रोक दी गई थी। इस सर्वे में नगरपरिषद के कर्मचारियों ने 119 लोगों को मृत मानकर अपनी रिपोर्ट पेश की थी। जिसके आधार पर उनकी पेंशन भी रोक दी गई। जब लोगों की अचानक पेंशन रुकी तो कुछ जागरूक लोगों ने इसकी पड़ताल करनी शुरू की तो सर्वे की परतें उधड़ती चली गई।

सामने आए थे आठ जीवित पेंशनधारी

सर्वे में जिन 119 पेंशनधारियों को मृत बताया गया था, उनमें से आठ पेंशनधारी अपने जिंदा होने का सबूत लेकर नगरपरिषद पहुंचे तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक भी पहुंची। लापरवाही की पराकाष्ठा और लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले इस कृत्य ने जहां सबको चौंका दिया है वहीं सर्वे में इस तरह की लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। केवल आनन फानन में उन्हें नोटिस थमाकर खानापूर्ति कर ली गई।

भास्कर ने किया था खुलासा

मामले की तह में जाकर उस समय दैनिक भास्कर ने पीडि़त पेंशनधारियों से मिलकर उनकी पीड़ा को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। साथ ही यह भी उजागर किया था कि किस तरह कर्मचारियों ने पेंशनधारियों के घरों पर जाने की बजाए एक जगह बैठकर ही उन्हें जीते जी सर्वे में मृत दिखा दिया। भास्कर में खबर प्रकाशन के बाद अधिकारियों ने फिर से उनकी पेंशन शुरू कराने की कार्रवाई शुरू की।

16 दिसंबर 2017 को भिवाड़ी भास्कर में प्रकाशित खबर।


अब नए तरह का मजाक

पीडि़त पेंशनधारी गांव मिलकपुर गुर्जर वार्ड संख्या दो निवासी मालो देवी प|ी बोदनराम ने भास्कर को बताया कि उनकी जब जुलाई माह की पेंशन अगस्त माह में खाते में नहीं आई तो उन्होंने इसकी जानकारी कराई। तब मालूम चला कि उन्हें सर्वे में मृत दिखा दिया गया है। इस कारण पेंशन बंद हो गई है। कई मर्तबा नगरपरिषद के चक्कर काटने के बाद उनकी पेंशन फिर से शुरू करने की कार्रवाई शुरू की गई लेकिन जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक नौ माह की पेंशन अभी तक उनके खाते में नहीं पहुंची है। जबकि ऑनलाइन स्टेटस में फरवरी 2018 के नाम से 1500 रुपए उनके खाते में जमा होना दर्शाया जा रहा है। वृद्वा मालोदेवी का कहना है कि उनके बेटे ने जब इस संबंध में जानकारी की तो बताया गया कि बजट नहीं होने के कारण अभी पेंशन नहीं डाली जा सकी है।

दो और मामले आए सामने

सर्वे में मृत दिखाकर जिन दो और वृद्धाओं की पेंशन बंद की गई थी उनके खाते में भी अभी पेंशन नहीं पहुंच सकी है। इनमें एक वृद्वा सैदपुर गांव की है जबकि दूसरी मिलकपुर गुर्जर की रहने वाली है। बताया जा रहा है कि इनके ऑनलाइन स्टेट्स में जनवरी व फरवरी 2018 की पेंशन खाते में जमा होने की जानकारी दर्शायी जा रही है जबकि वास्तविकता में खातों में रुपए पहुंचे ही नहीं।

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